ऐक्शन लो वरना… नगर निगम में अवैध टैक्स वसूली पर भड़के सीएम योगी, दी आखिरी चेतावनी

मुख्य संवाददाता, कानपुर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में मंडलायुक्त से साफ कहा कि नगर निगम में किसी व्यक्ति विशेष के नाम से टैक्स कैसे चल रहा है? नगर निगम में ये क्या हो रहा है? जबरन टैक्स के साथ ही जबरन ठेकेदारी और ठेकेदारी में भी माफियागिरी कैसे चल रही है? इस पर तत्काल रोक लगाएं और कार्रवाई करें।

CM Yogi Adityanath
सीएम योगी आदित्यनाथ

कानपुर नगर निगम की परियोजनाओं में कई सालों से चले आ रहे लंबे खेल की परतें अब उधड़ने लगी हैं। यहां हो रही ‘अवैध वसूली’ की ‘घंटी’ लखनऊ तक बजी तो हाहाकार मच गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस टैक्स पर वीडियो कांफ्रेंसिंग में ‘हंटर’ चला दिया है। खास बात है कि सीएम की सख्ती के बाद अभी तक खुलेआम ‘टैक्स’ वसूली कर रहे ‘खिलाड़ी’ की भी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई है। उस पर चौतरफा शिकंजा कसने के लिए बड़े प्रशासनिक और पुलिस योद्धा लगा दिए गए हैं। सीएम ने अफसरों से सीधे दो टूक कहा है कि अगर आप लोगों के स्तर से वसूली और मााफियागिरी पर कार्रवाई न हुई तो खुद मुझे किसी के अधिकार छीनने पड़ेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार की शाम को वीडियो कांफ्रेंसिंग में मंडलायुक्त से साफ कहा था कि ‘कानपुर नगर निगम में किसी व्यक्ति विशेष के नाम से टैक्स कैसे चल रहा है? नगर निगम में ये क्या हो रहा है? जबरन टैक्स के साथ ही जबरन ठेकेदारी और ठेकेदारी में भी माफियागिरी कैसे चल रही है? इस पर तत्काल रोक लगाएं और कार्रवाई करें।’ बता दें कि पिछले चुनाव के दौरान एक खास टैक्स वसूली को विपक्ष ने मुद्दा बनाया था। बाद में बागी पार्षदों ने भी इस टैक्स का भंडाफोड़ किया। निगम के टेंडरों में माफियागीरी की सूचना के बाद मुख्यमंत्री के कड़े रुख से पूरे खेल पर शिकंजा के लिए यहां तीन चेक प्वाइंट लगाए गए हैं। जिसका एक सिरा मंडलायुक्त के हाथ में पहुंच गया है, तो दूसरा सिरा पुलिस कमिश्नर के हाथों में। एक सिरा खुफिया विभाग से जुड़े अफसर के पास पहुंच चुका है। इसी बीच नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शहर में वसूली की घंटी को खामोश कराने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।

पंद्रहवें वित्त की खुल गईं फाइलें

सूत्रों का कहना है कि पंद्रहवें वित्त आयोग की रकम की खूब बंदरबांट हुई है। अगर सिर्फ इसी वित्तीय वर्ष की बात करें तो लगभग 300 करोड़ इस मद से मिले थे। इसमें सॉलिड वेस्ट के लिए 199 करोड़ था और बाकी वायु की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए था। मुख्यमंत्री के सख्त रुख अख्तियार करने के बाद नगर निगम में पंद्रहवें वित्त की फाइलें भी खोली जाने लगी हैं। इन फाइलों की जांच से यह साफ हो गया कि कुछ खास पार्षदों के प्रस्तावों को ही आगे बढ़ाया गया और इसकी स्वीकृति दी गई। अभी तक 70 प्रतिशत से ज्यादा काम कुछ खास पार्षदों के प्रस्तावों पर ही दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। अभी दो दिन मे स्थिति साफ होगी।

