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30 मई, 2020|2:55|IST

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वाराणसीः लोकसभा चुनाव बाद शहर में बढ़ा बिजली संकट, हर हफ्ते हो रहा बड़ा फाल्ट

नो ट्रिपिंग जोन वाराणसी शहर के लोग लोकसभा चुनाव के बाद से बिजली संकट झेल रहे हैं। चुनाव तक चकाचक रही बिजली व्यवस्था जून से जो बेपटरी हुई, अब तक पटरी पर नहीं आ सकी है। हर दूसरे दिन ब्रेकडाउन आम बात हो गई है तो हर सप्ताह बड़े फाल्ट से चार से 10 लाख की आबादी प्रभावित हो रही है। आये दिन होने वाले फाल्ट से शहर के किसी न किसी इलाके के लोग बेहाल रहते हैं।  विशेष बात यह है कि इस समय मांग से कहीं अधिक बिजली उपलब्ध है लेकिन फाल्ट के कारण लोगों को अनवरत बिजली नहीं मिल पा रही है। 
फाल्ट ढूंढने व उसकी मरम्मत में भी 18 से 37 घंटे तक का समय लग रहा है। पिछले दिनों मछोदरी व लेढ़ूपुर उपकेन्द्रों पर आई खराबी दूर करने में विभाग को पसीने छूट गए। 

शहर में 3.39 लाख उपभोक्ता, औसत दैनिक मांग 470 मेगावाट 
शहर में बिजली के 3 लाख 39 हजार उपभोक्ता हैं। कुल 44 उपकेंद्रों के लिए यहां औसत मांग 470 मेगावाट है जबकि डुबकिया उपकेन्द्र से वाराणसी समेत अन्य आसपास के जिलों में 1130 एमवी बिजली की आपूर्ति की जा रही है। यानी बिली की कमी नहीं है। लोगों के घरों तक निर्बाध बिजली न पहुंच पाने का मुख्य कारण वितरण प्रणाली में होने वाला फाल्ट है। 

इन उपकेंद्रों से आये दिन आपूर्ति बाधित
जून के बाद जुलाई में सबसे अधिक मछोदरी, पांडेयपुर, दौलतपुर, चौकाघाट, विद्यापीठ उपकेन्द्रों से बिजली आपूर्ति में बाधा आ रही है। दो माह में इन उपकेंद्रों पर बड़े फाल्ट से घंटों बिजली गुल रही है है। विद्यापीठ और मछोदरी में दो-दो बार उपभोक्ताओं ने हंगामा भी किया। 

जून से अब तक के बड़े फाल्ट, इतना लगा समय
07 जून - दौलतपुर सब स्टेशन के भक्तिनगर फीडर से जुड़ी भक्तिनगर कॉलोनी में नौ बजे ट्रांसफार्मर में आग लगने के  18 घंटे बाद आपूर्ति बहाल हुई। जबकि विभाग ने डेढ़ घंटे बाद ही आपूर्ति बहाल होने की बात दर्ज किया।
16 जून - कैंट स्टेशन के पीछे खरबूजा शरीफ के पास 33 केवी का केबल टूटा। अगले दिन दोपहर में आपूर्ति शुरू हुई। 
23 जून-  कैंट 132 केवी उपकेंद्र से जुडे 33 केवी वरुणा गार्डेन व न्यू काशी विद्यापीठ फीडरों से आपूर्ति दो बार ट्रिप हुई। 
24 जून- लेढ़ूपुर उपकेंद्र के कंट्रोल रूम में आग लग गई। सभी आठ फीडरों और 33/11 केवी शक्तिपीठ उपकेंद्र से आपूर्ति बंद हो गई। अगले दिन आपूर्ति नार्मल हुई।
27 जून - करसड़ा उपकेंद्र का 33 केवी इनकमिंग केबल जला। रात में 12 बजे एक केबल सही की गई। सुबह पांच बजे फिर खराबी आई। अगले दिन शाम को आपूर्ति हुई।
07 जुलाई - 33 केवी के इनकमिंग केबल बॉक्स जलने से चौकाघाट, बेनिया, मछोदरी से आपूर्ति ठप रही। जंफर उड़ने से विद्यापीठ और नगर निगम उपकेंद्र से नौ घंटे बंद रही।
09 जुलाई - संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पास पेड़ की डाल गिरने से चित्रकूट फीडर की आपूर्ति भोर में तीन से दोपहर 12 बजे तक बंद रही। 
10 जुलाई- शाम पांच बजे फाल्ट आने के कारण पांडेयपुर के पहड़िया फीडर से 10 घंटे बिजली गुल रही।
13 जुलाई - काशी से मैदागिन उपकेंद्र के लिए आने वाली 33 केवी वितरण लाइन का केबल का बॉक्स जलने से मैदागिन, टाउनहाल और चौक उपकेंद्र से पूरे दिन बिजली प्रभावित रही। दो बार ब्रेक डाउन हुआ, दोनों बार गड़बड़ी पता नहीं चल सका। सुबह आपूर्ति नार्मल हुई।
14 जुलाई - नगर निगम उपकेंद्र के पास भूमिगत केबल खराब हो गया। शाम तक आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो उपभोक्ताओं ने हंगामा किया। रात नौ बजे ओवरहेड वायर से किसी तरह आपूर्ति शुरू की गई। 
 23 जुलाई - मछोदरी उपकेंद्र के इनकमिंग 33 केवी केबल में सुबह फाल्ट आया, दोपहर पता लगा। इसे सही करने में 37 घंटे लग गये। 
24 जुलाई - सुबह कोनिया के पास केबल क्षतिग्रस्त होने से मछोदरी उपकेंद्र की आपूर्ति रुक गई। 24 घंटे बाद अगले दिन सुबह आठ बजे आपूर्ति सामान्य हुई।

