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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश वाराणसीआत्मनिर्भर भारत: बनारसी साड़ियां ही नहीं राखियां भी बिखेरेंगी जलवा, देखिये VIDEO

आत्मनिर्भर भारत: बनारसी साड़ियां ही नहीं राखियां भी बिखेरेंगी जलवा, देखिये VIDEO

वाराणसी वरिष्ठ संवाददाताYogesh Yadav
Mon, 20 Jul 2020 06:33 PM
आत्मनिर्भर भारत: बनारसी साड़ियां ही नहीं राखियां भी बिखेरेंगी जलवा, देखिये VIDEO

साड़ियों की तरह बनारस की राखियां भी अपना जलवा बिखेरने को बेताब हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में उनकी प्रेरणा से दर्जनों महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। यह महिलाएं हजारों राखियों का निर्माण कर रही हैं। रुद्राक्ष, मिट्टी, लकड़ी, कांच, मोती और गुलाब की पंखुड़ियों से करीब 50 हजार राखी तैयार की जा रही है। बनारस के व्यापार मंडलों ने इस बार इन्हीं राखियों को बेचने का फैसला भी ले लिया है। जिला प्रशासन और डूडा राखियों को बनारस के बाहर भी सप्लाई करने की कोशिशों में जुटा है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बनारसी साड़ियों  की तरह बनारसी राखियां भी चमकेंगी। 

वाराणसी शहर से सटे मीरापुर बसहीं इलाके में 10-10 महिलाओं के दो समूह घर पर ही राखी बना रहे हैं। एक महिला घर का सारा काम निपटाकर दोपहर में प्रतिदिन 20 से 30 दर्जन राखियां बनाती है। इससे रोज 200 से 300  रुपये आय होती है। डूडा ने कच्चा माल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। 

यहां राखी बना रही सरस्वती देवी व वंदना पटेल का कहना है कि इस बार हम सभी महिलाओं ने देसी राखी बनाने का निर्णय लिया है। इससे सभी महिला सदस्यों को घर बैठे आय होती है। इसके साथ ही बाजार में कम कीमत पर राखियां भी उपलब्ध होंगी। नीलम सिंह और कुसुम सिंह पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान में जिला प्रशासन की ओर से मदद मिले तो हम हर संभव उत्पाद बनाने का प्रयास करेंगे।

हर्बल राखियां भी हैं उपलब्ध 
राखियों की करीब तीन दर्जन से अधिक वेरायटी हैं। इनमें रुद्राक्ष की राखी, तुलसी, चंदन, कांच की राखियां प्रमुख हैं। इसके साथ जल्द ही कृत्रिम मोती से भी राखी बननी शुरू होगी। इसके लिए कम लागत में मोती मंगाने का डूडा को प्रस्ताव भेजा है। महिलाओं का कहना है कि महिलाओं को सशक्त करने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता है।

50 हजार राखियों का आर्डर 
जिला प्रशासन ने त्योहार के मद्देनजर 50 हजार राखी बनाने का आर्डर दिया है। प्रशासन राखियों को दुकानदारों तक पहुंचाने में भी महिलाओं की मदद करेगा। इसके लिए महिलाओं को व्यापार संगठनों से जोड़ा जाएगा। महिलाओं ने प्रशासन को दूसरे शहरों में भी यहां की राखियां भिजवाने का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन मदद करे तो पूरे देश में बनारस की राखी भेजी जा सकती है। प्रशासन इस पर विचार कर रहा है।

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