हम वो नहीं जो मुश्किल समय में साथ छोड़ दें, तृणमूल और द्रमुक की हार पर बोले अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एकजुटता का संदेश देते हुए शुक्रवार को कहा कि वह मुश्किल समय में उनका 'साथ नहीं छोड़ेंगे।' उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें।'

Akhilesh Yadav: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में क्रमश: तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को करारी शिकस्त मिलने के बाद, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एकजुटता का संदेश देते हुए शुक्रवार को कहा कि वह मुश्किल समय में उनका 'साथ नहीं छोड़ेंगे।' उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें।' यादव ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन के साथ अपनी हालिया मुलाकात की तस्वीरें भी पोस्ट कीं।
दोनों निवर्तमान मुख्यमंत्री, बनर्जी और स्टालिन हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अपनी-अपनी सीट भी हार गए। यादव की यह पोस्ट काफी मायने रखती है क्योंकि बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद सपा प्रमुख ने बृहस्पतिवार को कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनके प्रति एकजुटता व्यक्त की थी। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ममता के कालीघाट स्थित आवास पर अखिलेश का स्वागत किया था।
यूपी मॉडल की तर्ज पर डरा-धमका कर बंगाल में कराया चुनाव
ममता से अखिलेश की मुलाकात सियासी लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद विपक्षी दल अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ममता से मुलाकात में अखिलेश ने बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्षी एकता के लिए अपने समर्थन को दोहराया। अखिलेश ने आरोप लगाया था कि बंगाल में चुनाव 'उत्तर प्रदेश मॉडल' की तर्ज पर 'डरा-धमका' कर और 'हेरफेर' कर कराये गए। वहीं, ममता ने पश्चिम बंगाल चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया है।
भाजपा पर वोटों की डकैती का आरोप
वहीं दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में मामता बनर्जी की हार पर भाजपा पर यूपी की तरह वोटों की डकैती डाले जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जो मामता दीदी ने देखा है वो हम 2022 के विधानसभा चुनाव में देख चुके हैं। अखिलेश ने कुंदरकी, रामपुर व मिल्कीपुर (अयोध्या) में 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में सपा को भाजपा से अधिक मिले वोटों के साथ इन सीटों पर 2025 में उपुचुनाव में मिली हार के आंकड़े भी रखे। अखिलेश ने कहा कि यूपी में भी केंद्रीय बल लगाकर भाजपा ने वोट बदले थे। मतगणना से सपा कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक भगाया गया था। 2022 में यूपी में पुलिस कर्मियों ने ड्रेस बदलकर फर्जी वोट डाले थे। दावा किया कि यूपी में 2027 में पीडीए ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


