DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विश्व अल्जाइमर डे: आईने से पूछता है कौन हूं मैं...

प्रतीकात्मक तस्वीर

डिमेंशिया का रोगी खुद को भी नहीं पहचानता। बीमारी की भयावहता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि वह आईने में अपने अक्स को भी अनजान मानता है। वह अपने बच्चों को भी पहचानने में असहाय हो सकता है। 

बीएचयू के सर सुन्दरलाल अस्पताल के मनोचिकित्सक व सीजोफ्रेनिया (डिमेंशिया) क्लीनिक के इंचार्ज प्रो. संजय गुप्ता ने बताया कि अधिक उम्र व मस्तिष्क में विशेष रासायनिक परिवर्तन स्मृति दोष के जिम्मेदार होते हैं। जब स्मृति का क्रमिक ह्रास होने लगता है, काम करने व कहीं आने जाने अथवा सामान्य वस्तुओं और व्यक्तियों को पहचानने में परेशानी होने लगती है तब इसे डिमेंशिया कहते हैं। आम तौर पर 60 वर्ष की उम्र के बाद यह रोग होता है लेकिन मस्तिष्क में रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण पहले भी कोशिकाएं मरने लगती हैं।

प्रारंभिक अवस्था में उपचार संभव
प्रो. गुप्ता ने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में उपचार संभव है। रोग यदि दूसरे स्टेज पर है तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है लेकिन रिकवरी मुश्किल है। सर सुंदरलाल अस्पताल में हफ्ते में चार दिन सीजोफ्रेनिया क्लीनिक चलती है। यहां पहुंचने वाले 75 फीसदी मरीजों को डिमेंशिया होता है। 

डिमेंशिया के लक्षण 
कुछ समय पहले की गई क्रिया भूलना तथा एक ही क्रिया को बार-बार करना। बातचीत में सामान्य शब्दों को भूल जाना अथवा याद करने में दिक्कत होना। खाना, नहाना, दरवाजा खोलना, अच्छी तरह जानने वाले रास्तों को भूलना, मन मस्तिष्क में जल्दी-जल्दी परिवर्तन। समय, स्थान तथा मौसम को बताने में असमर्थता तथा बातचीत के क्रम को भूलना, तेजी से वजन घटना, खाने को चबाना व निवाले को निगलना तक भूल जाने की समस्या हो सकती है। 

निदान 
डिमेंशिया के मरीज के शारीरिक एवं मानसिक अवस्था की जांच से बीमारी का निर्धारण किया जाता है। नजदीकी रिश्तेदार व परिवार के सदस्य के जरिए पीड़ित की अजीब हरकतों की जानकारी से भी उपचार की रणनीति बनाई जा सकती है। रक्त की जांच भी सहायक होती है। बीमारी का उपचार दवाओं से किया जाता है। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे नए प्रयोगों व प्रयासों के चलते आज इलाज में काफी सहायता मिल चुकी है। 

खास बात
यदि परिवार में अधिक उम्र के व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन दिखे व भूलने की समस्या जटिल होती प्रतीत हो तो चिकित्सक की सलाह लें। इस स्थिति को हंसी में न टालें, समय से किए गए उपचार से स्थिति की भयावहता से बचा जा सकता है।  

दिमाग को एक्टिवेट करने के लिए शराब व सिगरेट पीना गलत है। माइंड को एक्टिवेट करने के लिए सबसे आसान तरीका है, रोजाना एक घंटा अखबार पढ़ें।  
प्रो. संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू अस्पताल

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:World Alzheimers Day Who asks me who I am