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सनातन धर्म की श्रेष्ठताओं को शंकराचार्य ने विश्व के समक्ष रखा

सांसद मनोज तिवारी और पूर्व सांसद डा. राजेश मिश्र ने किया पुनर्विचार का अनुरोध

1 / 2सांसद मनोज तिवारी और पूर्व सांसद डा. राजेश मिश्र ने किया पुनर्विचार का अनुरोध

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आज संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की विजय पताका लहरा रही है तो इसका पूरा पूरा श्रेय इस राष्ट्र की महान संपदा आचार्यवर आदिशंकराचार्य को जाता है। उन्होंने सनातन धर्म की श्रेष्ठाताओं को विश्व मानव के समक्ष तार्किक ढंग से रखने का अतुलनीय कार्य किया है। वर्तमान समय में धर्मक्षेत्र की मर्यादा कायम है तो यह उन्हीं की असीम कृपा का परिणाम है। यह बातें भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने आदि शंकराचार्य महाराज के प्राकट्योत्सव में कहीं।

शुक्रवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल के सभागार में आयोजित समारोह में उन्होंने भूमा पीठाधीश्वर का पद त्याग करने की घोषणा करके सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शंकराचार्य के पद को निरंतन अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है उससे मैं बहुत ही व्यथित हूं। सनातन समाज की चुप्पी ने मुझे और भी दुखी किया है। उनकी इस घोषणा से सभास्थल पर हलचल मच गई। समारोह की अध्यक्षता कर रहे भाजपा की दिल्ली प्रदेश इकाई के अध्यक्ष, सांसद एवं भोजपुरी गायक मनोज तिवारी और पूर्व सांसद डा. राजेश मिश्र ने उनसे अपने निर्णय पर पुन: विचार करने का अनुरोध किया। अध्यक्षता करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करके ही भारत पुन: विश्वगुरु बन सकता है। डा. राजेश मिश्र ने कहा कि आदिशंकराचार्य ने अपने छोटे से जीवनकाल में बहुत बड़े-बड़े कार्य किए जिनकी प्रासंगिता सदैव बनी रहेगी।

किया गया सम्मानित
आदि शंकराचार्य प्राकट्योत्सव आयोजन समिति के संयोजक डा. सतीश चंद्र मिश्र के अनुसार सभा के दौरान डा.  नागेंद्र  द्विवेदी,  शीतला  प्रसाद  पांडेय,  डा.  बीपी  मिश्र,  एलएन  झा, महंत  चल्लासुब्बा  राव  शास्त्री, पं. मणिशंकर  पांडेय ,डा.  अशोक  सिंह,  अनिल  कुमार  पांडेय,  निपेंद्र  सिंह,  डा. सुधीर  मिश्र,  पूर्व  डीआईजी दयानिधि  मिश्र,  आरके. चौधरी, प्रेम मिश्र और जगजीतन पांडेय को सम्मानित किया गया। समारोह का  संचालन विनोदराव  पाठक ने किया। 

संस्थाएं जो शामिल हुईं
धर्मसंघ में हुए आयोजन में केंद्रीय  ब्राह्मण  महासभा ,विश्व  भोजपुरी  समाज,मिथिला  समाज  काशी ,विश्व  ब्राह्मण  परिसंघ, क्षत्रिय  महासभा, सरयूपारीण  ब्राह्मण  परिषद,  महानगर  उद्योग  व्यापार  मंडल, ब्राह्मण  विकास  समिति, वाराणसी  विकास  समिति  तथा पंडित सभा  काशी आदि ने प्रमुख रूप से सहभागिता की।

श्रीविद्या मठ में भी हुआ आयोजन
केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ में आदि गुरु शंकराचार्य के प्राकट्योत्सव पर  समारोह का आयोजन किया गया। द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरुशंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सानिध्य में हुए प्राकट्योत्सव के दौरान आदि गुरु के विग्रह का विधान पूर्वक पूजन किया गया। इसके उपरांत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बटुकों के बीच आदि गुरु की महत्ता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला

शृंगेरी मठ में भी आयोजन
केदार घाट स्थित शृंगेरी मठ में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से आदिशंकराचार्य का प्राकट्योत्सव अनूष्ठानपूर्वक मनाया गया। प्रात: आठ बजे वैदिक बटुकों द्वारा चारां वेदों का पारायण किया गया। समारोह में उपस्थित दंडी संन्यासियों ने विचार व्यक्त किए। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय सचिव चल्ला सुब्बा राव शास्त्री ने कहा सनातन धर्म की विशिष्टताओं से जनसामान्य को अवगत कराने और धर्मानुसार आचरण के लिए ऐसी व्यवस्था दी जो सदा सदा प्रासंगिक रहेगी। इस अवसर पर राजीव झा, एलएन. झा, अंजनि मिश्र, विनोद झा, शीतला प्रसाद पांडेय, डा. वी. मिश्रा आदि ने विचार व्यक्त किए।

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