Varanasi News: सिर्फ महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं : संभव राम

हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News: वाराणसी। परिवारों के विघटन का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है। महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं है। समाज को आत्मचिंतन की आवश्यकता है। गुरुपूर्णिमा पर आयोजित महोत्सव में यह बातें कही गईं। पारिवारिक विवादों की जड़ धन का लोभ है। अधिवेशन में जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया गया।

सिर्फ महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं : संभव राम
सिर्फ महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं : संभव राम

Varanasi News: वाराणसी। परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है। केवल महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं। पति, परिवार और समाज सभी को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। ये बातें श्रीसर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम कहीं। वह गुरुपूर्णिमा के पर आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को सायंकालीन महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वास्तविक धन, संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छे कर्म, श्रेष्ठ संस्कार और महापुरुषों द्वारा दिखाया गया मार्ग है। मोह-माया का त्याग करने का अर्थ घर-परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि मन के विकारों-लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष का परित्याग करना है। विवाह के बाद बेटी अपना घर-परिवार छोड़कर नए परिवेश में आती है। ऐसे में उसे सम्मान, सहयोग और अपनापन मिलना चाहिए। वहीं नववधू को भी नए परिवार के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करना चाहिए। दोनों पक्षों की संवेदनशीलता से ही परिवार सुखी और सुदृढ़ बन सकता है। पारिवारिक विवादों की जड़ धन का लोभ है। इसी स्वार्थपूर्ण सोच के कारण संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं। माता-पिता वृद्धावस्था में उपेक्षा का जीवन जीने को विवश हो रहे हैं। समाज भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन और आचरण से प्रेरणा लेता है। किसी भी संस्था की वास्तविक प्रगति उसके पदाधिकारियों के चरित्र पर निर्भर करती है। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रयागराज की दुर्गवाती चौधरी ने की। अन्य वक्ताओं में संस्था के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, संतोष मिश्रा, प्रकाश पृथु, गोपाल शंकर श्रीवास्तव, सोनी, स्वीटी, शैलजा शाहदेव और श्वेता श्रीवास्तव शामिल रहीं। नीलिमा सिंह और कुमारी पूर्णिमा ने भजन गया। संचालन सुष्मिता और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एसपी सिंह ने किया。

प्रात:काल हुआ अधिवेशन

इससे पूर्व श्रीसर्वेश्वरी समूह का 65वां अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन सुबह आठ बजे प्रारंभ हुआ। इसमें संस्था द्वारा गत् गुरुपूर्णिमा से इस गुरुपूर्णिमा तक किए गये जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया गया। संस्था के दिवंगत हुए सदस्यों कि सूची पढ़ी गई। दो मिनट मौन रखकर दिवंगत आत्माओं के शांति के लिए प्रार्थन की गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस महोत्सव का मुख्य विषय क्या था?
परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है।
Arvind Mishra

लेखक के बारे में

Arvind Mishra

शार्ट बायो : सांस्कृतिक समीक्षक के रूप में हिंदी पत्रकारिता में खास पहचान रखने वाले अरविन्द मिश्र अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के पत्रकार हैं। उनके दादा स्व.पं.जनार्दन दत्त मिश्र ‘व्यास’ ने आजादी की लड़ाई में अपनी लेखनी से देश की सेवा की। उनके पिता नवगीतकार स्व.पं.अशोक मिश्र ‘सामयिक’ ने देश के कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों में उच्च पदों पर सेवाएं दीं।


परिचय एवं अनुभव

अरविन्द मिश्र, हिंदी सांस्कृतिक पत्रकारिता का जाना पहचाना नाम है। बीते ढ़ाई दशक से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में बतौर सांस्कृतिक पत्रकार कार्यरत हैं। पत्रकारिता की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में हुई। दैनिक आज और अमर उजाला के लिए अर्से तक धर्म-संस्कृति की रिपोर्टिंग के साथ-साथ खेल पत्रकारिता भी की। रंगमंच, साहित्यिक मंच और संचालन विधा पर लेखन करने के साथ ही स्वयं उक्त विधाओं से जुड़े भी हैं।


