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ज्योतिष्पीठ के शङ्कराचार्य ने पीएम को लिखा पत्र

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र...वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्त

ज्योतिष्पीठ के शङ्कराचार्य ने पीएम को लिखा पत्र
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,वाराणसीWed, 21 Feb 2024 06:41 PM
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वाराणसी, प्रमुख संवाददाता।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर देश की नदियों के लिए वैदिक नामों को पुनर्स्थापित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की नदियों के प्राचीन नामकरण पर विशेष जोर दिया है।

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में शंकराचार्य ने पवित्र नदियों के सर्वोपरि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया है। श्रीमद्भागवत महापुराण और ऋग्वेद जैसे पवित्र हिंदू धर्मग्रंथों के उद्धरणों का हवाला देते हुए देशवासियों, प्रकृति और विरासत के लिए नदियों के शाश्वत महत्व के साथ-साथ उनके वैदिक नामों पर भी प्रकाश डाला है। इन पवित्र नदियों के नामों में हाल के बदलावों या विकृतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने नरेंद्र मोदी से उनकी वैदिक उपाधियों को बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेने के लिए आग्रह किया है। शङ्कराचार्य वर्तमान में जम्मू और कश्मीर से बहने वाली नदियों के लिए वैदिक नामों की बहाली पर विशेष जोर देते हुए लिखते हैं - चिनाब के लिए 'असिक्नी', झेलम के लिए 'वितस्ता', रावी के लिए 'परुष्णी' और इण्डस के लिए 'सिन्धु नाम का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि वैदिक नदियां हमारे देशवासियों के मन-मस्तिष्क में एक पवित्र स्थान रखती हैं, जो जीवन, संस्कृतियों और सभ्यताओं को बनाए रखने वाली जीवन रेखा के रूप में कार्य करती हैं। उनके वैदिक नाम सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के साथ आध्यात्मिक संबंध का सार दर्शाते हैं। वैदिक नामों के उच्चारण मात्र से व्यक्ति और समाज में पवित्रता, गौरव और सम्मान की भावना जागृत होती है। वैदिक नदियाँ, साथ ही भारत की प्राचीन ज्ञान और साँस्कृतिक विरासत हैं।

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