संस्कृति की रक्षा और संरक्षण प्रासंगिक : प्रो. चतुर्वेदी
वाराणसी में बीएचयू महिला महाविद्यालय में ‘भारतीय अभिव्यक्ति की खोज’ विषय पर शक्ति संवाद-2026 का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्कृति की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और कुलपति ने तकनीक के प्रभाव से पहचान खोने के खतरे पर चर्चा की।
वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू स्थित महिला महाविद्यालय में ‘भारतीय अभिव्यक्ति की खोज’ विषय पर आधारित शक्ति संवाद-2026 का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इस दौरान कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि हमें हर दिशा से चीजें ग्रहण करनी चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति की रक्षा और संरक्षण भी करना होगा। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी की। संवाद के दौरान कुलपति ने कहा कि अतीत में आक्रमण और विनाश हुए, लेकिन आज यदि हम प्रयास नहीं करेंगे तो हमारी संस्कृति अपने आप जीवित नहीं रह पाएगी। उन्होंने छात्राओं से यह भी सवाल किया कि हमें अपने पुरखों से जो मिला क्या उसे हम आगे बढ़ा पा रहे हैं।
जब हम तकनीक से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि अपनी पहचान, अस्मिता, संस्कृति, भाषा, पूजा पद्धति, संस्कार, परिवार और देशबंधुओं को भूलने लगते हैं, तब खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईमेल, वेबसाइट, सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम जैसी चीज़ें आवश्यक हैं और इनसे बड़े आर्थिक लाभ भी हुए हैं, लेकिन आज खतरा बाहर से होने वाले सांस्कृतिक आक्रमणों से नहीं है।
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