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VIDEO जब पीएचसी पहुंचे कमिश्नर ने फोन मिलाकर आशा से पूछा, प्रसुता का खाता कब खुलवाया था?

कमिश्नर दीपक अग्रवाल मंगलवार दोपहर चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जननी सुरक्षा योजना का हाल जानने पहुंच गए। यहां रखे रजिस्टर में प्रसुताअों का नाम देखा अौर एक-एक कर उन्हें फोन मिलाना शुरू कर दिया। पता चला कि प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। एक प्रसुता को फोन मिलाने के दौरान कर्मचारी ने आशा का नंबर मिला दिया। पहले उसे प्रसुता समझकर पूछा, लड़का हुआ था या लड़की। जब पता चला कि वह आशा है तो पूछा प्रसुता का बैंक मे खाता कब खुलवाया था? कमिश्नर का इस तरह से फोन मिला-मिलाकर बात करने से पीएचसी के कर्मचारियों की घिग्घी बंधी रही। 

कमिश्नर ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी अमित कुमार सिंह को निर्देश दिया कि गर्भवती प्रसुताअों के पंजीकरण के दौरान ही बैंक में खाता खोलने की कार्रवाई करा ली जाए। जननी सुरक्षा योजना के रजिस्टर की जांच में पता चला कि अप्रैल से अब तक 67 लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ था। हीरामनपुर की मुन्नी व खालिसपुर की सरिता देवी से फोन से बात कर जननी सुरक्षा योजना के तहत मिले धन के बारे में पूछा। 

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने जननी सुरक्षा योजना में लाभार्थियों का भुगतान न होने का कारण जेएसवाई पोर्टल खराब होना बताया। कमिश्नर ने सीएमओ से फोन पर वार्ता कर तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। वार्ड में गंदगी देख कमिश्नर ने हिदायत दी कि यदि दोबारा गंदगी दिखी तो कड़ी कार्रवाई तय है। 

निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में क्यों हुआ अल्ट्रासाउंड 
महिला वार्ड में भर्ती रमचंदीपुर की सुनीता ने कमिश्नर के पहुंचने से पूर्व बेटी को जन्म दिया था। कमिश्नर ने सुनीता और उसके पति राजेंद्र को बेटी होने की बधाई दी। तभी सुनीता की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर कमिश्नर की नजर पड़ गई। उन्होंने निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में हुए अल्ट्रासाउंड के संबंध में सुनीता के पति राजेंद्र से पूछा कि इसके लिए उससे किसने कहा। राजेंद्र ने बताया कि आशा बहु प्रमिला सिंह के कहने पर उसने 600 रुपये में अल्ट्रासाउंड कराया था। इस पर कमिश्नर ने गहरी आपत्ति जताते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से जवाब तलब किया। इसी दौरान अपना इलाज कराने आए फरीदपुर के महेंद्र से कमिश्नर ने चिकित्सा सुविधा की जानकारी ली। 

मात्र 20 मरीजों का हुआ था पंजीकरण
ओपीडी रजिस्टर में मात्र 20 मरीजों का पंजीकरण हुआ था। विस्तृत जानकारी नहीं थी। कमिश्नर ने रजिस्टर में समुचित जानकारी अंकित करने को कहा। आशाओं को प्रोत्साहन धनराशि के भुगतान की स्थिति खराब होने पर नाराजगी जताई। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी कमिश्नर के सवालों का जवाब नहीं दे सके। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टोर रूम के निरीक्षण के दौरान कई दवाइयों पर नॉट फॉर सेल और सरकारी दवा होने से संबंधित मोहर न लगे होने पर भी कमिश्नर ने पूछा कि आखिर कैसे समझा जाए कि ये सरकारी दवा हैं और इन्हें बाजार में नहीं बेचा जा सकता? चिकित्सा अधिकारी से समुचित जवाब न मिलने पर कमिश्नर नाखुश दिखे।

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  • Web Title:When commissioner arrived at PHC asked the phone with hope and asked when did you open the account