करियर का सफर

अरविन्द मिश्र ने विद्यार्थी जीवन के दौरान ही काशी के सांध्यकालीन एवं साप्ताहिक समाचार पत्रों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। वर्ष 1997 में दैनिक आज से जुड़कर मुख्य धारा की पत्रकारिता आरंभ की। आज अखबार चार वर्ष सेवा देने के बाद वर्ष 2002 में दैनिक अमर उजाला के वाराणसी संस्करण से बतौर रिपोर्टर जुड़े। वर्ष 2008 से 2012 तक अमर उजाला कॉम्पैक्ट की डेस्क और रिपोर्टिंग टीम को लीड किया। बरेली में अमर उजाला कॉम्पैक्ट की लॉन्चिंग कराई। वर्ष 2013 में दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण से जुड़े। हिन्दुस्तान की ‘पटना लाइव’ टीम को चार वर्षों तक लीड किया। वर्ष 2018 से वाराणसी में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

हाईस्कूल की परीक्षा विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी के रूप में उत्तीण करने के बाद इंटरमीडिएट की परीक्षा वाणिज्य विषय से दी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा यूपी बोर्ड से उत्तीर्ण की। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से वर्ष 1994 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण एम.कॉम की पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। बहुत ही कम समय में अरविन्द मिश्र ने अमर उजाला में सांस्कृतिक पत्रकारिता के नवीन मानदण्ड स्थापित कर दिए। इस दौरान उन्होंने ‘काशी परिक्रमा’, ‘आमने-सामने’ और ‘देखी तुम्हरी काशी’ जैसे कॉलमों के माध्यम से अपनी लेखनी को धार दी। प्रदूषण की मार झेल रही गंगा पर उन्होंने विशेष रूप से कार्य किया। गंगा पर उनके विशिष्ट लेखन से प्रभावित होकर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरुशंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें गंगारविन्द नाम दिया। सोशल मीडिया पर अरविन्द मिश्र इसी नाम से पहचाने जाते हैं। हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद अरविन्द मिश्र ने सांस्कृति पत्रकारिता में मील के कई पत्थर स्थापित किए। उन रिपोर्ट में रामनगर की रामलीला, नाटी इमली के भरत मिलाप से लेकर काशी में होने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की अनेकानेक रिपोर्ट शामिल हैं। संकट मोचन संगीत समारोह और काशी के अति प्राचीन बेनियाबाग के इतिहास को पहली बार कलमबंद करने का श्रेय भी अरविन्द मिश्र को ही जाता है। उन्हें हिन्दुस्तान अखबार की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले ‘होनहार अवार्ड’ इंडिवीजुअल कैटेगरी में छह बार दिए जा चुके हैं। जिन समाचार शृंखलाओं के लिए उन्हें यह अवार्ड मिले उनमें ‘काकोरी काण्ड के नायक’, ‘मैं बेनियाबाग हूं’, ‘प्रेमचंद के बहाने’, ‘प्रेमचंद से छल’, ‘सब्जीवाला शायर’ और ‘गंगा कावेरी’ शामिल हैं। संकट मोचन संगीत समारोह, काशी तमिल संगमम, बनारस लिट् फेस्ट जैसे वृहद आयोजनों की यादगार कवरेज की कटिंग पाठकों ने सहेज कर रखी है। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के दिन अरविन्द मिश्र ने 23 अगस्त की तारीख को चंद्रयान दिवस के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल छेड़ी। इसका नतीजा यह हुआ कि दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से लौट कर सीधे इसरो पहुंचे प्रधानमंत्री ने इस दिन को नेशनल स्पेस डे के रूप में मनाने की घोषणा कर दी।


विशेषज्ञता

अरविन्द मिश्र निश्चित रूप से सांस्कृति पत्रकार के रूप में अपनी खास पहचान रखते हैं लेकिन मानवीय कोणों वाली स्टोरी, शिक्षा, खेल और प्रशासनिक रिपोर्टिंग में भी अपनी दक्षता प्रमाणित की है। एक सफल रिपोर्टर होने के साथ ही उन्होंने अपने आप को एक छायाकार के रूप में भी स्थापित किया। हिन्दुस्तान समाचार पत्र में पटना और वाराणसी संस्करण में सौ से अधिक फोटोग्राफ पर बाइलाइन मिल चुकी है। काशी में देवदीपावली के उत्सव की उनके द्वारा ली गई तस्वीर को हिन्दुस्तान के देशभर के सभी संस्करणों में प्रमुखता से स्थान मिल चुका है।

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