
सीएम से नदी विज्ञानी ने पूछे सवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर ने रखा पक्ष
Varanasi News - ख्यात नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर गंगापार रेती में बन रही नहर की वैज्ञानिकता के संबंध में 15 सवाल...
वाराणसी। प्रमुख संवाददाता

ख्यात नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर गंगापार रेती में बन रही नहर की वैज्ञानिकता के संबंध में 15 सवाल पूछे हैं। वहीं, कांग्रेस नेता अजय राय ने नहर को गंगा के पौराणिक स्वरूप के लिए खतरा बताया है। इन सब के बीच उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन, लखनऊ के प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज वर्मा ने पहली बार आधिकारिक रूप से इस योजना की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री से पूछे गए 15 सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में प्रो. यूके चौधरी ने पूछा है कि रेत पर नहर में डिस्चार्ज की गणना कैसे की गई? क्रॉस-सेक्शन कैसे तय हुआ था? ढलान कैसे तय हुआ? रेत में रिसाव दर की गणना कैसे हुई? उच्च बाढ़ क्षेत्र में आने वाली नहर की स्थिरता कैसे तय हुई? किस हाइड्रोडायनामिक सूत्र का उपयोग किया गया है? नहर का शीर्ष उच्चतम बाढ़ स्तर से कितना नीचे होगा? नहर का घाट किनारे अवसादन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? शुष्क मौसम में क्या नहर बहने की स्थिति में रहेगी? क्या कैनाल ‘नॉन सिलटिंग नॉन स्कावरिंग टाइप की होगी? यदि ऐसा नहीं है, तो इसे कितने समय में भरा जाएगा? नहर की वर्तमान लागत क्या है और नहर के रख-रखाव की लागत क्या होगी? नहर की दीवार को किसने डिजाइन किया है? दीवार के कोण कैसे तय हुए हैं तथा डाउनस्ट्रीम में स्पर का क्या प्रभाव होगा?
अपने अनुभव के आधार पर प्रो. चौधरी का कहना है कि यह नहर स्थायी नहीं हो सकेगी। इसका दुष्प्रभाव पक्के घाटों पर पड़ेगा। गंगा का पौराणिक स्वरूप भी प्रभावित होगा।
प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन
अर्द्ध चंद्राकार घाटों को मिलेगा नया जीवन
उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज वर्मा ने बताया कि सामनेघाट से राजघाट तक गंगापार रेत पर 11.95 करोड़ की लागत से ड्रेजिंग करके 5.3 किमी लम्बी और करीब 45 मीटर चौड़ी कैनाल विकसित की जा रही है। इससे ऐतिहासिक पक्के घाटों को नया जीवन मिलेगा और किनारे पर कटान नहीं होगा। प्रोजेक्ट की लागत का 50 फीसदी रेत की नीलामी से निकाला जाएगा। साथ ही घाटों के सामने उस पार रेत पर पर्यटन और आस्था का नया केंद्र भी विसकित होगा।
प्रोजेक्ट मैनेजर का तर्क है कि रामनगर इलाके में रेत जमा होने से गंगा का प्रवाह बदल गया है। इस कारण घाटों के किनारे खड़ी सदियों पुरानी विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है। घाटों के नीचे हुए कटान को करीब एक साल में गंगा के प्रवाह के साथ आने वाली सिल्ट स्वत: भर देगी।
गंगापार आईलैंड बनेगा : कमिश्नर
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत रेत में पर्यटकों के लिए आइलैंड विकसित किया जा रहा है। रामनगर में रेती पर सी-बीच जैसा माहौल बनाया जाएगा। पर्यटक पैराग्लाइडिंग, स्कूबा डाइव, ऊंट, हाथी और घोड़े की सवारी का लुत्फ ले सकेंगे। प्रोजेक्ट को प्रभावी बनाने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का सहारा लिया जा सकता है।
पौराणिक स्वरूप समाप्त करने की साजिश
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने शनिवार को जारी बयान में कहा है कि काशी में गंगा के अर्द्ध चंद्राकार स्वरूप को सरकार खत्म करना चाहती है। गंगा के पुत्र बने काशी के सांसद नरेन्द्र मोदी ने गंगा के नाम पर काशीवासियों को ठगा है। गंगा का प्रवाह अत्यंत मंद हो गया है। कई घाटों के किनारे तेजी से शैवाल जमा हो रहे हैं। संत रविदास घाट के पास गंगा जल काला हो गया है। बिना विशेषज्ञों की राय लिए गंगा के मूल स्वरूप से खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्तमान सरकार बाजारीकरण के लिए यह कार्य कर रही है।
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