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वाराणसीबंदी की कगार पर पहुंचीं पैकेजिंग उद्योग की इकाइयां

हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:20 AM
बंदी की कगार पर पहुंचीं पैकेजिंग उद्योग की इकाइयां

वाराणसी। कार्यालय संवाददाता

गत्ते से बने छोटे बड़े उद्योगों पर कोरोना की जबरदस्त मार पड़ी है। 50 से ज्यादा इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। बाजार में मांग नहीं है लेकिन कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से दोहरे संकट से उद्यमियों को जूझना पड़ रहा है।

पैकेजिंग का सालाना कारोबार 100 करोड़ रुपये के आसपास है। इस समय फैक्ट्रियों में 20-25 प्रतिशत उत्पादन रह गया है। दवा, फूड प्रोसेसिंग, राशन, किराना छोड़कर अन्य कारोबार में मांग न के बराबर है। क्राफ्ट पेपर मुख्य कच्चा माल है जिसकी छह महीने में कीमत दोगुनी हो गई है। साल 2020 के अंत में जो क्राफ्ट पेपर 22-25 रुपये किलो था अब 45-50 रुपये में है। लागत बढ़ने से पैकेजिंग उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं जिससे उद्यमियों को ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं।

महेशपुर, चांदपुर, करखियांव, रामनगर औद्योगिक क्षेत्र, राजातालाब, रोहनिया, लहरतारा, सुसुवाही, कर्णघंटा, नीचीबाग, बड़ी बाजार, कमलगढ़हा, जैतपुरा, आदमपुर, पीलीकोठी, सरैया में छोटी-छोटी पैकेजिंग इकाइयां हैं। जिनसे 20 हजार से ज्यादा परिवार जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश कारूगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण की मांग की है।

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