वैदिक शिक्षा की उपादेयता को वैज्ञानिकों ने भी स्वीकारा
Varanasi News - वाराणसी में बीएचयू के वेद विभाग द्वारा आयोजित 'स्वर प्रक्रिया विमर्श' कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि वैदिक शिक्षा की उपादेयता को वैज्ञानिक भी मानते हैं। स्वर और व्याकरण के संबंध पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि प्रो. महेंद्र पाण्डेय ने स्वर प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हरिश्वर दीक्षित ने की।
वाराणसी, हिटी। बीएचयू के वेद विभाग की ओर से आयोजित ‘स्वर प्रक्रिया विमर्श’ कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि वैदिक शिक्षा की उपादेयता को आज वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं। स्वर और व्याकरण के अभिन्न संबंध पर कहा कि अर्थ निर्धारण में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पाण्डेय ने स्वर प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के आचार्य प्रो. हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि वैदिक शिक्षा की विशिष्टता सर्वविदित है। प्रो. भगवत शरण शुक्ल ने स्वर और व्याकरण के अभिन्न संबंध को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. हरिश्वर दीक्षित ने स्वर-अध्ययन को शैक्षिक उन्नति के लिए आवश्यक बताया ।
स्वागत एवं विषय स्थापना प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी तथा धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कात्यायन ने किया। संचालन डॉ. उदय प्रताप भारती तथा डॉ. नारायण प्रसाद भट्टराई ने किया। कार्यक्रम में प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, डॉ. बुद्धि सागर मिश्र, अविनाशधर द्विवेदी, पवन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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