भागवत कथा में जीवंत हुआ रुक्मिणी विवाह प्रसंग
वाराणसी के चिंतामणी बाग में श्रीकृष्ण उत्सव सेवा समिति द्वारा आयोजित कथा में रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर चर्चा हुई। पातालपुरी पीठाधीश्वर ने इसका अर्थ बताया। कथा के दौरान बड़ी भीड़ उमड़ी और महिलाओं में शृंगार पेटी वितरित की गई। अंत में आरती और प्रसाद का वितरण किया गया।

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। श्रीकृष्ण उत्सव सेवा समिति की ओर से रामकटोरा स्थित चिंतामणी बाग में हो रही कथा में शुक्रवार को रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के अंतरनिहित अर्थों पर चर्चा हुई। पातालपुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने इस प्रसंग की व्याख्या की। कथा के छठे दिन पंडाल में खचाखच भीड़ को देखने लायक थी। परिसर में कहीं पैर रखने कि जगह नहीं बची थी। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती गई, वैसे वैसे लोगों का हुजूम भी बढ़ता गया। रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के दौरान संस्था के महामंत्री मुख्य यजमान विनोद कसेरा ने सभी सौभाग्यवती महिलाओं में शृंगार पेटी का वितरण किया। संस्था की तरफ से भक्तों को प्रभु प्रसाद स्वरूप अंगवस्त्रम अध्यक्ष अशोक कसेरा ने प्रदान किया।
कथा के अंत में राजकुमारी, भईया लाल, रामकुमारी देवी आदि ने आरती उतारी। मनोहर, राजकुमार, जयप्रकाश अन्ना, अरुण कसेरा, आकाश कसेरा, विक्की कसेरा, सोनू कसेरा, विजय भानु कसेरा,भरत कसेरा,पवन कसेरा ने स्वयंसेवा प्रदान की। शुक्रवार को प्रसाद की व्यवस्था मां शीतला नवयुवक सेवा समिति के रंजीत कसेरा एवं पुरुषोतम की तरफ से की गई।
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