Hindi NewsUP NewsWere the Delhi blasts planned using the Session app? Intelligence agencies suspect it
तो क्या सेशन ऐप पर हुई थी दिल्ली धमाकों की प्लानिंग? खुफिया एजेंसियों को शक

तो क्या सेशन ऐप पर हुई थी दिल्ली धमाकों की प्लानिंग? खुफिया एजेंसियों को शक

संक्षेप: दिल्ली ब्लास्ट और आतंकी गतिविधियों के लिए की प्लानिंग के लिए आतंकी डॉक्टरों ने सेशन एप्लीकेशन का सबसे अधिक इस्तेमाल किया खुफिया एजेंसियों को शक है। ऐसी जानकारी गिरफ्तार डॉक्टरों की मोबाइल से भी मिली है।

Fri, 14 Nov 2025 05:28 AMDeep Pandey मेरठ, विनय शर्मा
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खुफिया एजेंसियों को शक है कि दिल्ली धमाकों और आतंकी गतिविधियों की प्लानिंग के लिए आतंकी डॉक्टरों ने सेशन एप्लीकेशन का सबसे अधिक इस्तेमाल किया। बेहद कम चर्चित इस एप्लीकेशन को चलाने के लिए न तो मोबाइन नंबर की जरूरत होती है और न ही ई-मेल आईडी की। यह ऐप मैसेज को कई सर्विस लोकेशन पर भेजता है, इसके कारण इसका आईपी एड्रेस ट्रेस करना काफी मुश्किल हो जाता है। इस एप्लीकेशन को इस्तेमाल करने के दौरान मोबाइल फोन का जियोलॉजिकल डाटा या मेटा-डाटा भी सेव नहीं होता। माना जा रहा है कि इन्ही कारणों से प्रचलित सोशल मीडिया मैसेजिंग एप्लीकेशन की जगह इसका इस्तेमाल किया गया।

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श्रीनगर में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के पोस्टर लगाने वाले डॉक्टर गैंग काफी समय से दिल्ली में हमलों की प्लानिंग कर रहे थे। यह तैयारी जैश और अलकायदा की शह पर चल रही थी। चिकित्सक जैसे सम्माननीय पेशे की आड़ में टेररिस्ट टीम विस्फोटक जुटा रहे थे, एक दूसरे के संपर्क में लेकिन किसी को इसकी कानों कान भनक नहीं लगी।

सूत्रों की मानें तो गिरफ्तार आतंकी डॉक्टरों के मोबाइल की जांच के दौरान खुफिया एजेंसियों को सेशन एप्लीकेशन के बारे में जानकारी मिली। इसी आधार पर माना जा रहा है कि अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए नेटवर्क के सदस्यों ने बातचीत और सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए इस ऐप का इस्तेमाल किया। सार्वजनिक जीवन में सफेदपोश का जीवन जी रहे इन लोगों के लिए यह ऐप इसलिए भी मुफीद साबित हुआ क्योंकि इसके लिए इन्हें कहीं भी अपना फोन नंबर या ई-मेल आईडी नहीं देनी पड़ी।

ऐसे काम करता है सेशन एप्लीकेशन

इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के बाद यह सिर्फ अकाउंट बनाने के लिए सिर्फ डिस्प्ले नाम मांगता है। इसे दर्ज करते ही आपका अकाउंट बन जाता है। इसके बाद सीधे किसी भी साथी के अकाउंट आईडी को स्कैन कर या एकाउंट आईडी डालकर सीधे मैसेज कर सकते हैं। इसके जरिये फोटो वीडियो और वॉयस मैसेज भेजे जा सकते हैं। ऐसे ही बड़ी आसानी से ग्रुप बनाए जा सकते हैं।

कई देशों में सर्वर लोकेशन पर घूमता है मैसेज

साइबर एक्सपर्ट आर्य त्यागी ने बताया कि इस तरह की एप्लीकेशन को गोपनीयता बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यहां आईडी बाइनरी कोड (अंकों) में दिखाई देती है। इसके अलावा यह भी पता नहीं चलता कि सामने वाला कहां से मैसेज भेज रहा है, चूंकि इस तरह की एप्लीकेशन आपका लोकेशन डाटा भी नहीं मांगता। सेशन एप्लीकेशन पर जाने वाला मैसेज कई देशों के सर्वर से होकर सामने वाले तक पहुंचता है, इसलिए संदेश भेजने वाले और रिसीव करने वाली की लोकेशन पता नहीं चलती। इस तरह की एप्लीकेशन पर निगरानी भी संभव नहीं है। इस एप्लीकेशन पर किए मैसेज और तमाम डाटा को खुद डिलीट भी कर सकते हैं।

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Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey
दीप नरायन पांडेय, डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में 13 साल से अधिक का अनुभव। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में कार्यरत रहे। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में हैं। राजनीति के साथ क्राइम और अन्य बीटों पर काम करने का अनुभव। और पढ़ें
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