‘नमन’ की प्रथम संध्या में दिखा कथक का विशाल स्वरूप
Varanasi News - वाराणसी की संगीत परिषद ने 'नमन' कार्यक्रम के तहत गायन-वादन-नृत्य की जगह नृत्य-वादन और गायन की प्रस्तुति की। कार्यक्रम की शुरुआत काशी के नर्तक पं.विशाल कृष्ण ने की, जिन्होंने चोट के बावजूद उत्कृष्ट नृत्य किया। इसके अलावा वाद्ययंत्र निर्माताओं का सम्मान भी किया गया।

वाराणसी,मुख्य संवाददाता। काशी की पुरानी सांगीतिक संस्था संगीत परिषद ने भी नए दौर की तरफ रुख किया है। संगीत सिद्धांत से इतर विधाओं की प्रस्तुति का क्रम बदल दिया। बनारस के संगीत साधकों को समर्पित ‘नमन’ में गायन-वादन-नृत्य की जगह नृत्य-वादन और गायन कराया गया।नागरी नाटक मंडली के सभागार में शुक्रवार से आरंभ हुए तीन दिनी आयोजन की पहली प्रस्तुति लेकर मंचासीन हुए काशी के ख्यात नर्तक पं.विशाल कृष्ण ने हमजोलियों संस्कृति शर्मा और रौनक श्रीवास्तव के साथ समारोह को शानदार आगाज किया। नृत्यमय गणेश वंदना के बाद कलाकारों ने पारंपरिक कथक की प्रस्तुति दी। दाहिना पैर चोटिल होने के बाद भी विशाल कृष्ण ने जिस अंदाज में नृत्य किया वह उनके समर्पण को दर्शाता है।
ठुमरी ‘बूझत श्याम’ और होरी ‘ब्रज गोपी खेले होली’ पर भावनृत्य देशकाल के अनुरूप रहा।दूसरी प्रस्तुति लेकर मंचासीन हुए पं.सुखदेव मिश्र ने वायलिन और पं.अंशुमान महाराज ने सरोद की शानदार जुगलबंदी से श्रोताओं को आनंदित किया। राग मालकौंस में आलाप से आरंभ हुआ वादन मध्यलय में रूपक ताल और तीन ताल की बंदिशों से गुजरता हुआ राग भैरवी में दादरा से अपने मकाम तक पहुंचा। उदयशंकर मिश्र का तबला संगत इस जुगलबंदी के लिए सोने में सुहागा सिद्ध हुआ।प्रथम संध्या की विराम प्रस्तुति विदुषी सुचरिता गुप्ता के उपशास्त्रीय गायन की रही। उन्होंने महान स्वरसाधिका सिद्धेश्वरी देवी की प्रसिद्ध चैती ‘रात हम देखनी सपनवा हो रामा’ को सुर दिए। उन्होंने अपने गायन का समापन दादरा ‘बांके सइयां ना जाने मन की बतिया हो रामा’ सुनाकर किया। हालांकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीसरी प्रस्तुति राहुल-रोहित मिश्र के गायन की होनी थी लेकिन अपरिहार्य कारणों से वह शामिल नहीं हो सके।इससे पूर्व संगीत परिषद के अध्यक्ष विनय जैन, महासचिव विनोद अग्निहोत्री, नागरी नाटक मण्डली न्यास के अध्यक्ष डॉ.संजय मेहता, सचिव डॉ.अजीत सैगल, विदुषी सुचरिता गुप्ता, मनीष खत्री, सुबोध अग्रवाल एवं दिव्यांश ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। विदुषी सुचरिता गुप्ता के निर्देशन में सप्तक संस्था की 11 महिलाओं ने गणेश वंदना की। पं.विष्णुनारायण भातखंडे एवं पं.विष्णु दिगंबर पलुस्कर का चित्र भी वहां रखे गए थे। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।वाद्ययंत्र निर्माताओं का किया सम्मानसमारोह में दो कार्यक्रमों के बीच के अंतराल में वाद्ययंत्र निर्माताओं का सम्मान किया गया। पहले दिन सम्मानित किए जाने वालों में तबला शिल्पी ताहिर, मुमताज अली और इम्तियाज अली, सितार शिल्पी हरिचरण को सम्मानित किया गया। उन्हें आयोजकों की ओर से स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम् एवं मानपत्र भेंट किए गए।
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