308 पहियों वाला वायरल ट्रक कब पहुंचेगा लखीमपुर खीरी की चीनी मील? कट गया इतने रुपये का टोल
वेसल को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतारा गया और वहां से 308 पहियों वाले विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रक ट्रेलर पर लादकर सड़क के रास्ते से झारखंड, बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है।

यूपी के लखीमपुर खीरी के कुंभी में स्थित बलरामपुर चीनी मिल देश का पहला चीनी आधारित पीएलए (पॉलीलैक्टिक एसिड) बायोपॉलिमर प्लांट स्थापित कर रही है। इसके लिए बेल्जियम से एक भारी भरकम मशीन मंगाई गई है, जोकि पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का कारण बन गई है। प्लांट के लिए बेल्जियम से एक विशालकाय रिएक्टर/बायलर मशीन को पहला ओडिशा के पारादीप पोर्ट मंगाया गया, जिसके बाद ओडिशा, झारखंड, बिहार होते हुए 308 पहियों वाले विशालकाय ट्रक पर इसे बलरामपुर चीनी मिल ले जाया जा रहा है। यह पिछले दिनों चंदौली, वाराणसी पहुंचा और दो दिन पहले ही गाजीपुर के लिए रवाना हुआ है।
200 टन वजनी ट्रक का टोल भी कटा
काफी विशालकाय होने की वजह से ट्रक के साथ-साथ पुलिस भी व्यवस्था बनाने के लिए लगातार चलती है। ट्रैफिक पुलिस के पास ट्रक को अपनी सीमा से दूसरी सीमा तक सकुशल पहुंचाने की जिम्मेदारी है। दिनभर में महज दस किलोमीटर तक ही ट्रक चल पाता है। सोशल मीडिया पर इसके काफी वीडियोज और फोटोज वायरल होते रहते हैं। यह वाराणसी के डाफी टोल प्लाजा पर इसका 693 रुपये का टोल भी कट गया। इसके रास्ते में कई ओवर ब्रिज भी पड़ रहे हैं, जिन्हें खोलकर हटाया जा रहा है। इसके अलावा, हाईवे के ऊपर बने बोर्ड को भी खोला जाता है, ताकि ट्रक की ऊंचाई अधिक होने की वजह से उसे आवाजाही में कोई दिक्कत न हो।
कब तक पहुंच जाएगा बलरामपुर चीनी मिल?
200 टन वजनी शुगर मिल वेसल का रूट भी बदला गया है। गाजीपुर होते ही यह लखीमपुर खीरी की तरफ बढ़ेगा और फिर कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल में वेसल को लगाया जाएगा। इसके अपने गंतव्य तक पहुंचने में अभी तीन से चार हफ्तों का समय लग सकता है, क्योंकि इसकी स्पीड बहुत कम है। दिनभर में महज 10-20 किलोमीटर ही चल पाता है। वाराणसी से पहले यह चंदौली में भी दो दिनों तक फंसा रहा। जमीन चूंकि दलदली थी, इसलिए इसे निकालते के लिए अलग से रास्ता बनाया गया।
बेल्जियम से समुद्री रास्ते से ओडिशा के पोर्ट पहुंची है मशीन
बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए करीब 164–200 टन वजनी और लगभग 41 मीटर लंबी औद्योगिक मशीन/वेसल भारत लाई गई है। यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतारी गई और वहां से 308 पहियों वाले विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रक ट्रेलर पर लादकर सड़क के रास्ते से झारखंड, बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश ले जाई जा रही है। इस ट्रक की खासियत यह है कि इसका ट्रेलर करीब 100 फीट लंबा और 7 मीटर चौड़ा है और इतने भारी भार को संभालने के लिए 308 पहियों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से सामान्य सड़क मार्ग पर इसे निकालना बड़ी चुनौती बन रहा है। कई जगह बिजली के तार, खंभे, गेट और फुटओवर ब्रिज रास्ते में बाधा बने, जिन्हें हटाना या अस्थायी रूप से उठाना पड़ा।


