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काम पर विजय की लीला है रास : श्रीरामभद्राचार्य

हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीNewswrap
Sat, 04 Dec 2021 03:20 AM
काम पर विजय की लीला है रास : श्रीरामभद्राचार्य

वाराणसी। प्रमुख संवाददाता

रासलीला काम लीला नहीं है। यह काम पर विजय की लीला है। रसों के समूहों का नाम रास है। ये बातें पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शुक्रवार को बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित विशिष्ट व्याख्यान एवं सम्मान समारोह में बतौर मुख्य वक्ता कहीं।

‘रासपंचाध्यायी में आत्मविज्ञान विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि जीवात्मा रूपी गोपियों से रमण करने वाले परमात्मा की लीला का विषय रास पंचाध्यायी है। मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के महामना सभागार में हुए आयोजन में सारस्वत अतिथि प्रो. कौशलेन्द्र पाण्डेय ने भी विचार रखे। विशिष्ट अतिथि प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि हमारे वेदों में अथाह ज्ञान है। आरंभ में वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने रामानन्दाचार्य महाराज की चरणपादुका का पूजन किया। अध्यक्षता संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. कमलेश झा तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुमन जैन ने किया। संचालन डॉ. ब्रजभूषण ओझा ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. सरोजù चूड़ामणि, प्रो. चन्द्रमा पाण्डेय, प्रो. विजय शंकर शुक्ल, प्रो. उमाशंकर शुक्ल, प्रो. मधुमिता भट्टाचार्या, डॉ. पुण्डरी शास्त्री, प्रो. भगवत्शरण शुक्ल, प्रो. श्रीप्रकाश पाण्डेय, प्रो. उदय प्रताप शाही, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री, डॉ. दयाशंकर त्रिपाठी, डॉ. वाचस्पति त्रिपाठी, डॉ. उदय प्रताप भारती आदि उपस्थित थे।

इनसेट

धूमकेतुओं के कारण सनातन धर्म का नुकसान

वाराणसी। बीएचयू के वैदिक विज्ञान केन्द्र में श्रीरामभद्राचार्य महाराज ने बिना नाम लिए कथा वाचक मोरारी बापू को भी आड़े हाथों लिया। पिछले दिनों अपने कथा सत्र में मोरारी बापू ने कहा था कि बलरामजी शराब पीते थे। रामभद्राचार्य महराज ने कहा कि ऐसे धूमकेतुओं के कारण सनातन धर्म का बहुत नुकसान हो रहा है। शास्त्रों का मर्म और संस्कृत न जानने वाले लोग शास्त्रों की मनमानी व्याख्या करके समाज को भ्रमित एवं दूषित कर रहे हैं। ऐसे लोगों से समाज व सनातन धर्म को बचाना होगा। अपने एक घंटे के व्याख्यान में उन्होंने तीन बार धूमकेतु शब्द का प्रयोग किया।

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