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बोले काशी : विकास के ‘गड्ढे’ में डूबी कॉलोनी, सिस्टम ‘मौन’

बोले काशी : विकास के ‘गड्ढे’ में डूबी कॉलोनी, सिस्टम ‘मौन’

संक्षेप:

Varanasi News - वाराणसी के कुशवाहा नगर कॉलोनी में विकास के नाम पर नागरिक सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। मुख्य सड़क की ऊँचाई ने जल निकासी को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे गंदा पानी घरों में घुस रहा है। सफाई व्यवस्था खराब है और बूचड़खानों का अपशिष्ट स्थिति को और बिगाड़ रहा है। यहाँ की सड़कों पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।

Dec 10, 2025 07:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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वाराणसी। विकास की कहानियों में कुशवाहा नगर कॉलोनी शहर का स्याह पक्ष है। आठ फीट ऊंची मुख्य सड़क ने कॉलोनी को ‘गहरा गड्ढा’ बना दिया है। सीवर का पानी घरों में घुसकर ‘उम्मीदें’ डुबो रहा है। गंदा पानी यहां की स्थायी समस्या बन गया है। बूचड़खानों का अपशिष्ट सुख-चैन छीन रहा है। अंधेरी गलियां, कचरे के ढेर और दूषित पानी हर पल सवाल करता है कि क्या स्वच्छ जल और स्वस्थ जीवन यहां के लोगों का मूलभूत अधिकार नहीं है? यह दर्द प्रशासन के संवेदनहीन रवैये की ‘चीख’ है। कोई तो सुने। ------------- लोहता की कुशवाहा नगर कॉलोनी में नागरिक सुविधाएं दम तोड़ चुकी हैं।

