​ग्राम ​प्रधानों को प्रशासक बनाने के अध्यादेश पर HC ने सरकार से क्या कहा? 4 हफ्ते का समय भी दिया

प्रयागराज, विधि संवाददाता
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ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सख्त रुख अपनाते अपनाया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब के लिए चार हफ्ते का समय दिया।

कोर्ट का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के गत 25 मई के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा व आयुष पांडेय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तारीख तय की है।

जनहित ​याचिका में राज्य सरकार के गत 25 मई के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया है यह सरकारी आदेश एक्ट संख्या 6 (वर्ष 2017) की धारा 12(3A) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया था। याचियों का तर्क है कि सरकार द्वारा इस्तेमाल की गई यह शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 243(आई)(ई) के तहत असंवैधानिक है। कहा गया कि इस अध्यादेश से वर्तमान ग्राम प्रधानों को आगामी छह माह तक प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित किया जा रहा है। याची युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय ने ने संविधान के अनुच्छेद 243(i)(ई) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा शक्तियों का यह प्रयोग पूरी तरह असंवैधानिक है।

पांच वर्षीय विधि पाठयक्रम में तीसरे वर्ष के याची छात्रों ने कहा कि यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 243ई की मूल भावना एवं संवैधानिक व्यवस्था के प्रतिकूल है क्योंकि संविधान पंचायती संस्थाओं में समयबद्ध एवं नियमित चुनाव सुनिश्चित करता है। याचियों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस विस्तार को अपरिहार्य परिस्थितियां व जनहित जैसे व्यापक एवं अस्पष्ट आधारों पर उचित ठहराने का प्रयास किया है जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस, तार्किक या संवैधानिक कारण नहीं बताया है। इस प्रकार की कार्यवाही लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण एवं स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक अवधारणा पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम लाल पटेल बनाम उप्र राज्य के मामले में भी इसी प्रकार के एक अध्यादेश को असंवैधानिक एवं घोषित किया है। जनहित याचिका के माध्यम से प्रदेश में ग्राम पंचायतों के लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की संवैधानिक सुरक्षा एवं शीघ्र बहाली की मांग भी की गई है।

जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई में यह ध्यान दिलाए जाने पर कि याचिका में एक्ट की धारा 12(3ए) की वैधता को सीधे चुनौती नहीं दी गई है, याचियों ने संशोधन के लिए समय मांगा था। उसके बाद की सुनवाई में ​याचियों के संशोधन प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका में सुधार करने की अनुमति दी थी।

Deep Pandey

लेखक के बारे में

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दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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