खास पार्षदों के प्रस्ताव हुए संशोधित

जो ‘खास’ पार्षद हैं उनके प्रस्ताव भी संशोधित कराए गए और पंद्रहवें वित्त से उनके कार्यों को और भी विस्तार दिया गया। जिनकी फाइल 50 से 60 लाख रुपये तक की फाइनल हो चुकी थी उसे एक करोड़ से भी ज्यादा तक पहुंचाया गया। बताते चलें कि यह आरोप भाजपा के छह बागी पार्षदों ने भी लगाया था और सोशल मीडिया पर उनके आरोप आज भी वायरल हो रहे हैं। इनमें से बागी पार्षद पवन गुप्ता द्वारा यहां सीएम को ज्ञापन देने का मामला भी चर्चा का विषय बना था। इसमें उन्होंने नगर निगम से जुड़े एक रसूखदार के पुत्र पर वसूली के आरोप लगाए थे।

पंद्रहवें वित्त आयोग में हैं पांच सदस्य

पंद्रहवें वित्त आयोग से जो प्रस्ताव तैयार होते हैं उसकी स्वीकृति के लिए पांच सदस्य हैं। महापौर प्रमिला पांडेय इस आयोग की समिति की खुद अध्यक्ष हैं जबकि जिलाधिकारी, केडीए उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त और अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सदस्य हैं। सूत्र बताते हैं कि इस मद से जिन विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार होते हैं उनमें ‘व्यक्ति विशेष’ की ही ज्यादा चलती है, अन्यथा परियोजनाएं ही पास नहीं होतीं और काम रुक जाता है। पिछले वर्ष भी एक सदस्य की आपत्ति के बाद काम रुक गए थे।

नए ठेकेदारों की इंट्री’ में माफियागिरी

सूत्रों के मुताबिक नए ठेकेदारों की नगर निगम में इंट्री कराने में भी माफियागिरी चलती है। उनका रजिस्ट्रेशन तभी संभव है जब व्यक्ति विशेष (जिसके नाम पर टैक्स के बारे में मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कहा है) की मर्जी हो। दरअसल, वर्ष 2024 में एक नया नियम पास कराया गया था। इसमें तय हुआ कि नए ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जिसमें महापौर द्वारा नामित दो पार्षद होंगे। तीसरे सदस्य के रूप में एक अधिशासी अभियंता होगा। इस नियम से अधिकारियों के हाथ बंध गए।

ठेकेदारों का कॉकस कर रहा काम

जांच में पता चला है कि नगर निगम में कुछ ठेकेदारों का कॉकस काम कर रहा है। गोपनीय जांच कर रहे नगर निगम के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हॉट मिक्स प्लांट से सड़कें बनाने के लिए भी एक एसोसिएशन बना हुआ है। लगभग चार वर्षों से यही एसोसिएशन तय करता है कि किसे हॉट मिक्स प्लांट का काम मिलेगा और किसे नहीं। इसमें रसूखदार ने कई ठेकेदारों को जोड़ रखा है। कॉकस आपस में तय करता है कि किस ठेके में कौन भाग लेगा और किसकी-किसकी तीन बिड अपलोड होगी। पहले ही तय हो जाता है कि किसकी बिड सबसे कम की होगी ताकि उसे काम मिले। जिसे काम मिलता है उसका कमीशन ‘टैक्स’ की ‘घंटी’ बजा कर वसूल लिया जाता है। इसमें एसोसिएशन का एक बड़ा पदाधिकारी और जिसके नाम से टैक्स वसूला जाता है, वही मिलकर सारे निर्णय लेते हैं।

एक ठेकेदार की इंट्री न होने से बिगड़ी बात

एक ठेकेदार का कानपुर निगम में रजिस्ट्रेशन न होने से बात और बिगड़ गई। ठेकेदार ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। कॉकस ने यह रजिस्ट्रेशन होने ही नहीं दिया और टैक्स की मांग कर दी तो ठेकेदार सीधे शासन तक पहुंच गया। वहां पूरी कहानी बता दी। पहले से ही इस टैक्स की बात ऊपर पहुंच ही चुकी थी और बागी पार्षदों ने भी लिखित शिकायत में इस टैक्स और नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। सब मिलाकर मामला गंभीर हो गया और मुख्यमंत्री ने इस पर अफसरों की क्लास ले ली। जांच में पता चला कि इसी कॉकस के ‘आशीर्वाद’ से नगर निगम के प्रोजेक्ट की स्वीकृति होती है। इसमें कुछ इंजीनियर भी शामिल हैं।