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बाशिंदों ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में ‘दुखड़ा’ सुनाया। कहा कि बिना योजना के लोहता मुख्य सड़क के निर्माण ने आसपास की कॉलोनियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। मुख्य सड़क की ऊंचाई 7 से 8 फीट बढ़ा दी गई, जिसके चलते कुशवाहा नगर और आसपास अन्य कॉलोनियां काफी नीचे हो गई हैं। इसका भयावह परिणाम यह है कि सीवर लाइन बेकार हो गई है। जलनिकासी न होने से गंदा पानी कॉलोनियों की सड़कों पर बहता है। उषाराज मौर्या, जयराम मौर्या, जितेंद्र पटेल ने कहा कि सीवर के लगातार जाम रहने से गंदा पानी ओवरफ्लो होकर घरों में घुस रहा है। पीने का पानी भी गंदा आने लगा है। मुख्य सड़क बनने से हमारी जिंदगी नरक हो गई है। सीवर का पानी हर समय घरों के सामने जमा रहता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बारिश के दिनों में घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। कच्ची सड़क बढ़ा रही तनाव सुरेश कुमार श्रीवास्तव, मंजू मौर्या के मुताबिक कॉलोनी की ज्यादातर सड़कें कच्ची और ऊबड़-खाबड़ हैं। मुख्य सड़क तो बन गई, लेकिन हमारी गली की हालत जस की तस है। रेखा देवी, सना परवीन, हिना परवीन ने कहा कि शाम के बाद कच्ची सड़कों पर चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। लोग अक्सर चोटिल हो जाते हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा खतरे में हैं। समा खान, हिना कौशल, रामभरोसे सेठ ने कहा कि आंतरिक सड़कों पर इंटरलॉकिंग लगाने का काम नहीं हो सका है। माता प्रसाद मौर्या, बनवारी लाल ने कहा कि बारिश में मार्ग पर कीचड़ और गड्ढे होने से स्थिति भयावह हो जाती है। लोग मानसिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं। कूड़ा उठान में अनियमितता शशिकांत श्रीवास्तव, विक्की केसरी ने कहा कि कॉलोनी में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़ा गाड़ी रोज नहीं आती, डोर-टू-डोर कूड़ा उठान नहीं होता। संतरा देवी, रंजना ने कहा कि निवासियों के पास घर का कूड़ा जमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। लोग कचरा सड़क किनारे, खाली स्थानों और प्लाटों में फेंकने लगे हैं। विमल देवी, माया देवी, राधा ने कहा कि कॉलोनी में गंदगी और बदबू का माहौल बन गया है। स्ट्रीट लाइटें खराब रूपमनी देवी के मुताबिक कॉलोनी के ज्यादातर हिस्सों में लाइटें नहीं लगी हैं। कहीं हैं भी खराब हैं। उषा देवी ने कहा कि सड़कों की बदहाली, सीवर समस्या और अंधेरा शाम होते ही चुनौती बन जाता है। कच्ची सड़कों पर अंधेरे में पैदल चलना या वाहन चलाना खतरनाक है। मनीष मौर्या, आजाद अहमद ने कहा कि स्ट्रीट लाइटों की कमी से कॉलोनी में असुरक्षा का माहौल रहता है। महिलाओं और बच्चों का रात में निकलना मुश्किल हो गया है। बूचड़खानों के अपशिष्ट से परेशानी शक्ति मौर्या ने ध्यान दिलाया कि लोहता क्षेत्र में संचालित 10-12 बूचड़खानों ने आसपास की कॉलोनियों के वातावरण को अत्यंत दूषित कर दिया है। अमित शर्मा ने कहा कि बूचड़खानों का अपशिष्ट कॉलोनी की सड़कों और खाली स्थानों पर फेंक दिया जाता है। इससे पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध उठती रहती है। बसंत लाल, गीता देवी, अंजू आरा ने बताया कि अपशिष्ट सड़ने से मक्खी-मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे संक्रामक और जलजनित बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। सिमरन, सुमन ने कहा कि कई बार अपशिष्ट सीवर लाइनों में चला जाता है। इससे पहले से ही खराब सीवर लाइन जाम हो जाती है। रितिका मौर्या ने कहा कि बूचड़खानों के अपशिष्ट निस्तारण के लिए कठोर नियम और उनका कड़ाई से अनुपालन जरूरी है। बढ़ रहीं हैं बीमारियां रोशनी भारद्वाज, रोशनी, सिमरन ने कहा कि कॉलोनी की सड़कों पर हमेशा सीवर और बरसात का पानी जमा रहता है। यह जलजमाव मच्छरों का प्रजनन स्थल बन चुका है। इसके कारण डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। समरीन, नाजनीन कुरैशी ने कहा कि हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमारियों से पीड़ित है। इलाज खर्च से चिंता बढ़ गई है। बताया कि साल में केवल कुछ महीनों की फॉगिंग का असर नहीं होता। पेयजल के लिए दूसरों पर निर्भर सारा अली के मुताबिक कॉलोनी में पानी की लाइन नहीं है। पेयजल के लिए निजी बोरवेल पर निर्भर हैं। सीवर लाइन की बदहाली और