
किसानों के लिए आई एडवाइजरी, मवेशियों को बाढ़ में संक्रामक रोगों से बचाना अहम
उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में नदियों के उफनाने से बाढ़ आई है। बाढ़ इलाकों में पशुओं के बीच संक्रामक बीमारियां ना फैलें, इसके लिए आईवीआरआई, बरेली ने पशुपालकों के लिए मवेशियों की देखभाल के लिए एडवाइजरी जारी की है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के बीच संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने एक एडवाइजरी निकाला है और पशुपालकों को सतर्क किया है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद मच्छर, मक्खी, जोंक जैसे परजीवी फैलने वाली बीमारियों का वाहक बनकर जानवरों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। दुधारू पशुओं में खुजली रोग और कमजोरी के अलावा दूध उत्पादन गिरने का भी खतरा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों के पशुपालकों और किसानों के लिए आईवीआरआई ने हाल ही में विशेष एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में मच्छर, जोंक, मक्खी, किलनी जैसे परजीवी से बचने के उपाय बताए गए हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि बाढ़ का पानी जाने के बाद इन परजीवियों की संख्या तेजी से बढ़ती है। ये संक्रामक रोगों के वाहक बनकर सीधे पशुओं पर हमला करते हैं। खुजली, कमजोरी, दुग्ध उत्पादन में कमी और अन्य गंभीर बीमारियां मुख्य रूप से इन्हीं परजीवियों की वजह से होती हैं।
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आईवीआरआई की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही एंटी-पैरासिटिक और कृमिनाशक दवाइयां इस्तेमाल करें। खुद से दवाइयों का उपयोग न करने और ओवरडोज का खास ध्यान रखने कहा गया है ताकि परजीवी प्रतिरोधक क्षमता नहीं हासिल कर सकें। त्रिवेणी दत्त ने कहा कि एडवाइजरी का मकसद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पशुओं की सेहत को सुरक्षित रखना और उन्हें संक्रामक बीमारियों से बचाना है।
गोशालाओं के आसपास सफाई बेहद जरूरी
विशेषज्ञों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने फार्म व पशु आवास के आस-पास जलभराव और गंदगी न होने दें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के साथ-साथ डॉक्टर द्वारा बताए गए कृमिनाशक शेड्यूल और दवा कोर्स का पालन करें। साल में एक बार एंटी-पैरासिटिक दवाइयों का प्रकार बदलना भी आवश्यक बताया गया है।
पशु चिकित्सकों से जरूर लें सलाह
आईवीआरआई ने चेताया है कि पशुपालक भूलकर भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न दें, न ही लगातार एक जैसी दवा का उपयोग करें। सामूहिक कृमिनाशन नहीं करें। इसके बजाय फार्म में परजीवी नियंत्रण का पूरा रिकॉर्ड रखें और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित दवा ही दें। बाढ़ क्षेत्र के पशुपालकों से अपील की गई है कि वे इन दिशा-निर्देशों का पालन करें ताकि पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी उत्पादकता पर कोई विपरीत असर न पड़े।





