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बीएचयू बवाल : फिर फेल हुआ बीएचयू का खुफिया तंत्र

सुरक्षा के नाम पर सालाना करोड़ो खर्च, दर्जनों कैमरे हैं खराब

बीएचयू का खुफिया तंत्र एक बार फिर फेल हुआ। हर बार की तरह बुधवार को भी उसे छात्रों के आक्रोश और बवाल की गंध भी नहीं मिल पाई। वहीं, बवाल के एक घंटे बाद तक उसके नियंत्रण का कोई उपाय न होने से विश्वविद्यालय के सुरक्षा तंत्र पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब परिसर की सुरक्षा इंतजाम के नाम पर हर वर्ष लगभग नौ करोड़ रुपए खर्च होते हैं। 

पिछले साल सितम्बर में छेड़खानी के बाद हुआ बवाल हो या दिसम्बर में कुछ छात्रों की गिरफ्तारी के बाद पूरे परिसर हुई तोड़फोड़, हर बार बीएचयू का खुफिया तंत्र फेल रहा है। यह तंत्र हंगामा होने से पहले की सूचना देने के बजाय हंगामा होने के बाद की सूचना जुटाने तक  सीमित रह गया है। कैम्पस की सुरक्षा में सात सौ सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। मगर ये सुरक्षाकर्मी किसी हंगामे पर तात्कालिक रूप से रोक नहीं लगा पाते। हर बार पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। बल्कि हर बार हंगामा होने के बाद सुरक्षाकर्मी गायब हो जाते हैं। 

घंटे भर बाद पहुंचा प्रॉक्टोरियल बोर्ड
अय्यर छात्रावास के छात्रों का कहना था कि हंगामा होते ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सूचना दी गई लेकिन घंटेभर बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य पहुंचे। तब तक उपद्रवियों ने दो दर्जन से ज्यादा बाइक, साइकिल, कूलर समेत कई सामान नष्ट कर दिए थे। 

कैम्पस में लगे कई कैमरे खराब
पिछले वर्ष सितम्बर में हुए बवाल के बाद बीएचयू प्रशासन ने सुरक्षा के लिए डेढ़ करोड़ से सैकड़ों सीसीटीवी कैमरा लगवाया।  बुधवार को जब अय्यर में बवाल के बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच होने लगी तो कई कैमरे खराब मिले। बीएचयू सूत्रों और लंका पुलिस ने बताया कि सिंह द्वार, सीर गेट, छित्तूपुर गेट, बिरला के आसपास और हैदराबाद गेट के पास लगे कैमरे खराब हैं। इस बारे में बीएचयू प्रशासन का कहना है कि अराजकतत्वों द्वारा कैमरे का केबल तोड़ दिया जाता है या कैमरे ही तोड़ दिया है। 

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  • Web Title:Then failed BHU intelligence system