
संगमम्: नृत्यों में दक्षिण की समृद्ध लोक संस्कृति के दर्शन
Varanasi News - वाराणसी में दक्षिण भारतीय कलाकारों ने करगम और कावड़ी नृत्य का प्रदर्शन किया। नृत्य में देवी मरियम्मन और गंगई अम्मन को समर्पित करगम, साथ ही भगवान मुरुगन के प्रति भक्ति दिखाई गई। कार्यक्रम में आग लगने की घटना भी हुई, जिसे दर्शकों ने पानी से बुझाया।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। वर्षा की देवी मरियम्मन और नदी देवी गंगई अम्मन को समर्पित करगम और भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित कवड़ी नृत्य में दक्षिण भारतीय समृद्ध लोक संस्कृति के दर्शन काशी में हुए। नमो घाट पर बुधवार को दक्षिण भारतीय कलाकारों ने इन नृत्यों से स्वप्रांतीय अतिथियों सहित स्थानीय नागरिकों और देसी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया। करगम का अर्थ घड़ा होता है। नृत्य के दौरान नृत्यांगनाओं ने दो प्रकार के करगम प्रयोग में लाए। पहले उन्होंने विभिन्न रंगों से अलंकृत घड़े जिन्हें आटा करगम कहते हैं, के साथ नृत्य किया। इसके बाद शक्ति करगम के साथ कौशल दिखाया। शक्ति करगम नृत्य के दौरान अग्नि प्रज्जवलित रही।

उसे सिर पर रख कर संतुलन बनाते हुए महिलाओं ने नृत्य और भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया। वहीं कावड़ी नृत्य में कलाकारों ने कंधे पर सवावटी बोझ उठा कर अपने आराध्य भगवान मुरुगन को प्रसन्न करने के लिए नृत्य किया। कावड़ी में इस्तेमाल प्रॉप लगभग वैसे ही थे जैसे सावन में शिवभक्तों के कंधे पर कांवर होते हैं। आर.मुथुपाडी एवं दल के कलाकारों ने दूसरे चरण में तमिल लोकनृत्य कालीअट्टम एवं शिव-शक्ति अट्टम की प्रस्तुति दी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृकतिक केंद्र तंजावूर की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत डॉ.मन्ना लाल यादव के बिरहा गायन से हुई। उन्होंने ‘भारत देशवा मोर सबसे महान...’,‘काशी महिमा...’ तथा अंत में निर्गुण की प्रस्तुति दी। इसके बाद सुचरिता गुप्ता ने उपशास्त्रीय गायन किया। उन्होंने ठुमरी ‘डगर बीच कैसे चलूं मग रोके कन्हैया बेपीर...’ के बाद राग मिश्र कलावती में ‘श्याम मोरी बिंदिया उलझ गई रे...’ बंदिश सुनाई। अंत में राग माझ खमाज में ठुमरी ‘जमुना किनारे मोरा गांव...’ से विराम दिया। वृष्टि चक्रवर्ती एवं दल ने लोकनृत्य का प्रदर्शन किया। अन्य कलाकारों में सृष्टि यादव, परी यादव, इप्शिता मुखर्जी, सिमरन सिंह, सुनैना रॉव, पायल सिंह, अहाना दास गुप्ता शामिल रहीं। यूपी की जनता ने बनाया पारिवारिक आयोजन : के.अन्नामलाई सांस्कृतिक सत्र के मुख्य अतिथि तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के.अन्नामलाई रहे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने मात्र चार वर्षों में ही संगमम् को एक पारिवारिक आयोजन बना दिया है। मैं तमिलनाडु की जनता की ओर से उत्तर प्रदेश की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। संगमम् की थीम ‘तमिल करकलाम’ को काशी ने हृदय से अपना लिया है। इसका प्रमाण यह कि इन दिनों काशी के 150 से अधिक विद्यालयों के बच्चे तमिल भाषा सीख रहे हैं। आईआईटी मद्रास, एनबीटी, बीएचयू सहित उन सभी संस्थाओं को विशेष रूप से बधाई देता हूं जो पूरी तरह समन्वय बनाकर संगमम् को सुचारु रूप से संपादित करने में योगदान दे रही हैं। नृत्य के दौरान भड़की आग, बोतल के पानी से बुझाई तमिलनाडु के कलाकारों का दल करगम नृत्य की प्रस्तुत कर रहा था। उस दौरान नृत्य करती महिलाओं के सिर पर रखे घड़े में जल रही आग ज्यादा भड़क गई। लपट से सिर पर घड़ा रखने के लिए रखी गई बेड़ी तक पहुंच गई। ऐसा दो घड़ों में एक साथ हुआ। तपिश अधिक बढ़ने पर नृत्य कर रही महिलाओं ने मंच पर ही झटपट घड़ा सिर से गिरा दिया। वालेंटियरों ने पहले पैर से जलते घड़े को मंच से नीचे किया। फिर दीर्घा में आगे बैठे अतिथियों के सामने लगी टेबल पर रखी छोटी-छोटी बोतलों के पानी से आग बुझाई। मौके पर अग्निशमन की कोई व्यवस्था नहीं होने की चर्चा दर्शक दीर्घा में देर तक होती रही।

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