
संगमम्: बाबा दर्शन से दृष्टि, प्रसादम् से आत्मा हुई तृप्त
Varanasi News - तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि काशी विश्वनाथ के दर्शन कर अभिभूत हो गए। सभी ने इसे जीवन की बड़ी उपलब्धि माना। मंदिर में अद्वितीय आतिथ्य का अनुभव हुआ, जिससे उनकी यात्रा यादगार बन गई। इसके बाद प्रतिनिधियों को धाम का भ्रमण कराया गया और अन्नक्षेत्र में भोजन की व्यवस्था की गई।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। तमिलनाडु से आए दूसरे दल के प्रतिनिधि काशी विश्वनाथ के दर्शन कर अभिभूत हो गए। गुरुवार की दोपहर विश्वनाथ धाम पहुंचे प्रतिनिधियों के चेहरे उनके कृतज्ञ भाव को सहज ही अभिव्यक्त कर रहे थे। ऐसा लगा मानो बाब विश्वनाथ के दर्शन कर दृष्टि तृप्त हो रही थी तो बाबा का प्रसादम् पाकर तृप्ति का यह भाव उनकी आत्मा को भी अपने आवरण में ले रहा था। एलएम.मुत्तुस्वमी, गीत एस. तो महज उदाहरण हैं। इस दल का हर सदस्य बाबा का दर्शन और प्रसादम् पाने को अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि के रूप में महसूस कर रहा था। बाबा धाम में अद्वितीय आतिथ्य की अनुभूति ने काशी तमिल संगमम 4.0 के तहत उनकी यात्रा को यादगार बना दिया।

मंदिर प्रशासन द्वारा पुष्प वर्षा और डमरू वादन के बीच समूह ने मंदिर में प्रवेश किया। दर्शन के बाद प्रतिनिधियों को मंदिर प्रशासन ने धाम का भ्रमण भी कराया। भ्रमण के दौरान सभी ने धाम के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य कला, नवनिर्मित सुविधाओं और निरंतर बढ़ती श्रद्धा-धारा के बारे में जानकारी ली। भ्रमण पूर्ण होने पर सभी अतिथियों के लिए मंदिर की ओर से संचालित अन्नक्षेत्र में दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई। अन्नक्षेत्र में परोसे गए प्रसाद ने सभी को काशी की सेवा-परंपरा और अतिथि-भावना का गहरा अनुभव कराया। लौहपुरुष का संघर्ष दिखाया कठपुतली शो में नेशनल बुक ट्रस्ट ने बच्चों के लिए ज्ञान, रचनात्मकता और मनोरंजन से परिपूर्ण विशेष गतिविधियों का आयोजन नमो घाट पर किया। वाराणसी के विभिन्न स्कूलों के 600 से अधिक विद्यार्थियों ने इसमें सहभागिता की। मुख्य आकर्षण सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी पर आधारित प्रेरक कठपुतली शो रहा। नगर के क्रिएटिव पपेट थिएटर ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत इस शो का नेतृत्व मणि भूषण ने किया। बाल विद्यालय के 143 छात्र, देहरादून स्कूल वाराणसी के 46 छात्र तथा त्रिदंडी देव वेद पाठशाला के 30 छात्र सहित अनेक स्कूलों के बच्चों ने प्रस्तुति के माध्यम से लौहपुरुष के संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान को समझा। परिचित हुए काशी की धरोहरों से ‘वाराणसी-एक विरासत नगरी’ विषयक प्रश्नोत्तरी के मध्यम से बच्चों को शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने उत्सुकता के साथ विभिन्न चक्र में हिस्सा लिया। इसके अलावा, ‘रीडिंग ऐंड पब्लिशिंग’ पर ओरिएंटेशन सत्र भी हुआ। छात्रों को पठन संस्कृति, पुस्तकों की दुनिया और प्रकाशन की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।

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