बोले काशी - भारी टेंशन, सीवर-पानी के वर्षों से नहीं हुए कनेक्शन
Varanasi News - वाराणसी के हटिया मोहल्ले के निवासी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। 10 साल से सीवर कनेक्शन नहीं मिला है, पानी की पाइपलाइन नहीं बिछी है, और सड़कें बदहाल हैं।
वाराणसी। ‘विकास’ की भी अजीब चाल है। कहीं पानी और सीवर की पाइप लाइनों के बिछने का इंतजार तो कहीं मुद्दत पहले बिछी लाइनों से घरों का कनेक्शन न होने की टेंशन। नवशहरी मोहल्ला हटिया के बाशिंदे भी सीवर और पानी का कनेक्शन मिलने की टेंशन से गुजर रहे हैं। परेशानियों के भंवन में फंसे नागरिकों को सरकारी पानी नहीं मिलता, सड़कें उबड़-खाबड़, स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं मगर गृह और जलकर बराबर देते हैं। इस उम्मीद में कि करदाताओं का लिहाज करते हुए शायद नगर निगम बुनियादी सुविधाएं मुहैय्या करा दे। --------------------- नगर निगम के तरना वार्ड के सीमा विस्तार में शामिल हटिया मोहल्ला अव्यवस्थाओं, उनसे उपजी दुश्वारियों का गढ़ बन गया दिखता है।
‘हिन्दुस्तान’ के साथ समस्याएं साझा करते हुए शिवम यादव, पीयूष ने कहा कि यहां के बच्चों का बचपन बिना पार्क और खेल के मैदान के गलियों की धूल में गुम हो रहा है। बच्चों का बचपन गलियों तक सिमट गया है। खेल के मैदान की कमी के साथ-साथ इस वर्ष मोहल्लेवासियों को वर्षों पुरानी होलिका दहन की परंपरा से भी समझौता करना पड़ा है। रामविलास यादव ने बताया कि जिस स्थान पर दशकों से होलिका दहन हो रहा था, वहां ड्यूप्लेक्स बन गया है। जगह उपलब्ध न होने कारण इस साल मोहल्ले में होलिका नहीं लगाई जा सकी है। मटरू यादव और ओमप्रकाश सिंह ने कहा, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए मोहल्ले में एक स्थान चिह्नित किया जाए, ताकि भविष्य में होलिका दहन जैसी परंपराएं प्रभावित न हों। 10 साल से सीवर कनेक्शन नहीं लल्लू यादव ने बताया कि करीब 10 साल पहले मोहल्ले में सीवर पाइप लाइन बिछा दी गई थी, लेकिन आज तक घरों में कनेक्शन से नहीं किया गया। जलनिकासी का संकट तब गहरा गया जब क्षेत्र का एकमात्र प्राचीन नाला क्षतिग्रस्त हो गया। यह नाला होलापुर, छत्तरीपुर, हटिया, भरलाई और तरना जैसे कई इलाकों के लिए जलनिकासी का मुख्य जरिया था। रामजी यादव ने कहा कि एक दशक बाद भी सीवर पाइप लाइन चालू नहीं हो सकी है। राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि सीवर लाइन और नाला बंद होने से हल्की बारिश में भी मोहल्ले में जलजमाव हो जाता है। लोगों को आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़कें बदहाल, गलियां कच्ची अमरनाथ यादव बोले, मोहल्ले की मुख्य सड़क की वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। स्थिति उस पर बने गड्ढे अब हादसों को दावत दे रहे हैं। अमित यादव ने कहा कि मोहल्ले की कई गलियां आज भी कच्ची हैं। बरसात में इन कच्ची गलियों और सड़कों पर जलजमाव होने से पैदल चलना दूभर हो जाता है। समीर यादव ने बताया कि शहर का हिस्सा होने के बावजूद मोहल्ले में पक्की गलियों और इंटरलॉकिंग का अभाव है। पानी के पाइप का इंतजार बुंधन यादव और भागीरथी के मुताबिक मोहल्ले में पेयजल की पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। ज्यादातर लोग पानी के लिए उन पड़ोसियों पर निर्भर हैं जिनके घरों में निजी समर्सिबल लगा है। घनी आबादी के बीच लगा एकमात्र हैंडपंप महीनों से खराब है। संजय यादव बोले, एक तरफ सरकारी पानी की बूंद तक नहीं पहुंच रही है, वहीं निवासियों को हाउस टैक्स के साथ वाटर टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। राजू यादव ने बताया कि पानी की कमी से दैनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं। कूड़ा गाड़ी की अनियमितता छोटेलाल यादव के मुताबिक सफाईकर्मी 10-10 दिनों तक गायब रहते हैं। कभी आते भी हैं, तो खानापूर्ति के लिए झाड़ू लगाकर चले जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि झाड़ू लगाने के बाद जमा कचरे का उठान नहीं होता। इससे कचरा हवा के साथ गलियों में ही फैल जाता है। दीपक गुप्ता ने बताया कि मोहल्ले में कूड़ा गाड़ी समय पर नहीं आती है। लोग मजबूरन खाली प्लॉटों में कचरा फेंक रहे हैं। प्रेम यादव बोले कि कचरा निस्तारण न होने से मोहल्ले की स्वच्छता प्रभावित है। गैस कनेक्शन और फॉगिंग नहीं प्रकाश यादव ने कहा कि मोहल्ले में गैस पाइप लाइन सालों बिछी लेकिन आज तक घरों में कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। लोग आज भी सिलेंडर पर निर्भर हैं। रामविलास यादव और मुन्ना पाल ने बताया कि साल में मुश्किल से एक बार फॉगिंग मशीन आती है। बरसात के दिनों में जब मच्छरजनित बीमारियों का खतरा चरम पर होता है, तब भी नगर निगम की ओर से फॉगिंग नहीं कराई जाती है। खंभों, स्ट्रीट लाइटों का अभाव रवीन्द्र यादव ने ध्यान दिलाया कि मोहल्ले में बिजली के पर्याप्त खंभे नहीं हैं। स्ट्रीट लाइटें भी मुख्य सड़क पर लगी हैं। गलियों में एक भी लाइट नहीं लगाई गई है। रामविलास यादव ने कहा कि सूरज ढलते ही गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं। इससे न केवल आवागमन में परेशानी होती है बल्कि चोरी और दुर्घटनाओं का भी खतरा रहता है। कई बार बिजली के खंभों की संख्या बढ़ाने और हर गली में एलईडी लाइटें लगाने की मांग की गई लेकिन स्थिति जस की तस है। हमारी भी सुनें 1. बच्चे गलियों में खेलने को मजबूर हैं। मोहल्ले में या आसपास न पार्क है और न मैदान की सुविधा। - संजय यादव 2. जहां होलिका दहन होता था, वहां मकान बन गए हैं। प्रशासन ने अगर जगह चिह्नित नहीं की तो वर्षों पुरानी परंपरा नहीं बचेगी। - रामविलास यादव 3. दस साल पहले सीवर पाइप लाइन बिछी लेकिन आज तक कनेक्शन ही नहीं मिला। जलनिकासी की गंभीर समस्या है। - रामजी यादव 4. मोहल्ले का पुराना नाला जगह-जगह पट चुका है। बारिश के पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं बचा। जलजमाव हो जाता है। - लल्लू यादव 5. मोहल्ले की सड़कें वर्षों से नहीं बनीं। बरसात में कच्ची गलियों में कीचड़ से बुजुर्गों और बच्चों का पैदल चलना दूभर हो जाता है। - प्रकाश यादव 6. पेयजल पाइप लाइन है नहीं, फिर भी वाटर टैक्स का बिल भेजा जा रहा है। बिना सुविधा दिए टैक्स वसूलना गलत है। - अमरनाथ यादव 7. मोहल्ले में लगा एक हैंडपंप खराब पड़ा है। पानी के लिए हमें दूसरों के सबमर्सिबल पर निर्भर रहना पड़ता है। - भागीरथी 8. सफाईकर्मी दस दिन में एक बार आते हैं। झाड़ू लगाते हैं मगर कूड़ा नहीं उठाते। कूड़ा हवा से उड़कर फैलने लगता है। - छोटेलाल यादव 9. कूड़ा गाड़ी नहीं आती, इसलिए लोग खाली प्लॉटों में कचरा फेंक रहे हैं। मोहल्ले में कई स्थान डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं। - राघवेन्द्र प्रताप सिंह 10. गैस पाइप लाइन सालों पहले बिछाई गई थी, लेकिन कनेक्शन आज तक नहीं मिला। पाइप भी खराब हो चला होगा। - दीपक गुप्ता 11. मच्छरों के चलते जीना मुश्किल हो गया है लेकिन फॉगिंग साल में एक बार ही कराई जाती है। - मुन्ना पाल 12. दूसरों के घरों से पानी लाकर काम करना पड़ता है। मोहल्ले में पानी की पाइप लाइन न बिछने से हम मजबूर हैं। - बुधन यादव सुझाव और शिकायतें सुझाव 1. नगर निगम मोहल्ले में खाली पड़ी सरकारी जमीन को चिह्नित करे, वहां पार्क और बच्चों के लिए खेल का मैदान बनवाए। 2. वर्षों से बंद सीवर लाइन को चालू करने के साथ तत्काल घरों को कनेक्शन दिया जाए, नाले को अतिक्रमण मुक्त कर जलनिकासी सुनिश्चित की जाए। 3. मोहल्ले के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जाए। तब तक के लिए खराब हैंडपंप की मरम्मत जरूरी है। 4. मोहल्ले में कूड़ा गाड़ी के आने का समय निर्धारित हो। इसके साथ ही सफाईकर्मियों की प्रतिदिन उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। 5. मोहल्ले की हर गली में बिजली के अतिरिक्त खंभे लगाए जाएं, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी अंधेरी गलियों में एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं। शिकायतें 1. होलिका दहन के पारंपरिक स्थल पर निजी निर्माण से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जगह नहीं बची है, जिससे वर्षों पुरानी परंपराएं टूट रही हैं। 2. मोहल्ले की उबड़-खाबड़ सड़क, कच्ची गलियों के कारण बरसात में जलभराव से स्थानीय निवासियों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। 3. सीवर पाइप लाइन का कनेक्शन घरों में नहीं दिया गया। पेयजल सुविधा भी नहीं है। इसके बावजूद टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। 4. सफाईकर्मी दस दिनों में एक बार ही आते हैं। कूड़े का उठान नहीं होता। कूड़ा गाड़ी आने का समय तय नहीं है। 5. मोहल्ले में बिजली के पर्याप्त खंभे नहीं हैं। मुख्य सड़क पर ही स्ट्रीट लाइट लगी हैं। गलियों में अंधेरा रहता है। फॉगिंग भी नहीं होती।
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