The carnival of Kashi historic Chetganj will come out know the tradition and what is special this time - काशी की ऐतिहासिक चेतगंज की नक्कटैया 17 को निकलेगी, जानिये परंपरा और क्या है इस बार खास DA Image
17 नबम्बर, 2019|6:51|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

काशी की ऐतिहासिक चेतगंज की नक्कटैया 17 को निकलेगी, जानिये परंपरा और क्या है इस बार खास  

चेतगंज की विश्व प्रसिद्ध नक्कटैया की लीला परसो यानी 17 अक्तूबर की रात होगी। इसके बाद हर साल की तरह धूमधाम से लाग विमान निकलेंगे। जो पूरी रात मलदहिया से लेकर चेतगंज के बीच भ्रमण करते रहेंगे। लाग विमानों को प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार भी दिए जाते हैं।

इस बार प्लास्टिक से आजादी का नक्कटैया में गूंजेगा। इसमें प्लास्टिक के विकल्प के साथ उससे होने वाले नुकसान को भी दर्शाया जाएगा। कश्मीर विधानसभा भवन पर तिरंगा फहराया दिखाई देगा। जो बताएगा कि अब वहां से धारा 370 हटा दिया गया है। एयरफोर्स में हाल में गठित महिला फाइटर विंग की झांकी नारी सशक्तिकरण की बानगी पेश करेगी। प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, ज्ञानपुर, आजमगढ़, फूलपुर, प्रतापगढ़ आदि स्थानों के सौ से अधिक लाग विमान इस वर्ष शामिल नक्कटैया में शामिल होंगे। 

ऐसे हुई थी शुरुआत
बनारस के पारंपरिक लक्खा मेलों में शुमार चेतगंज की नक्कटैया को भव्य रूप देने की शुरुआत अंग्रेजों की मुखालफत से हुई। बाबा फतेह राम अंग्रेजों के दमन पर आधारित लाग विमान इस नक्कटैया में शामिल करते थे और तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर से ही नक्कटैया के जुलूस का उद्घाटन कराते थे। उसी क्रम में अब भी कलेक्टर से ही जुलूस का उद्घाटन मध्यरात्रि 12 बजे कराया जाता है। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने भी नक्कैटया मेले को क्रांतिकारियों के वार्षिक सम्मेलन की जगह बना ली थी। चंद्रशेखर आजाद और उनके सभी क्रांतिकारी साथी मेलार्थी बनकर नक्कटैया में शामिल होते। चेतगंज क्षेत्र स्थित सरस्वती वाचनालय उनके मिलने की जगह हुआ करता था।
 
लीला पर गहराया आर्थिक संकट, मंत्री से लगाई है गुहार
काशी के चार पारंपरिक लक्खा मेलों में शुमार चेतगंज की नक्कटैया आर्थिक संकट से भी गुजर रही है। कभी जन सहयोग से होने वाली लीला का मुख्य खर्च अब चेतगंज रामलीला समिति के 50 सदस्यों पर आ गया है। समिति के 50 सदस्य तीन-तीन हजार रुपए अपनी ओर से देते हैं। शेष खर्च आसपास के लोगों के वार्षिक चंदे से किसी प्रकार पूरा किया जाता है। समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ‘बच्चू’ ने बताया कि विगत दो दशकों से अधिक समय से समिति के सदस्य रामलीला का खर्च उठा रहे हैं। इसकी शुरुआत पांच सौ रुपए से हुई थी जो अब बढ़ते-बढ़ते तीन हजार रुपए तक पहुंच गई। पिछले साल 28 स्थानों पर होने वाली दैनिक लीला का खर्च एक लाख चालीस हजार के आसपास था जबकि सिर्फ नक्कटैया के जुलूस का खर्च दो लाख 80 हजार आया था। इस वर्ष नक्कटैया के जुलूस का खर्च 35 से 40 फीसदी अधिक होने की संभावना है। 

अब से करीब पांच दशक पहले तक समिति के पास अपनी इतनी संपत्ति थी कि उसी से लीला का खर्च निकल जाता था। कालांतर में धीरे-धीरे लीला समिति की संपत्तियों पर कब्जा होता चला गया। बागबरियार सिंह इलाके में करीब 32 बिस्वा जमीन रामलीला समिति की थी जिसमें से करीब 25 बिस्वा जमीन पर कब्जा करके भवन बना दिए गए हैं। अब भी मौके पर सात बिस्वा जमीन बची है जो अतिक्रमण का शिकार है। इस भूखंड के लिए भी चार दशक से अधिक समय तक मुकदमा लड़ा गया। आठ साल पहले कोर्ट ने लीला समिति के पक्ष में फैसला भी दे दिया मगर जिला प्रशासन उस भूखंड को अतिक्रमण मुक्त नहीं करा सका है।

चेतगंज रामलीला समिति ने 1888 से चली आ रही परंपरा के संरक्षण के लिए शासन से भी गुहार लगाई है। समिति के प्रतिनिधिमंडल ने गत दिनों प्रदेश के धर्मार्थ कार्य मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी को चेतगंज की रामलीला के संरक्षण का प्रस्ताव सौंपा है। नक्कटैया के जुलूस के लिए शासन से आर्थिक सहयोग का भी अनुरोध किया गया है।
 
बदहाल सड़कों से लाग-विमान ले जाना चुनौती
चेतगंज रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण चेतगंज की नक्कैटया में सकुशल जुलूस निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। मलदहिया-लहुराबीर सड़क पर दोनों ओर खोदाई शुरू होने से समस्या बढ़ गई है। समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने रविवार को परेड कोठी स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस मार्ग पर खोदाई अब से भी रोक दी जाए तो 17 अक्तूबर को लाग विमान उधर से निकाले जा सकते हैं। 

जुलूस के गुजरने वाले मलदहिया, पिशाचमोचन, चेतगंज, बागबरियार सिंह, बड़ी पियरी, पितरकुंडा इलाकों की सड़कों पर भी बड़े-बड़े गड्ढे हैं। उन्होंने कहा कि परंपरा के निर्वाह के लिए हम लोग बड़ी मुश्किल से धन की व्यवस्था कर पा रहे हैं। इस संबंध में धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी से गत शनिवार को अनुरोध किया गया कि देव दीपावली की तरह चेतगंज की नक्कटैया को भी शासन से आर्थिक सहयोग मिले। अजय गुप्ता ने बताया कि हाईकोर्ट का फैसला पक्ष में होने के 15 साल बाद भी प्रशासन लीला समिति को 32 बीघा जमीन पर कब्जा नहीं दिला सका है। समिति की जमीन अब भी अतिक्रमण का शिकार है। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:The carnival of Kashi historic Chetganj will come out know the tradition and what is special this time