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28 अक्तूबर, 2020|9:26|IST

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साबरमती रिवर फ्रंट बनाने वाली कंपनी बनाएगी काशी विश्वनाथ कारिडोर, जानिये कैसा होगा पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

गुजरात में साबरमती रिवर फ्रंट बनाने वाली अहमदाबाद की कंपनी पीएसपी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड काशी विश्वनाथ कारिडोर बनाएगी। शुक्रवार को वित्तीय मूल्यांकन के बाद पीएसपी के नाम पर मुहर लग गयी। कम्पनी को जनवरी के पहले हफ्ते में काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

करीब 318 करोड़ से 50 हजार वर्ग मीटर में प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने 25 नवम्बर को टेंडर जारी किया था। 12 दिसम्बर को हुई प्री-बिड मीटिंग में पीएसपी के साथ ही दिल्ली की शापूर्जी पल्लोंजी, हैदराबाद की कम्पनी रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर और लखनऊ की कार्वी डाटा ने भी भाग लिया। 20 दिसम्बर को खोले गए टेंडर में पीएसपी और शापूर्जी के आवेदन मिले।

26 दिसम्बर को दोनों कम्पनियों ने तकनीकी मूल्यांकन में क्वालीफाई कर लिया। शुक्रवार को हुए वित्तीय मूल्यांकन में 10 फीसदी अधिक लागत पर पीएसपी ने जीएसटी के साथ 339 करोड़ रुपये पर क्वालीफाई कर गयी। जबकि दूसरी कम्पनी शापूर्जी ने 423 करोड़ रुपये का खर्च बताया था। 

मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने बताया कि अनुभवी और कम लागत वाली पीएसपी को फाइनल कर दिया गया है। जनवरी 2020 के प्रथम सप्ताह से काशी विश्वनाथ धाम का काम विधिवत शुरू होगा और सब कुछ ठीक रहा तो 18 महीने में बाबा का भव्य मंदिर तैयार हो जाएगा। पहले चरण में मंदिर परिसर और दूसरे चरण में गंगा घाट क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण का काम गंगा तट पर स्थित नेपाली मंदिर से लेकर ललिता घाट, जलासेन घाट और मणिकर्णिका घाट के आगे सिंधिया घाट तक का हिस्सा शामिल है।

काशी विश्वनाथ कारिडोर का शिलान्यास पीएम मोदी ने इसी साल 8 मार्च को किया था। मां गंगा के पावन तट पर स्थित विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी के हृदय में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों हेतु सुगम दर्शन की सुविधा के दृष्टिगत श्री काशी विश्वनाथ धाम की विशाल रचना की जा रही है। जो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी से जोड़ेगा। ऐतिहासिक रूप से इस मंदिर का जीर्णोद्धार इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा वर्ष 1780 में कराए जाने के लगभग 239 वर्षों के उपरांत मां गंगा के आशीर्वाद से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (kashi vishwanath corridor) की महिमा एवं वैभव को और प्रखर करने के लिए वाराणसी के सांसद एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi)ने संकल्पित होकर इस नवनिर्माण की आधारशिला रखी है।

उल्लेखनीय हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा भी वर्ष 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अपने उद्बोधन में काशी में आने वाले दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं के मंदिर दर्शन हेतु संकीर्ण गलियों का उल्लेख किया गया था। वर्तमान में लगभग 100 वर्षों के पश्चात मंदिर की महिमा एवं वैभव को और प्रखर करने के लिए संकल्पित होकर यह नवनिर्माण कराया जा रहा है। 

