बाराबंकी हादसा- कैसे सहें पत्नी और मासूम बच्चों के जनाजे का भार

बाराबंकी हादसा- कैसे सहें पत्नी और मासूम बच्चों के जनाजे का भार

संक्षेप:

Varanasi News - बाराबंकी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक कार में आग लगने से जावेद अशरफ की पत्नी गुलिस्ता और उनके चार बच्चों की मौत हो गई। हादसे के समय जावेद ड्यूटी पर थे। उनके परिवार के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। जावेद के दोस्त भी इस सदमे में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गए।

Dec 12, 2025 01:38 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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लोहता, संवाद। बाराबंकी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बुधवार को हादसे में कार में आग लगने से लोहता थाना क्षेत्र के रहीमपुर की पठानी बस्ती निवासी आजमगढ़ के अतरौला थाने के दीवान (हेड कांस्टेबल) जावेद अशरफ की पत्नी और चार बच्चों ने जान गंवाई थी। गुरुवार सुबह छह बजे पत्नी गुलिस्ता (49), बेटी समरीन (29), इलमा (12), इसमा (6) और बेटे जीयान (10) का शव रहीमपुर लाया गया तो परिजन चित्कार उठे। जावेद अशरफ की आंखों से आंसुओं की धार बह रही थी। रुधे गले से कहा पत्नी और मासूम बच्चों के जनाजे का भार बहुत भारी है। इसे कैसे उठाएं? रहीमपुर कस्बे में रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।

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मां और चार बच्चों के शव देखकर हर कोई गमजदा था। जावेद अशरफ को रिश्तेदार और परिजन समझा रहे थे लेकिन वह लगातार रोए जा रहे थे। कह रहे थे कि जीवन भी इस परिवार के लिए कमाया, अब सब चले गए। अब किसके लिए कमाऊं, किसके लिए जीवित रहूं। बोल रहे थे कि काश उस दिन वह ड्यूटी के बजाय खुद भी कार में होते। कम से कम ये दिन नहीं देखना होता। जावेद अशरफ को रोता देख सबकी आंखें नम हो गईं। असरफ जावेद ने बताया कि जिस समय हादसा हुआ तो वह ड्यूटी पर थे। अधिकारियों ने बस इतना कहा कि बाराबंकी जल्द चले जाओ। वहां पहुंचने पर पता चला कि पूरा परिवार खत्म हो चुका है। धन्नीपुर कब्रिस्तान में शव सुपुर्द ए खाक, उमड़े हजारों लोग लोहता। गुलिस्ता चांदनी, पुत्री इसमा, समरीन, इलमा, एवं पुत्र बालक जियान मृत का शव गुरुवार को दोपहर धन्नीपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। पांचों शव को मिट्टी देने के लिए रिश्तेदारों एवं मोहल्ले के हजारों लोग जुटे थे। दोपहर में जैसे ही जनाजा निकला, हजारों कदम धन्नीपुर के कब्रिस्तान की ओर बढ़े। जनाजे की नमाज के बाद पांचों शवों को सुपुर्द -ए-खाक किया गया। नहीं जले घरों में चुल्हे बच्चा हो जवान हो अथवा बढ़ा, सभी लोग कह रहे थे कि परवर दिगार ने एक साथ पूरे परिवार को उजाड़ दिया। सुबह से दोपहर तक हजारों लोगों ने पठानी बस्ती में इस दुख की घड़ी में अशरफ को ढांढ़स बंधाने पहुंचे थे। जब जनाजा निकल रहा था, रास्ते में घरों की महिलाएं रो रही थीं। किसी के घर में चूल्हा नहीं जला। लोहता की खबर के साथ... जनाजे में आए दिवान के दोस्त की सदमे से मौत - लोहता के रहीमपुर में दोस्त की पत्नी और बच्चों के जनाजे में शामिल होने आया था - आजमगढ़ के फूलपुर निवासी के मकान में कुछ दिन किरायेदार थे दीवान अशरफ लोहता। रहीमपुर कस्बे के निवासी जावेद अशरफ की पत्नी और बच्चों के जनाजे में शामिल होने आजमगढ़ के फूलपुर निवासी उनके मित्र 57 वर्षीय महबूब भी आए थे। कब्रिस्तान में ही उनके सीने में तेज दर्द उठा और गिर पड़े। निजी अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। आजमगढ़ के फूलपुर के निवासी महबूब हेड कांस्टेबल अशरफ जावेद के अजीज मित्र थे। जब जावेद फूलपुर थाने पर तैनात थे, तब वह महबूब के मकान में कुछ महीने किरायेदार थे। उसी समय से दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। जावेद के परिवार के हादसे में मारे जाने की खबर सुनकर महबूब जनाजे में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। कब्रिस्तान में अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और गिर पड़े। आशंका है कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई।