अनुदेशकों और शिक्षामित्रों को नया मानदेय इसी महीने से: योगी
Varanasi News - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में 'स्कूल चलो अभियान' का शुभारंभ किया। शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अनुदेशकों को 17,000 रुपये का मानदेय इस महीने से लागू होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर 80,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ड्रॉप आउट रेट को शून्य पर लाने का आह्वान किया गया।

वाराणसी, विशेष संवाददाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी से राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान' का शुभारंभ किया। उन्होंने शिक्षामित्रों ओर अनुदेशकों के लिए बड़ा ऐलान किया। कहा कि अनुदेशकों को 17 हजार रुपये और शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये का मानदेय इसी महीने से लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार पांच लाख रुपये कैशलेस स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध करा रही है। सीएम योगी शनिवार की सुबह शिवपुर कम्पोजिट विद्यालय पहुंचे थे। उन्होंने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के साथ अभियान का शुभारम्भ के मौके पर शिक्षा के क्षेत्र में किए कार्यों को गिनाया। उन्होंने बताया कि 9 वर्ष में लगभग 60 लाख नए बच्चों को बेसिक शिक्षा के स्कूलों से जोड़ा गया है।
विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, पेयजल की व्यवस्था की गई। ड्रॉप आउट रेट 19 से घटकर मात्र 3 फीसदी रह गया है। बताया कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसके अनुरूप परिणाम भी सामने आने चाहिए।विद्यालयों से ड्रॉपआउट रेट शून्य पर लाएं शिक्षकसीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों औऱ शिक्षकों से आह्वान किया कि यह ड्रॉप आउट रेट शून्य तक लाने में जुट जाएं। कहा कि जहां कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं थे, इस बजट में वहां के लिए भी पैसा दे दिया गया। वहां आठवीं तक की शिक्षा थी, हमने इसे 12वीं तक कर दिया। श्रमिकों तथा निराश्रित बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय प्रारंभ किए। इस दौरान योगी सरकार के मंत्री राकेश सचान, अनिल राजभर और रवींद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी, विधायक नीलकंठ तिवारी, अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम तथा सुशील सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा औऱ धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या आदि की भी मौजूदगी रही।2017 के पहले सरकार के एजेंडे में नहीं थी शिक्षासीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी। उन्हें बच्चों की चिंता भी नहीं थी, क्योंकि उनके लोग ही नकल कराते थे। 2017 के पहले ड्रॉप आउट रेट 19 फीसदी था। तीसरी से छठी क्लास के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। बच्चे दिनभर घूमते, स्कूल छोड़कर भैंस चराते, तालाब, मोहल्ले, कीचड़, धूल में खेलते दिखते थे। हमने कारण पूछा तो लोग कहते थे कि स्कूल दूर है। हमने प्रदेश भर का डेटा एकत्र कराया तो निष्कर्ष में पता चला कि बच्चे स्कूल इसलिए नहीं जाते थे, क्योंकि वहां शौचालय, पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। इससे बच्चे अस्वस्थ होते थे।सीएम ने चित्रकूट के डीएम की पहल को सराहामुख्यमंत्री ने चित्रकूट डीएम का उदाहरण देकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे का प्रवेश आंगनबाड़ी केंद्र में कराया। यह काम शिक्षक भी कर सकते हैं। जहां आप पढ़ा रहे हैं, वहीं बच्चों को लेकर जाइए। बच्चा पढ़ेगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सरकार बेसिक शिक्षा के विद्यालयों को संसाधन उपलब्ध करा रही है तो आप भी इन्हें कॉन्वेंट, पब्लिक स्कूल और केंद्रीय विद्यालय जैसा सक्षम बनाएं।एक जुलाई से पहले विद्यालयों को कर लें व्यवस्थितयोगी ने शिक्षकों से कहा कि जुलाई में स्कूल खुलने से पांच दिन पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की सफाई कराएं। स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ पानी आदि के जरिए विद्यालय को व्यवस्थित करें। फिर एक से 15 जुलाई के बीच विद्यालय आए बच्चों के पाठ्यक्रम की तैयारी करें और जो बच्चा नहीं आ पाया, स्कूल चलो अभियान के तहत उसे लाने की तैयारी करें। कोशिश हो कि एक भी बच्चा छूटने न पाए। बच्चों को उदाहरण, कविता, गीत, छोटे फॉर्मूले के जरिए सिखाएं तो वह आसानी से समझ जाएगा। अब रटना नहीं, बल्कि बच्चों को कौशलयुक्त ज्ञान से युक्त करना है।(यह मुख्य खबर है। शेष अगली फाइल में भेजी जाएगी।)
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