वीडियो कांफ्रेंसिंग में अचानक बदल गया विषय

शनिवार की शाम को वीडियो कांफ्रेंसिंग यूं तो सिर्फ पांच मुद्दों पर होनी थी मगर जलभराव को लेकर जैसी ही बारी कानपुर की आई मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन की बात को बीच में ही रोका और अचानक विषय बदल दिया। वह सीधे यह पूछ बैठे कि कानपुर नगर निगम में ये क्या हो रहा है? किस-किस तरह की टैक्स वसूली किस-किस व्यक्ति के नाम पर हो रही है, इसे लेकर भी वह बेहद नाराज नजर आए। उनके तेवर देख अफसरों की हालत खराब हो गई थी। स्थानीय उच्चाधिकारी यह समझ नहीं पा रहे थे कि मुख्यमंत्री ने अचानक विषय बदलकर इतनी गंभीर बात कैसे कर दी? इसका जवाब भी अफसरों को नहीं सूझ रहा था। मुख्यमंत्री सीधे नगर विकास मंत्री एके शर्मा और कानपुर के मंडलायुक्त से ही सब कुछ पूछते रहे। इस दौरान मीटिंग में माहौल इतना गर्म हो गया था कि अफसर चुपपाच बैठे रहे। मीटिंग खत्म होने में रात के लगभग दस बज गए थे। मीटिंग में मौजूद उच्चाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री हर हाल में इस मामले में कार्रवाई चाहते हैं।

बागी पार्षदों ने सुलगाई थी चिंगारी, अब झुलसेंगे कई

बागी पार्षदों द्वारा सुलगाई चिंगारी, अब ‘आग’ का रूप धारण कर चुकी है। मुख्यमंत्री के सख्त रुख से साफ हो गया है कि इस मामले में अब कई झुलसेंगे सिर्फ ठेकेदार ही नहीं बल्कि इंजीनियर और अन्य भी हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि ठेकेदारी में वसूली और माफियागिरी में नगर निगम के कुछ इंजीनियरों को भी संरक्षण मिल रहा था।

नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों को उठाने को लेकर ही भाजपा के छह पार्षद निशाने पर आ गए थे। हालांकि इन पार्षदों में विकास जायसवाल, पवन गुप्ता, आलोक पांडेय, लक्ष्मी कोरी आदि कभी नहीं डिगे। लगातार लिखित शिकायतें करते रहे और भाजपा के पदाधिकारियों के सामने भी अपनी बात रखते रहे। यह अलग बात है कि तब इनकी शिकायतों की सुध नहीं ली गई जिससे वसूलीबाजों की हिम्मत और बढ़ती गई। अब जब मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अधिकारियों की क्लास ली है तो सभी गंभीर हो गए हैं।

महापौर ने नहीं दिया जवाब

महापौर प्रमिला पांडेय से मुख्यमंत्री के तेवर से लेकर बाद के घटनाक्रमों पर उनका पक्ष जानने के लिए उनके दो मोबाइल नंबरों पर छह कॉल की गई, तीन व्हाट्सएप मैसेज और तीन टेक्स्ट मैसेज भेजे गए मगर उनका कोई जवाब नहीं आया। न तो उनका मोबाइल उठा और न ही उन्होंने मैसेज के जरिए ही पक्ष रखा।

दो दिन में दिखेगा असर

मंडलायुक्त के.विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कानपुर नगर निगम के ठेकेदार माफिया और जबरन निजी टैक्स वसूली करने वालों पर शिकंजा कसने का निर्देश दिया है। इसे लेकर नगर आयुक्त के स्तर से कार्रवाई हो रही है। दो दिन में परिणाम देखने को मिलेगा। मामले में किसी के अधिकार भी छीने जा सकते हैं।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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