
एकल पीठ के फैसले में क्या कमी? मेडिकल कॉलेज आरक्षण पर सरकार की अपील पर हाईकोर्ट का सवाल
मेडिकल कॉलेजों के आरक्षण पर आए शासनादेश को रद्द करने के खिलाफ सरकार ने की हाईकोर्ट में अपील की है। इस पर अदालत ने पूछा कि एकल पीठ के निर्णय में क्या कमी है। अब मामले पर हाईकोर्ट अगली सुनवाई मंगलवार को करेगा।
यूपी सरकार ने अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के सम्बंध में पारित शासनादेशों को रद्द करने के एकल पीठ के निर्णय के विरुद्ध विशेष अपील दाखिल की गई है। सोमवार को उक्त अपील पर सुनवायी करते हुए, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से पूछा है कि उक्त निर्णय में क्या कमी है। मामले की सुनवायी मंगलवार को होगी।

न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की अपील पर सुनवायी हुयी। न्यायालय ने अपीलार्थी के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर को स्पष्ट करने को कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों व आरक्षण सम्बंधी प्रावधानों पर विचार के उपरांत पारित एकल पीठ के उक्त 25 अगस्त के निर्णय में क्या कमी है।
उल्लेखनीय है कि एकल पीठ ने यह पाते हुए कि शासनादेशों दिनांक 20 जनवरी 2010, 21 फरवरी 2011, 13 जुलाई 2011, 19 जुलाई 2012, 17 जुलाई 2013 व 13 जून 2015 के जरिए आरक्षित वर्ग के लिए को 79 प्रतिशत से अधिक सीटें सुरक्षित की गई हैं, उक्त शासनादेशों को निरस्त कर दिया है, साथ ही उक्त कॉलेजों में आरक्षण अधिनियम, 2006 का सख्ती से अनुपालन करते हुए, नये सिरे से सीटें भरने का आदेश दिया है।
याची के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दलील दी थी कि उक्त मेडिकल कॉलेजों में राज्य सरकार के कोटे की कुल 85-85 सीटें हैं जबकि सिर्फ 7-7 सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए रखी गई हैं। वहीं महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा व ट्रेनिंग की ओर से दलील दी गई थी कि इंदिरा साहनी मामले में शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि 50 प्रतिशत की सीमा अंतिम नहीं है, इससे अधिक आरक्षण दिया जा सकता है।
प्रवेश ले चुके 10 हजार से अधिक मेडिकल छात्रों की धड़कनें तेज
लखनऊ। नीट यूजी-2025 की पहले चरण की काउंसलिंग को लेकर अभी असमंजस बरकरार है। इस चरण में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले चुके 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। दरअसल, हाईकोर्ट द्वारा अंबेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर व जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग रद्द किए जाने के आदेश दिए गए हैं।
यह फैसला एससी कोटे में तय सीमा से अधिक आरक्षण दिए जाने के आधार पर दिया गया है। इस निर्णय के खिलाफ चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सोमवार को हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दाखिल की, जिस पर सुनवाई शुरू हो गई है। दरअसल समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित वर्ग के लिए स्पेशल कंपोनेंट के तहत मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा विभाग को दिया था। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर व जालौन में ऐसे मेडिकल कॉलेज खोले गए, जिसकी फंडिंग समाज कल्याण विभाग द्वारा की गई।
इन कॉलेजों में एमबीबीएस की 100-100 सीटें हैं। इसमें 15 फीसदी सेंट्रल कोटे की हैं जबकि बाकी बची 85 सीटों में से 62 सीटें अनुसूचित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित कर दी गई। सालों से यह सिलसिला लगातार चलता आ रहा है। मगर इस बार एक अभ्यर्थी द्वारा हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में इसे चुनौती दिए जाने के बाद न्यायालय ने चारों मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए।
विभाग ने छात्रों के भविष्य का दिया हवाला
हालांकि इस फैसले का असर पहले चरण की पूरी काउंसलिंग पर पड़ेगा। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ले चुके 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के सामने संकट पैदा हो गया है। यदि चार कॉलेजों की काउंसलिंग निरस्त हुई तो विभाग को पूरे चरण की काउंसलिंग ही दोबारा करानी पड़ेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को रिवीजन बेंच में दाखिल स्पेशल अपील में यही दलील दी गई है कि 10 हजार से अधिक बच्चे प्रवेश ले चुके हैं।
दोबारा काउंसलिंग होने की स्थिति में इन छात्रों के साथ अन्याय होगा। साथ ही यह तथ्य भी उठाया गया है कि इसी विषय पर डिवीजन बेंच में सुनवाई चल रही है, ऐसे में सिंगल बेंच का आदेश आ गया है। काउंसलिंग दोबारा कराने से बचने के लिए विभाग इस साल की मोहलत चाहता है ताकि अगले साल इसमें सुधार किया जा सके। इस मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई होगी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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