एक लाख वर्गफीट में होगा वाराणसी में प्रभु जगन्नाथ का आंगन, शंकराचार्य ने किया शिलापूजन

Abhishek Tripathi हिन्दुस्तान, वाराणसी
Follow us on Google News
share

काशी में अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का शुभारंभ कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने किया।  मंदिर एक लाख वर्ग फीट में  होगा। मंदिर का निर्माण धौलपुर के शिल्पकार गिरिराज सैनी द्वारा किया जाएगा।

एक लाख वर्गफीट में होगा वाराणसी में प्रभु जगन्नाथ का आंगन, शंकराचार्य ने किया शिलापूजन

काशी में 236 साल से स्थापित अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का शुक्रवार को कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने शुभारंभ किया। मंदिर परिसर में ‘शिला पूजन एवं शिलान्यास’ कार्यक्रम में विधिवत पूजन के बाद उन्होंने इस मंदिर के माध्यम से समाज के कल्याण की कामना की। इसी के साथ एक लाख वर्गफीट में फैले मंदिर परिक्षेत्र के जीर्णोद्धार का शुभारंभ भी हुआ। सुबह छह बजे कलश यात्रा के साथ शिला पूजन समारोह का शुभारंभ हुआ। अस्सी घाट से मातृशक्ति कलश यात्रा निकली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में माताएं और बहनें पारंपरिक वेशभूषा में मंगल कलश सिर पर धारण कर चल रही थीं। डमरुओं के निनाद और जय जगन्नाथ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बन गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी यात्रा के साथ जुड़े।

जगन्नाथ मंदिर में शिलापूजनोपरांत शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने कहा काशी में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बने, यह हम लोगों की बहुत दिनों से कामना थी और आज शिलान्यास के रूप में वह परिणत होता दिखाई दे रहा है। शास्त्र सम्मत परिवर्तन हमेशा समाज के लिए लाभदायक होता है। अगर परिवर्तन शास्त्र के विरुद्ध होता है तो उससे समाज का नुकसान होता है। काशी में मंदिर का जीर्णोद्धार हो रहा है। इसमें सभी का सहयोग अपेक्षित है।

मंदिर निर्माण में सहयोग की अपील

ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने कहा कि हम लोग बस निमित्त मात्र हैं, भगवान जगन्नाथ सब कर रहे हैं और हम लोग उन्हीं के अनुसार चल रहे हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण में सभी के सहयोग की अपील की। ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 1790 में मंदिर बना और 1802 से अनवरत रथयात्रा मेले का आयोजन चल रहा है। अब मंदिर का निर्माण भगवान जगन्नाथ की ही कृपा से संभव होने जा रहा है। बताया कि मंदिर परिसर में वेद की शिक्षा के साथ धर्मशाला, भोजनालय आदि की भी व्यवस्था की जाएगी।

वाराणसी। समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 108 कर्मयोगीयों को शंकराचार्य ने सम्मानित किया। संचालन डॉ. कमलेश तिवारी ने किया। अतिथियों का स्वागत न्यासी डॉ. संजीव राय ने किया। इस अवसर पर पद्मभूषण डॉ. वशिष्ठ त्रिपाठी, पद्मश्री राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री प्रो. कमलाकर त्रिपाठी, पद्मश्री शिवनाथ मिश्रा, न्यासी रवि प्रताप सिंह, अनिल केडिया, उत्कर्ष श्रीवास्तव, शैलेश शापुरी, दीपक शापुरी, रमन घनपाठी, मणि कुमार, सर्व-व्यवस्था प्रमुख नवीन श्रीवास्तव, समिति सदस्य हरीश वालिया, ज्ञानेश्वर जायसवाल, कृष्ण देव, दिलीप मिश्रा, आनंद भगत, अमित त्रिपाठी, डॉ. शिशिर मालवीय, विक्रांत, विनय राय, हिमांशु, अजय, संजय, आशीष, आशु आदि उपस्थित रहे।

अस्सी घाट के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर का पुनर्निर्माण धौलपुर के शिल्पकार गिरिराज सैनी करेंगे। तीन वर्ष की अनुमानित अवधि में तैयार होने वाले मंदिर की कुल लागत 50 करोड़ रुपये तक आएगी। जनसहयोग से इसमें 30 करोड़ रुपये जुटाए लिए गए हैं। मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर भी धौलपुर से ही आएंगे।

ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार एक लाख वर्गफीट में मंदिर का मुख्य प्रासाद, शिखर, यज्ञ मंडप और वेदाध्यन कक्ष भी बनाए जाएंगे। मंदिर का शिल्प जगन्नाथपुरी से मिलता-जुलता होगा मगर इसमें वर्तमान मंदिर का प्रतिबिंब भी होगा। नागर शैली में बन रहे दो शिखर वाले मंदिर में भूतल के साथ प्रथम तल का निर्माण भी होगा। शिखर पर परंपरागत रूप से जगन्नाथ महाप्रभु की पताका भी फहराई जाएगी। मंदिर के तीनों विग्रह यथावत रहेंगे। 2015 में जगन्नाथपुरी में नवकलेवर के समय तीनों विग्रह काशी लाए गए थे।

निर्वासित भक्त की आस्था से काशी में मंदिर स्थापना

महादेव की नगरी काशी में शैव-वैष्णव मतैक्य के प्रतीक अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर की नींव 17वीं सदी में एक निर्वासित अनन्य भक्त की आस्था से पड़ी थी। यह कहानी परंपराओं के साथ ही भक्त और भगवान के मानस बंधन का भी बखान करती है।

