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पूर्वांचल में राहुल की राजनीति का केन्द्र रही है काशी

राहुल गांधी

गांधी परिवार का काशी से गहरा नाता कोई नई पीढ़ी का नहीं बल्कि कई पीढि़यांे का रहा है। चाहे इंदिरा हो या राजीव गांधीके बाद अब अब राहुल गांधी। पूर्वांचल की राजनीति का केन्द्र रही काशी को इंदिरा-राजीव के बाद राहुल गांधी ने भी हमेशा तवज्जो दी है। गांधी परिवार का काशी से रिश्ता पिछले चार दशक से अनवरत चलता आ रहा है।  

पूर्वांचल की राजनीति के पुरोधा कहे जाने वाले औरंगाबाद हाउस के पं. कमलापति त्रिपाठी के अंतिम संस्कार में राजीव गांधी शामिल हुए तो उसके बाद उनके बेटे पं. लोकपति त्रिपाठी के त्रयोदशाह कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिरकत कर काशी एवं पूर्वांचल से रिश्ते को मजबूती दी। उसके बाद राहुल गांधी को जब भी मौका मिला उन्होंने बनारस आने में देरी नहीं की। वह काशी के घाट भी घूमे। लंगर छंका और काशी के व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया। 

राहुल का पूर्वांचल हो या बिहार का राजनीतिक दौरा। काशी उनके केन्द्रबिंदु में रहा। पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चौबे बताते हैं कि वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब चौथी बार भाजपा से डा. शंकर प्रसाद जायसवाल चुनाव मैदान में थे तब डा. राजेश मिश्र के समर्थन में राहुल गांधी ने रोड शो किया था। इस चुनाव में वह स्टॉर प्रचार के रूप मंे उभरे और कांग्रेस को यूपी में काफी सफलता मिली।

पूर्वांचल में राहुल का यह पहला रोड शो था। लिहाजा पूरी काशी उमड़ पड़ी थी। उसके बाद वह राज्यसभा के उपसभापति रहे श्यामलाल यादव के निधन पर काशी आए। उसके बाद से राहुल का बनारस आना लगातार जारी रहा। वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने बनारस में बेनियाबाग मैदान में सभा की। 2010 बनारस में ही प्रदेश कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक हुई थी। जिसमंे सोनिया समेत राष्ट्रीय स्तर के नेता इकठ्ठा हुए थे। वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव के दौान राहुल ने रोड शो किया। वर्ष 2014 में बनारस से नरेन्द्र मोदी के चुनावी घोषणा के बाद राहुल ने पूर्वांचल का तुफानी दौरा बनारस से शुरू किया। उन्होंने कैंट रेलवे स्टेशन पर रिक्शा चालकों के साथ चौपाल लगायी। बाबा दरबार में दर्शन पूजन भी किया। उसके बाद सोनिया बनारस आयी और ऐतिहासिक रोड शो कर काशी से गांधी परिवार के रिश्ते को दर्शाया। बाद में राहुल गांधी ने भी आदमपुर से लंका तक रोड शो किया। राहुल गांधी रविदास मंदिर भी गए और लंगर छंका। बीते विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी एवं राहुल गांधी के रोड शो को आज भी काशी के लोग याद करते हैं। 

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो एक नेता के तौर पर नहीं बल्कि गांधी परिवार के व्यक्तिगत लगाव के चलते राहुल ने पूर्वांचल की राजनीति में हमेशा काशी को तरजीह दी। प्रो. सतीश राय एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल श्रीवास्तव अनु कहते हैं कि बनारस यूपी के साथ बिहार की राजनीति को भी प्रभावित करती रही है। नरेन्द्र मोदी के पहले सांसद फिर पीएम बनने के बाद अब कांग्रेस की राजनीति का केन्द्र भी अब बनारस हो गया है। लिहाजा राजनीतिक प्रतिद्वंदिता ऐसी कि राहुल गांधी का बनारस से लगाव हालिया दिनों में और बढ़ा है। अब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद आने वाले दिनों मंे राहुल की काशी से और भी रिश्ते प्रगाढ़ होने की उम्मीद है। 

कांग्रेस पूरे देश में मजबूत बनकर उभरेगी। राहुल गांधी अब राजनीतिक दृष्टि से काफी परिपक्व हो चुके हैं। उन्होंने जिन संस्कारिक राजनीति का सूत्रपात किया है उससे आने वाले दिनों देश की राजनीतिक दिशा में परिवर्तन आएगा। 
डा. राजेश मिश्र पूर्व सांसद 

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में ऊर्जा आनी तय है। युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। निश्चित तौर पर कांग्रेस अब अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। 
अजय राय पूर्व विधायक 

पार्टी में उत्साह व ऊर्जा का संचार होगा। अनुभवी व नए लोगांे का सामजस्य होगा। राष्टीय से लेकर तक प्रांतीय व जिला स्तर पर परिवर्तन आएगा। 
मणिशंकर पाण्डेय वरिष्ठ नेता 

कांग्रेस को राहुल गांधी के नेतृत्व की जरुरत थी। निश्चित तौर पर अब कांग्रेस में ऊर्जा आनी तय है। जरुरत है अब जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाने की। ऐसा हुआ तो न केवल पार्टी बल्कि देश की राजनीति में बदलाव तय है। 
सतीश चौबे-पूर्व प्रदेश महासचिव 

राहुल गांधी के तेवर से लगता है कि पार्टी के अंदर आमूलचूल परिवर्तन होगा। सत्ता के केन्द्र के ईर्द-गिर्द परिक्रमा करने वालों के दिन लदेंगे। जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा।
अनिल श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेता 

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