बारिश-आंधी की मार से बच गया सुपर सीडर से बोया गेहूं
Varanasi News - वाराणसी में हाल की बारिश और आंधी ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन सुपर सीडर से बोई गई गेहूं की फसल सुरक्षित रही। कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. नवीन कुमार सिंह के अनुसार, इस विधि से गेहूं की पैदावार 15 प्रतिशत बढ़ी है और लागत में भी 15-20 प्रतिशत की कमी आई है।

वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। पिछले दिनों बारिश और आंधी से फसलें बर्बाद हो गईं लेकिन सुपर सीडर से सीधी बोई गई गेहूं की फसल मौसम की मार से बच गई। कल्लीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के क्षेत्र में बोई गई गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग में यह नतीजा सामने आया। यही नहीं, गेहूं की पैदावार भी लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गई। इसके अलावा जिले में अन्य जगहों पर इस विधि से बोये गए गेहूं भी सुरक्षित रहे। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह के मुताबिक लाइन से सीधी बोआई होने से गेहूं के पौधों के बीच से तेज हवा क्रॉस कर जाती है।
साथ ही इसकी जड़ें गहरी होने से डंठल मजबूत होते हैं। इससे बारिश से पौधा गिरता भी नहीं है। पौधों में धूप और हवा का संचार लगातार होता रहता है। इसपर हीट स्ट्रोक (तेज गर्मी) का भी असर नहीं होता है।उन्होंने बताया कि छिटकवा (परम्परागत) विधि से बोयी गई फसलों पर मौसम का असर ज्यादा होता है। जबकि सुपर सीडर से बोया गया गेहूं मौसम की मार से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। इस बार जनपद में 4000 से 5000 हेक्टेयर में सुपर सीडर से गेहूं बोया गया था। जबकि पिछले वर्ष 1500 हेक्टेयर में ही खेती हुई थी। मौसम से सुरक्षा और ज्यादा पैदावार को देखते हुए इस बार खेती का रकबा करीब तीन गुना बढ़ा दिया गया।इनसेट15 से 20 फीसदी लागत कमसुपर सीडर मशीन से हरियाणा, पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों में गेहूं बोया जाता है। इसमें लाइन से बीज की सीधी बोआई की जाती है। सुपर सीडर से गेहूं की बोआई करने पर लागत भी 15 से 20 फीसदी कम आती है। सिंचाई में पानी कम लगता है। यह पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ खेती है। इस खेती को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी), वर्ल्ड बैंक, यूपी डॉस्क और कृषि विभाग साथ मिलकर काम कर रहे हैं।इनसेटप्रकाशित हो चुका है शोधलाइन से बोआई विधि में सुपर सीडर मशीन खेत में चीरा लगाती जाती है। इसमें लगे दो पाइपों में नीचे खाद और ऊपर बीज भरा रहता है। इस खेती पर शोध चल रहे हैं। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह का शोध नेशनल अकादमी ऑफ साइंस (नासरेटिंग) के जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है।
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