नौ उपकेंद्रों पर बिजली आपूर्ति का सिंगल सोर्स
शहरी के ऐसे नौ उपकेंद्र हैं, जहां 132 केवी के पारेषण उपकेंद्र से सिंगल लाइन से बिजली आपूर्ति हो रही है। अगर इन उपकेंद्रों के इनकमिंग केबल में फाल्ट आया तो आपूर्ति बहाल करने में एक से दो दिन लगेगा। इनमें एमईएस, रानीपुर, कोटवां, भाटी, डाफी, सांस्कृतिक संकुल, शक्तिपीठ, अमरखेड़ा उपकेंद्रों तक डबल वितरण लाइन दौड़ाने की तैयारी चल रही है।

हर मंडल को प्रति माह दो लाख का मेंटीनेंस खर्च
उपकेंद्रों पर लाइन व उपकरणों के मेंटीनेंस पर सालाना औसतन 24 लाख का अतिरिक्त खर्च है। मेंटीनेंस वर्क के लिए टेंडर होता है। कार्य के बाद भुगतान होता है। सालाना 24 लाख खर्च होने के बाद भी फाल्ट नहीं रुक रहे।

2011 में बनी स्काडा योजना अब तक अधूरी 
स्मार्ट सिटी के तहत जिस स्काडा यानी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजिशन सिस्टम के जरिये बिजली आपूर्ति की बात की जा रही है, उसकी शुरुआत साल 2011 में ही हो चुकी थी। तत्कालीन एमडी सुरेश राम की पहल पर भिखारीपुर मुख्य अभियंता कार्यालय भवन में इसका सेंटर भी तैयार किया गया। कंप्यूटर सिस्टम लगाये गये लेकिन योजना अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है। 

उपकेंद्रों को इंटरकनेक्ट करने की योजना
132 केवी पारेषण केंद्रों से जिन उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति की जाती है, उन्हें आपस में भी जोड़ने की योजना बनी। ताकि  किसी एक में फाल्ट आने की स्थिति में दूसरे उपकेंद्रों से वहां तक बिजली आपूर्ति की हो सके। इस पर भी काम नहीं हुआ। केवल न्यू दौलतपुर उपकेंद्र को सातो महुआ से जोड़ा गया लेकिन उसका एक केबल पांडेयपुर पुलिस चौकी के पास दो साल से डैमेज है।

10 साल पहले बिछे स्टैंडबाई केबल का उपयोग नहीं
वाराणसी। 132 केवी पारेषण केंद्रों से उपकेंद्रों के लिए गई स्टैंडबाई केबल यानी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूसरी केबल का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।  करीब 10 साल पहले बिछी केबलों पर अचानक लोड देने पर फाल्ट आ जा रहे हैं। अभी 24 जुलाई को मछोदरी उपकेंद्र की दूसरी लाइन के साथ भी यही हाल हुआ। मौके पर पहुंचे एमडी ने इस पर नाराजगी भी जताई थी।

33 केवी का केवल एक फाल्ट लोकेटर
वाराणसी। विभाग के पास एक 33 केवी और 11 हजार केवी के दो फाल्ट लोकेटर हैं। 33 केवी के एक फाल्ट लोकेटर से गड़बड़ी पकड़ने में घंटों लग जा रहा है। इसे पैदल लेकर भूमिगत केबल के आसपास चलते हैं। फाल्ट के नजदीक पहुंचने पर यह सूचित करता है। 

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  • Web Title:Varanasi After the Lok Sabha elections increased power crisis in the city big fall every week