17वीं सदी में जगन्नाथपुरी के सेवक और रथयात्रा महोत्सव के प्रबंधक ब्रह्मचारी जी किसी बात पर पुरी नरेश से नाराज होकर वहां से काशी की ओर चल दिए। तब पुरी नरेश ने भी उन्हें नहीं रोका। ब्रह्मचारी जी संकल्पबद्ध होकर केवल जगन्नाथ महाप्रभु का प्रसाद ही ग्रहण करते थे। नरेश को इस संकल्प का स्मरण आया तो उन्होंने हर रोज पुरी से काशी महाप्रसाद भेजने की व्यवस्था की। उस काल में सड़कें या साधन नहीं होते थे और पुरी से कांवर पर प्रसाद लेकर हरकारे काशी आते थे। मौसम या अन्य कारणों से कई बार प्रसाद पहुंचने में हफ्तों की देरी हो जाती थी और ब्रह्मचारी जी भूखे रह जाते थे।

काशी के वर्णित इतिहास के मुताबिक 1790 में ऐसे ही लंबा उपवास काट रहे अपने भक्त के स्वप्न में स्वयं जगन्नाथ महाप्रभु आए और उन्हें काशी में प्रतिष्ठापित करने का आदेश दिया। ब्रह्मचारी जी ने इस स्वप्नादेश की चर्चा भोसला स्टेट के पंडित बेनीराम और दीवान विश्वंभरनाथ से की।

उनके प्रयासों से अस्सी क्षेत्र में जगन्नाथ महाप्रभु को सकुटुंब स्थापित किया गया और वर्ष-1802 में रथयात्रा मेले की नींव पड़ी। महामारी काल में प्रतीकात्मक पूजन के अलावा कभी भी यह पूजन परंपरा नहीं टूटी। ब्रह्माचारी जी ने अस्सी स्थित मंदिर परिसर में ही समाधि ली। आज भी मंदिर परिसर में उनका चित्र, धोती और पीढ़ा सुरक्षित हैं और उनकी पूजा होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शुरुआत कब हुई?
जगन्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शुरुआत शुक्रवार को हुई।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Abhishek Tripathi

लेखक के बारे में

Abhishek Tripathi

शॉर्ट बायो : अभिषेक त्रिपाठी पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय है। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर जुड़े हैं। वाराणसी संस्करण के लिए वह शिक्षा जगत और राजनीतिक दल में कांग्रेस बीट कवर करते हैं।


परिचय एवं अनुभव

अभिषेक त्रिपाठी वाराणसी में इससे पहले भी विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। शिक्षा और राजनीतिक बीट के रिपोर्टर के तौर पर 2021 से इन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। लगभग पांच वर्ष से इस भूमिका में इन्होंने विशिष्ट अभियान, असर और ऑफबीट खबरें भी शामिल हैं।


करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)

अभिषेक ने अपने करियर की शुरुआत 2007 में अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार से की। यहां पहले डेस्क और फिर रिपोर्टिंग में काम किया। रिपोर्टिंग में मेडिकल, रेलवे और अपराध जैसी बीट पर कााम किया। यहां से 2011 में हिन्दुस्तान वाराणसी की सेवाएं शुरू की। अगले छह वर्ष तक प्रशासन और क्राइम रिपोर्टिंग में कई प्रतिमान स्थापित किए। 2016 में दैनिक भास्कर भोपाल से जुड़े और यहां लोकल रिपोर्टिंग से इतर डिजिटल और देश-दुनिया की खबरों की समझ विकसित की। 2020 तक दैनिक जागरण के अलावा विभिन्न डिजिटल और प्रिंट माध्यमों से जुड़े रहने के बाद 2021 में दोबारा हिन्दुस्तान वाराणसी में शिक्षा बीट पर वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम शुरू किया।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

12वीं तक विज्ञान, इसके बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ने अभिषेक को जीवन की सभी धाराओं का अनुभव दिया। इसका असर पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों में रिपोर्टिंग, लेखन और प्रस्तुतिकरण पर दिखा। अभिषेक राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय एंगल वाली खबरों के लेखन में सिद्धहस्त हैं। प्रशासन और अपराध जगत की खबरों पर भी इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वाराणसी की भौगोलिक समझ और बड़ा सामाजिक दायरा भी इनकी रिपोर्टिंग में काफी मददगार साबित होता रहा है। 2013 से राजनीतिक, प्रशासनिक और विकास के मोर्चे पर बदलते बनारस के हर पहलू को इन्होंने गहराई से समझा और प्रस्तुत किया है। संप्रति शिक्षा जगत में प्री-प्राइमरी से लेकर आईआईटी की तकनीकी दक्षता वाली खबरों को भी लिख सकने में यह सक्षम रिपोर्टर हैं।


एंटरटेनमेंट और विजन

अभिषेक फिल्म, ट्रेंड्स, यूथ और लाइफस्टाइल विषयों पर भी बेहतरीन पकड़ रखते हैं। सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के लिए भी वह प्रसिद्ध हैं। बीते वर्षों में अपने अखबार के लिए इन्होंने कई विशेष कवरेज, इंटरव्यू, सीरीज प्लान किए हैं। अभिषेक का मानना है कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता और नयापन जरूरी है। इसके साथ ही खबरों का लेखन और प्रस्तुतीकरण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। मुद्दों की समझ और उनकी सटीक प्रस्तुति पाठक को समाचार पर ठहरने और बाद में उसकी चर्चा करने पर विवश करती है।


विशेषज्ञता
प्रशासनिक और राजनीतिक कवरेज
अपराध और मानवीय एंगल के समाचारों में सिद्धहस्तता
फिल्म स्टार, साहित्यकार और राजनीतिज्ञों के विशेष साक्षात्कार
शिक्षा, धर्म संस्कृति और ऑफबीट खबरें
डेस्क पर खबरों का संपादन और पेजमेकिंग

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।