DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वाराणसीः लगातार लूटे जा रहे हैं आम लोग, साइबर सेल अौर अधिकारी केवल दे रहे नसीहत

वाराणसी में लगातार लोगों के साथ आनलाइन ठगी हो रही है। मोबाइल पर फोन कर बैंक खाते से गाढ़ी कमाई उड़ाई जा रही है। इस पर रोकथाम के लिए पूरा एक सेल बनाया गया है। जिसे साइबर सेल कहते हैं। लेकिन यह सेल भी लोगों की कमाई बचाने में पूरी तरह विफल हो गया है। साइबर सेल अौर पुलिस के आला अधिकारी केवल लोगों को नसीहत दे रहे हैं। अपनी जिम्मेदारी निभाने की जगह लोगों को बचाव के तरीके बता रहे हैं। 

वाराणसी में इस साल सात महीने में आईटी सेल में ऐसे 218 मामले विभिन्न थानों में दर्ज किये जा चुके हैं। यानी 212 दिनों में 218 मामले हो चुके हैं। हर रोज कोई न कोई मामला दर्ज हो रहा है। कई लोगों को तो पुलिस यह कहकर भगा देती है कि गलती आपकी है। उसकी रिपोर्ट भी नहीं दर्ज होती है।

वैसे तो आईटी सेल में बैंक का नाम लेकर फ्रॉड, सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट, किसी की फोटो वायरल करना, ई-मेल हैक करना, कम्प्यूटर से जानकारी चुराने संबंधी मामले दर्ज होते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा बैंक खाते से रुपये निकालने के ही मामले हैं। 

एसपी क्राइम ज्ञानेंन्द्र नाथ प्रसाद जालसाजों के न पकड़ने जाने के कई कारण बताते हैं। कुछ कारण तो बेहद अजीब हैं। एसपी क्राइम के अनुसार बैंक से रुपये निकालने वाले जालसाज कभी भी अपना सिम और बैंक खाता का इस्तेमाल नहीं करते हैं। जिस बैंक खाता में वह रुपये ट्रांसफर करते हैं वह किसी दूसरे का होता है और उसे उसकी जानकारी तक नहीं होती है। साथ ही जिस सिम से वह लोगों को फोन करते हैं वह भी उनके नाम पर नहीं होता है और उसकी लोकेशन भी अलग-अलग प्रदेशों में मिलती है।  

झारखंड और छत्तीसगढ़ है गढ़
सर्विलांस टीम की मानें तो बैंक से ठगी करने वाले गिरोह अधिकतर झारखंड और छत्तीसगढ़ के होते हैं। लेकिन वह जिन नम्बरों से फोन करते हैं वह दक्षिणी प्रदेशों के होते हैं और वह ठगी करने के बाद नम्बर को बंद कर देते हैं। जालसाजों के निशाने पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अधिक होते हैं। 

बैंक कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध
हाल के दौरान बैंक जालसाजी के सबसे अधिक मामले सरकारी बैंकों के आए हैं। इनमें जालसाज को यह तक पता होता है कि खाते में किस योजना का रुपया आने वाला है। पुलिस को ऐसी आशंका है कि सरकारी बैंक के कर्मचारियों की मिली भगत से ही जालसाजों को ग्राहकों के खाते की  जानकारी मिलती होगी।

लिंक भेजकर करते है ठगी
जालसाज कई बार लोगों को लिंक भेजकर लाटरी में लाखों रुपये या कोई कीमती सामान जीतने का झांसा देते हैं। इसके बाद उनसे पंजीकरण शुल्क के नाम पर लाखों रुपये जमा करा लेते हैं। लेकिन साइबर एक्सपर्ट नहीं होने के कारण इन जालसाजों को भी पुलिस नहीं पकड़ पाती है।

जालसाजी से बचा सकती है जागरूकता 
1. बैंक खाते की जानकारी किसी को भी न दें।
2- विश्वसनीय साइट से ही ऑनलाइन शॉपिंग  करें। 
3. ई-मेल पर आने वाले लिंक को ध्यान से खोलें। कभी भी किसी प्रलोभन में न पड़ें।
4. लॉटरी में रुपये जीतने का मैसेज या कोई लिंक आए तो क्लिक ना करें।
5. ऑफिस या पब्लिक कम्प्यूटर से बैंक अकाउंट को हैंडल करें तो लॉग आउट करना ना भूलें। 
6. क्रेडिट रिपोर्ट कम से कम साल में एक बार जरूर चेक करा लें। 
7. ई-मेल, बैंक लॉग-इन और सोशल मीडिया अकाउंट का अलग-अलग पासवर्ड रखें। 
8. एटीएम कार्ड का पिन कोड को किसी को ना बताएं और रुपये निकालने के दौरान अजनबी की मदद न लें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Varanasi Common people are being looted continuously cyber cells and officers are only giving advice