ज्ञानवापी मुकदमे में स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वादमित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजयशंकर रस्तोगी को स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) ने सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने के एवज में 2.08 लाख रुपये जमा करने का नोटिस भेजा है।
ज्ञानवापी मुकदमे में वादमित्र विजयशंकर रस्तोगी को एलआईयू ने 2.08 लाख रुपये की सुरक्षा शुल्क जमा करने का नोटिस भेजा है। रस्तोगी ने गृह विभाग और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा की मांग की है, यह कहते हुए कि उन्हें जान-माल का खतरा है।

वाराणसी। ज्ञानवापी मुकदमे में स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वादमित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजयशंकर रस्तोगी को स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) ने सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने के एवज में 2.08 लाख रुपये जमा करने का नोटिस भेजा है। यह धनराशि छह माह पूर्व से लगाई गई है। नोटिस मिलने के बाद अधिवक्ता सकते में हैं।
नोटिस पर प्रतिक्रिया
उन्होंने गृह विभाग और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धनराशि जमा करने में असमर्थता जताते हुए पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। वादमित्र ने गृह विभाग के सुरक्षा अनुभाग के विशेष सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि वह वर्ष 1991 से ज्ञानवापी का मुकदमा देख रहे हैं। वर्तमान में उसी मुकदमे में बतौर वादमित्र पैरवी कर रहे हैं। ज्ञानवापी जैसा अत्यंत संवेदनशील मामला होने के कारण उन्हें जान-माल का खतरा है। इसे देखते हुए शासन-प्रशासन ने वर्ष 2019 में एक निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया था। तब इसके लिए कोई शर्त नहीं थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर विवाद
वर्ष 2021-22 में सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव आया था जिसे खारिज कर दिया था। बताया कि वह ज्ञानवापी मुकदमे की पैरवी के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जाते हैं। अब 15 अप्रैल 2026 को एलआईयू के माध्यम से जानकारी दी गई कि शासनादेश के तहत सुरक्षाकर्मी की अवधि 25 प्रतिशत निजी व्यय पर छह माह के लिए बढ़ाई गई है। उनका आरोप है कि न तो संबंधित शासनादेश की प्रति उन्हें दी गई और न ही इस व्यवस्था के लिए उनसे लिखित अथवा मौखिक सहमति ली गई। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए उन्होंने 2.08 लाख रुपये के कथित सुरक्षा व्यय से मुक्त करने तथा पूर्व की भांति निःशुल्क सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। उधर एलआईयू के एसीपी सदानंद पांडेय ने कहा कि शासनस्तर से धनराशि भुगतान के लिए पत्र आया है जिसे अधिवक्ता को भेजा गया है।
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