हनुमानगढ़ी गए, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद बताई वजह
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब तक अयोध्या राम मंदिर राजनीतिक प्रभाव से मुक्त नहीं होता, वह दर्शन के लिए नहीं जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में मूल रामलला विराजमान की मूर्ति नहीं है और संतों से मंदिर को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कराने के लिए आंदोलन करने का आह्वान किया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को कहा कि जब तक अयोध्या का राम मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कार्यालय जैसी स्थिति से मुक्त नहीं होता, वह वहां दर्शन करने नहीं जाएंगे। स्वामी ने कहा कि उनकी दृष्टि में वर्तमान व्यवस्था में रामलला का वास्तविक स्वरूप वहां स्थापित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जिस रामलला विराजमान के पक्ष में न्यायालय का निर्णय आया था, वर्तमान में वही स्वरूप मंदिर में विराजमान नहीं है। वहां एक काल्पनिक मूर्ति की पूजा की जा रही है। उन्होंने अयोध्या के संतों से आह्वान किया कि वह आंदोलन कर राम मंदिर को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कराएं।
अयोध्या के संतों की समिति बने- अविमुक्तेश्वरानंद
अयोध्या में बाईपास किनारे धर्मू पुरवा स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुझाव दिया कि अयोध्या के संतों की एक समिति हो, जो मंदिर की व्यवस्था देखें। सरकार का इसमें कोई दखल ना हो। सरकार कुछ करना चाहती हो तो वह अपनी समिति बनाकर केवल निगरानी कर सकती है ताकि व्यवस्था में छेड़छाड़ ना करें। प्रदेश की राजनीति पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में स्वामी ने कहा कि वह फिलहाल न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन करेंगे और न पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का।
'न योगी न अखिलेश किसी का समर्थन नहीं करेंगे'
उन्होंने कहा कि एक पक्ष सरकार में रहते हुए गौमाता को राज माता का दर्जा नहीं दे रहा है, जबकि दूसरे दल ने भी राजनीतिक एजेंडे में गौमाता को राज माता बनाने का संकल्प शामिल नहीं किया है। ऐसे में वह किसी का समर्थन नहीं कर सकते। कहा कि वह पूरे उत्तर प्रदेश की प्रत्येक तहसील और विधानसभा क्षेत्र में जाकर गौमाता के संरक्षण और सम्मान के लिए जनजागरण अभियान चला रहे हैं।
हनुमानगढ़ी में दर्शन किए, नहीं गए राम मंदिर
राम जन्मभूमि प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उनको भी मैं नोटिस भेजूंगा। उन्होंने एक बयान में कहा था कि अविमुक्तेश्वरानंद अभी शंकराचार्य नहीं है। कई प्रश्नों पर उनके तल्ख तेवर भी दिखे। प्रेस वार्ता के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हनुमानगढ़ी पहुंचकर दर्शन पूजन किया। इसके बाद वे सीधे जानकीघाट बड़ा स्थान पहुंचे। यहां महंत जन्मेजय शरण के सानिध्य में उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत दिलीप दास, करतलिया आश्रम पीठाधीश्वर महंत रामदास, श्रीराम आश्रम के महंत जयरामदास, नागा राम लखन दास, पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय 'पवन' आदि मौजूद रहे।


