वेनेजुएला संकट की तपिश यूपी तक पहुंची, 4 हजार करोड़ का विदेशी व्यापार दांव पर, निर्यातकों की बढ़ी धड़कनें
वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद उपजे हालात अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इसका सीधा असर यूपी के विदेश कारोबार पर पड़ने की आशंका है। फियो की रिपोर्ट ने भी इसे व्यापारिक दृष्टिकोण से गंभीर संकट माना है।

दक्षिण अमेरिका में एक बार फिर भू-राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद उपजे हालात अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के विदेश कारोबार पर पड़ने की आशंका है। भारतीय निर्यात परिषद (फियो) की रिपोर्ट ने भी इसे व्यापारिक दृष्टिकोण से गंभीर संकट माना है। रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही वेनेजुएला से प्रदेश का सीधा कारोबार बहुत सीमित है, लेकिन उसी रास्ते से जुड़े अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ वर्षों से चल रहे व्यापार पर संकट के बादल हैं।
उत्तर प्रदेश का गुयाना, ब्राजील, कोलंबिया समेत दक्षिण अमेरिका के आधा दर्जन देशों से सालाना करीब चार हजार करोड़ रुपये का कारोबार है। इन देशों में प्रदेश से लेदर उत्पाद, रेडीमेड गारमेंट, कृषि आधारित वस्तुएं और दवाओं की जबरदस्त मांग है। कानपुर, आगरा, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद जैसे औद्योगिक शहर इस व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं। अकेले कानपुर से ही करीब 250 करोड़ रुपये का निर्यात दक्षिण अमेरिकी बाजारों में होता है। मौजूदा हालात को देखते हुए इन शहरों के निर्यातक अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
तनाव लंबा खिंचा तो वेनेजुएला के रास्ते व्यापार में तमाम बाधाएं
फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के अनुसार वेनेजुएला संकट अगर लंबा खिंचता है तो समुद्री और लॉजिस्टिक मार्गों पर गंभीर असर पड़ सकता है। वेनेजुएला के रास्ते जिन देशों से वर्षों से व्यापार होता आ रहा है, वहां माल की आवाजाही में बाधाएं बढ़ सकती हैं। सबसे बड़ा खतरा भुगतान प्रणाली को लेकर है। अमेरिकी प्रतिबंधों और वित्तीय सख्ती के चलते बैंकों के माध्यम से भुगतान में देरी, एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) खोलने में दिक्कत और डॉलर ट्रांजेक्शन पर अतिरिक्त जांच जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। तनाव बढ़ने की स्थिति में नए ऑर्डर रुक सकते हैं, वहीं शिपिंग बीमा की लागत भी तेजी से बढ़ेगी। बीमा कंपनियां जोखिम बढ़ने का हवाला देकर प्रीमियम महंगा कर सकती हैं, जिससे निर्यात की कुल लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा। खासतौर पर छोटे और मध्यम निर्यातकों पर इसका सबसे ज्यादा दबाव पड़ने की आशंका है।
सरकार की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी
लघु उद्योग भारती महिला विंग की अध्यक्ष प्रेरणा वर्मा कहती हैं कि दक्षिण अमेरिकी बाजार उत्तर प्रदेश के लिए लंबे समय से भरोसेमंद रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता प्रदेश के निर्यात ग्रोथ को झटका दे सकती है। निर्यातक वैकल्पिक रूट, नए भुगतान विकल्प और अन्य बाजारों की तलाश में जुट गए हैं, लेकिन उनका कहना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है। सीएलई के पूर्व रीजनल चेयरमैन जावेद इकबाल कहते हैं कि वेनेजुएला संकट ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में उठने वाली हलचल का असर स्थानीय उद्योग और कारोबार तक पहुंचता है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और यूपी के निर्यातकों को इस संकट से उबरने में कितना समय लगता है।
वेनेजुएला संकट से ये परेशानियां
भुगतान प्रणाली पर संकट
शिपिंग और लॉजिस्टिक बाधाएं
नए ऑर्डर रोकने की आशंका
बाजार हिस्सेदारी खिसकने का डर
शिपिंग बीमा महंगा होने का खतरा
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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