परियोजना के अंतर्गत सभी भवनों/दुकानों इत्यादि को सहमति के आधार पर क्रय किया गया है, जिसमें निवसित 500 परिवारों को आपसी सहमति से विस्थापित किया गया है। इन भवनों को क्रय एवं रिक्त कराने के उपरांत प्राप्त सभी मंदिर प्राचीन धरोहर हैं, जो इन भवनों से आच्छादित थे। उन्हें भवनों को ध्वस्त कर मलवा निस्तारण के उपरांत जनसामान्य को दर्शन पूजन हेतु सुलभ कराया गया है। इन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण का भी कार्य कराया जा रहा है। इन मंदिरों को इस परियोजना का भाग बनाकर इस क्षेत्र को एक अद्भुत संकुल का रूप दिया जाएगा।

परियोजना में मंदिर प्रांगण का विस्तार कर इसमें विशाल द्वार बनाए जाएंगे तथा एक मंदिर चौक का निर्माण किया जाएगा। जिसके दोनों तरफ़ विभिन्न भवन जैसे कि विश्रामालय, संग्रहालय, वैदिक केंद्र, वाचनालय, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र, व्यावसायिक केंद्र, पुलिस एवं प्रशासनिक भवन, वृद्ध एवं दिव्यांग हेतु एक्सीलेटर एवं मोक्ष भवन इत्यादि निर्मित किए जाएंगे। परियोजना अंतर्गत 330.00 मीटर लम्बाई एवं 50.00 मीटर चौड़ाई एवं घाट से एलिवेशन 30 मीटर क्षेत्र में निर्माण कराया जाएगा।

आनंद कानन में होगा रूद्र वन
विश्‍वनाथ कॉरिडोर में आने वालों को काशी नगरी के धार्मिक और सांस्‍कृतिक स्‍वरूप के दर्शन तो होंगे ही, आनंद कानन और रूद्र वन की परिकल्‍पना भी साकार होगी। इस लिहाज से कॉरिडोर एरिया में सिर्फ 30 फीसदी क्षेत्र में निर्माण होगा। धार्मिक और पौराणिक स्‍वरूप को प्रदर्शित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाएगा। कल्‍चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्‍ट फैसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्‍यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दशनार्थी सुविधा केंद्र अधिकतम दो मंजिला ही बनेंगे। इनकी ऊंचाई विश्‍वनाथ मंदिर के शिखर से उपर नहीं होगी। रूद्र वन में रुद्राक्ष के 350 से ज्‍यादा पौधे लगाए जाने की योजना है।

पिंक सिटी की तरह चमकेगा
विश्‍वनाथ धाम में दो परिसर होंगे। मुख्‍य परिसर मंदिर के चारों ओर होगा और चार प्रवेश द्वार होंगे। घाट और मंदिर परिसर को जोड़ने के लिए एक विशाल प्रवेश द्वार होगा। इसे पार करते ही मंदिर चौक सामने होगा। यहां से घाट तक बनने वाले कॉरिडोर में फर्श से लेकर दीवारों तक में गुलाबी पत्‍थरों का उपयोग किए जाने से यह पिंक सिटी की तरह चमकेगा। मार्बल और ग्रेनाइट भी लगेगा, लेकिन यह भवनों के भीतरी हिस्‍से में होगा। कॉरिडोर से जुड़ने वाले ललिता घाट पर वृद्ध एवं दिव्‍यांगों के लिए एस्‍केलेटर की सुविधा होगी वहीं मणिकर्णिका घाट के ऊपर विशाल मंच होगा। यहां से मंदिर परिसर को जोड़ने केलिए पाथवे बनेगा।

परियोजना की लागत
-13 मार्च 2018 को डीरेका में प्रधानमंत्री ने कॉरिडोर निर्माण में सहमति जतायी थी
-20 अप्रैल 2018 को सर्वे शुरू हुआ 
-सितम्बर 2018 श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विशिष्ट विकास क्षेत्र परिषद का गठन 
-आठ मार्च 2019 को पीएम ने भूमि पूजन और आधारशिला रखी 
वैल्यू एड 
-18 माह के अंदर पूरा किया जाएगा  
-जून 2021 में पूरा किया जाएगा 

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  • Web Title:Vishwanath Corridor will form Gujarat company who build Sabarmati River Front