
बांके बिहारी मंदिर में सैकड़ों साल पुरानी परपंरा टूटी, गुस्से में क्यों सेवायत?
यूपी के बांके बिहारी मंदिर में सैकड़ों साल पुरानी परपंरा आज टूट गई। आराध्य ठाकुर बांके बिहारीलाल को आज न तो बाल भोग अर्पित किया जा सका और न ही राजभोग लगाया गया। सेवायत और श्रद्धालुओं में आक्रोश हैं।
वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को आराध्य ठाकुर जी को आज न तो बाल भोग अर्पित किया जा सका और न ही राजभोग लगाया गया। जहां एक ओर इससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं आराध्य ठाकुरजी को भोग अर्पित न होने की जानकारी मिलते मंदिर के सेवायत गोस्वामीजनों के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं में आक्रोश है। सभी का कहना है कि सैकड़ों वर्ष प्राचीन परपंरा आज टूट गई। यह वास्तव में निराशाजनक है।
जानकारी के अनुसार मंदिर में आराध्य ठाकुर बांके बिहारीलाल के लिए भोग तैयार करने की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता नामक एक व्यक्ति को दे रखी थी। मयंक गुप्ता हलवाइयों के माध्यम से ठाकुरजी के लिए सुबह बालभोग, दोपहर के राजभोग, शाम को उत्थापन भोग तथा रात्रि में शयन भोग तैयार करवाकर प्रतिदिन मंदिर के सेवाधिकारी को सौंपते है और सेवाधिकारी इसे ठाकुरजी को अर्पित करते हैं। सोमवार को बालभोग जब सेवाधिकारी के पास नहीं पहुंचा तो पता चला कि भोग तैयार करने वाले हलवाई आज आए ही नहीं है। पता चला कि मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी द्वारा भोग तैयार करने वाले हलवाइयों का कमेटी द्वारा पूर्व का भुगतान अब तक नहीं किया गया। भुगतान न होने के कारण हलवाइयों ने भोग निर्माण कार्य से स्वयं को अलग कर लिया।
इस संबंध में कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी का कहना है कि आज जब वह दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे और यह जानकारी मिली कि ठाकुरजी को भोग नहीं लगाया गया है तो उन्होंने आराध्य ठाकुरजी के भोग की व्यवस्था की। उन्होंने यह भी बताया कि भोग तैयार करने वाले मयंक गुप्ता का भुगतान होना बाकी था। इस संदर्भ में कई बार उसने भुगतान करने के लिए भी कहा था। भुगतान होने की प्रक्रिया में समय लग रहा था। उन्होंने स्वयं भी उसे पैसे की जरूरत होने पर व्यक्तिगत तौर पर सहायता की थी।
वहीं मंदिर सेवायतों का कहना है कि बार-बार इस प्रकार की व्यवस्थागत चूक मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है। सेवायतों ने आरोप लगाया कि मैनेजमेंट कमेटी के गठन के बाद से कई बार परंपरागत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। वहीं श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भगवान की सेवा और भक्तों की आस्था को भुगतना पड़ रहा है।
उठे सवाल
हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी का गठन मंदिर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन आज की घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह समिति वास्तव में परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं को समझ पा रही है या नहीं। श्रद्धालुओं और सेवायतों ने एक स्वर में मांग की है कि हलवाइयों का बकाया भुगतान तुरंत किया जाए। ठाकुरजी की सेवा में किसी भी प्रकार की बाधा भविष्य में न आए। साथ ही परंपराओं का सम्मान करते हुए निर्णय लिए जाएं।