जलजमाव के चलते दूषित पानी रिसकर भूमिगत जलस्रोतों में मिल रहा है। बताया कि उन्हें अक्सर दूषित पानी पीना पड़ता है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा रहता है। बार-बार अधिकारियों से अनुरोध किया गया कि कॉलोनी में जलापूर्ति लाइन बिछाई जाए, लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हुई। हमारी व्यथा सुनें 1. लोहता मुख्य सड़क की ऊंचाई के कारण जलनिकासी अवरुद्ध हो गई है। बरसात में हालात बिगड़ जाते हैं। - उषाराज मौर्या 2. जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई होती है। घरों से निकलना मुश्किल है। - रेखा देवी 3. समुचित विकास तभी माना जाएगा जब कॉलोनी में भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। नगर निगम ध्यान दे। - याद अली 4. मुख्य सड़क तो बन गई लेकिन इससे जुड़े कुशवाहा नगर की सड़कों ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। - जय राम मौर्या 5. कचरे से उठने वाली दुर्गंध ने माहौल को प्रदूषित कर दिया है। आस-पास रहना मुश्किल है। - माता प्रसाद मौर्या 6. कॉलोनी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। अपर्याप्त व्यवस्था से निवासी परेशान हैं। -जितेंद्र पटेल 7. बरसात में घरों में पानी भर जाता है। मच्छरों का प्रकोप बारहमासी हो गया है। जलनिकासी नहीं होती। - बनवारी लाल 8. रात में कॉलोनी अंधेरे में डूब जाती है। कुछ लाइटें थीं, वे भी खराब हैं। असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। - विमला देवी 9. कॉलोनी में अभी पानी की पाइपलाइन नहीं बिछी है। लोग साफ पानी की सुविधा से वंचित हैं। - राधा जायसवाल 10. खराब सड़कों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के गिरने की घटनाएं आम हैं। मरम्मत नहीं हो रही है। - रुपमनी देवी 11. बूचड़खाने के अपशिष्ट पैदल चलने वालों के लिए असहनीय हैं। लोग नाक बंद करके निकलने पर मजबूर हैं। - विक्की केसरी 12. कचरे के कारण मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है। बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। - आजाद अहमद सुझाव और शिकायतें सुझाव 1. लोहता मुख्य सड़क की ऊंचाई के अनुसार नई सीवर लाइन का कॉलोनी में शीघ्र निर्माण कराया जाए। 2. ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति की लाइन बिछाई जाए। 3. कॉलोनी की कच्ची सड़कों पर इंटरलॉकिंग कराई जाए। कॉलोनी में स्ट्रीट लाइटें लगे और खराब लाइट को बदला जाए। 4. कूड़ा गाड़ी कॉलोनी में नियमित आए और जमा कचरे की शीघ्र सफाई कराई जाए। 5. बूचड़खानों के अपशिष्ट निस्तारण के लिए दूर स्थान तय किया जाए। जलजनित रोगों का खतरा देखते हुए नियमित रूप से फॉगिंग हो। शिकायतें 1. मुख्य सड़क की ऊंचाई 7-8 फीट बढ़ने से कॉलोनियां नीचे हो गई हैं। इसके चलते कॉलोनी की सीवर लाइन भी बेकार हो गई है। 2. कॉलोनी में अभी तक पानी की लाइन नहीं बिछाई गई है। निवासियों को निजी संसाधनों या हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। 3. कॉलोनी की सड़कें कच्ची और जर्जर हैं। इंटरलॉकिंग नहीं हुई है। कहीं-कहीं लगीं स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। ज्यादातर गलियों में लाइट नहीं है। 4. यहां डोर-टू-डोर कूड़ा उठान सुविधा नदारद है। कूड़ा गाड़ी रोज नहीं आती। लोग खाली प्लॉटों और खुले स्थानों पर कूड़ा फेंकते हैं। 5. लोहता बाजार में संचालित 10-12 बूचड़खानों का अपशिष्ट कॉलोनी की सड़कों और आसपास के खाली स्थानों पर फेंका जाता है। इससे परेशानी होती है। एक नजर में -01 हजार मकान हैं कुशवाहा नगर में -25 हजार के आसपास आबादी है कॉलोनी में ----------- बोले जिम्मेदार न्याय के लिए दायर की है पीआईएल फोरलेन सड़क बनाने के दौरान कुशवाहा नगर की जल निकासी की पाइप को कार्यदाई संस्था ने ध्वस्त कर दिया। लिंक मार्गों से लगभग 6 फीट ऊंची फोरलेन सड़क बना दी गई। जिम्मेदार विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है ताकि जनता को न्याय मिल सके। -शाहिना फिरदौस नोमानी, पार्षद, लोहता वार्ड (फोटो) मानक के अनुसार बनी है फोरलेन वाराणसी-भदोही फोरलेन का निर्माण मानक के हिसाब से हुआ है। इसके आसपास की कालोनियों में सीवर के चैंबर खुलवा दिए गए हैं। इन इलाकों में समुचित जलनिकासी के लिए अमृत-02 योजना के तहत जलनिगम की ओर से नई सीवर लाइन प्रस्तावित है। -आशुतोष कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी (निर्माण खंड-एक)