वर्षगांठ नही मनाता, आत्मावलोकन करता है आरएसएस : जे. नंद कुमार

Feb 02, 2026 08:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में जे. नंद कुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वर्षगांठ पर आत्मावलोकन की बात की। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है। संगोष्ठी में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए और विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार साझा किए।

वर्षगांठ नही मनाता, आत्मावलोकन करता है आरएसएस : जे. नंद कुमार

वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है, जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता, बल्कि आत्मावलोकन करता है, कि जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ या नहीं। प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नंद कुमार ने सोमवार को यह बातें कहीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित ‘पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में वह मुख्य अतिथि रहे। आईसीएसएसआर नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में जे. नंद कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है।

यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नहीं है, यह पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है और आगे भी हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा। अध्यक्षता करते हुए साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि पंच परिवर्तन सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि संघ के सिद्धांतों को समेकित करने का मूलमंत्र है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संघ के विचारों को आत्मसात करना ही होगा। विशिष्ट वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय समिति के सदस्य रामाशीष कुमार ने कहा कि कुंठित मन, संकुचित हृदय और बंधा हुआ हाथ राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकते। भारतीय युवा राम से प्रेरणा लेकर समभाव वाले बने। अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने किया। स्वागत भाषण डॉ. पारुल जैन और धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने दिया। संयोजन डॉ. शान्तनु सौरभ, सह संयोजन डॉ. सिद्धार्थ सिंह और संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह ने किया। उप प्राचार्यद्वय प्रो. संगीता जैन और प्रो. राहुल भी उपस्थित रहे। 100 से अधिक शोधपत्र पढ़े गए संगोष्ठी के पहले दिन आठ सत्रों में देश के सभी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने 100 से ज्यादा शोधपत्र पढ़े। सत्रों में 24 से अधिक विद्वानों ने विचार रखें। इनमें पूर्व कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह, प्रो. एचके सिंह, प्रो. टीपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम यादव, प्रो. एसके दुबे, प्रो. पीएन सिंह, अजय कुमार, डॉ. अनिल सिंह, प्रो. जयशंकर पाण्डेय सहित अन्य वक्ता शामिल रहे।

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