एआई घटा रही है नई पीढ़ी की चिंतन क्षमता

Abhishek Tripathi हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - वाराणसी में पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा ने शिक्षा और अनुसंधान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सामग्री का उपयोग सही और गलत दोनों तरह से हो सकता है। एआई किताबों का विकल्प नहीं हो सकता और क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने 'कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स' पुस्तक की परिकल्पना भी साझा की।

एआई घटा रही है नई पीढ़ी की चिंतन क्षमता

वाराणसी। लंबे सफेद बाल, घनी मूछ और चेहरे पर गुरुतर भाव। वह लाखों विद्यार्थियों के शिक्षक हैं जिन्हें वह खुद भी नहीं पहचानते। पिछले 30 या इससे भी ज्यादा वर्षों में देश में स्कूल स्तर पर विज्ञान पढ़ने वाला शायद ही कोई विद्यार्थी ऐसा हो जो प्रो. एचसी वर्मा और ‘कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स’ से अपरिचित हो। देश का भविष्य संवारने के इन्हीं प्रयासों की बदौलत उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। शुक्रवार को बीएचयू आए पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा ने ‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में शिक्षा, अनुसंधान और नई पीढ़ी से जुड़े सवालों के जवाब दिए।किताबों का विकल्प नहींप्रो. एचसी वर्मा ने ऑनलाइन पाठ्य सामग्री, इंटरनेट और एआई के इस्तेमाल के सही और गलत प्रभावों की चर्चा के दौरान कहा, यह अच्छा है कि बच्चों को एक क्लिक पर सब कुछ उपलब्ध है मगर इसकी चुनौतियां बड़ी हैं।

एआई या इंटरनेट से जानकारी लेने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह सही है या गलत। यह उसके लिए ठीक है जिसे विषय की बुनियादी समझ है। उन्होंने कहा, इसका दूसरा बड़ा खतरा यह है कि विद्यार्थी किसी सवाल पर चिंतन-मनन नहीं कर रहे। इससे मस्तिष्क की सोचने की क्षमता घट रही है। उन्होंने कहा कि एआई कभी भी किताबों का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने एनईपी-2020 के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा में शिक्षण की पहल की तरफदारी की। कहा कि उस भाषा में ज्ञान पाना ज्यादा आसान है जिसमें हम सोचते हैं। भाषा कभी ज्ञानार्जन में रुकावट नहीं बन सकती। बस ध्यान रखें कि तकनीकी शब्दावली का अनुवाद करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि शोध के लिए नई भाषा सीखना कोई बड़ी चुनौती नहीं।बताया ‘कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स’ का कांसेप्टप्रो. वर्मा ने ‘कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स’ की परिकल्पना की पृष्ठभूमि भी साझा की। बताया कि आईआईटी कानपुर में एमएससी करने के दौरान ‘रेसनिक हेलीडे’ की फिजिक्स की किताब मिली। अगले दो साल तक पढ़ाई के साथ स्कूल स्तर की यह पुस्तक उनके लिए मनोरंजन का साधन थी। पटना साइंस कॉलेज में शिक्षण शुरू किया तो पाया कि बच्चे इस किताब से समझ ही नहीं पा रहे। यह समझने में पांच साल लगे कि बच्चों को आसान पुस्तक की जरूरत है। इसके बाद आठ साल में प्रो. वर्मा की ‘कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स पुस्तक तैयार हो सकी। बीएचयू परिसर की सराहना करते हुए उन्होंने यहां के छात्रों को संदेश दिया कि शोध के साथ भावनात्मक लगाव जरूरी है। आइडिया कहीं से भी मिल सकती है, उसका तकनीकी रूपांतरण ही शोधार्थियों का काम है।बालों के सवाल पर लगाया ठहाकालंबे, सफेद और सुव्यवस्थित ‘सिग्नेचर’ हेयर स्टाइल के सवाल पर प्रो. एचसी वर्मा बच्चों की तरह खिलखिला उठे। कहा कि ये बाल भीड़ से अलग करते हैं। कई बार लोग इनकी वजह से दूर से पहचान लेते हैं। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान घर से निकलना और सैलून तक जाना भी मना था। उसी दौरान बाल बढ़ाए और अच्छे लगे तो इनकी देखभाल शुरू कर दी।

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Abhishek Tripathi

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो : अभिषेक त्रिपाठी पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय है। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर जुड़े हैं। वाराणसी संस्करण के लिए वह शिक्षा जगत और राजनीतिक दल में कांग्रेस बीट कवर करते हैं।


परिचय एवं अनुभव

अभिषेक त्रिपाठी वाराणसी में इससे पहले भी विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। शिक्षा और राजनीतिक बीट के रिपोर्टर के तौर पर 2021 से इन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। लगभग पांच वर्ष से इस भूमिका में इन्होंने विशिष्ट अभियान, असर और ऑफबीट खबरें भी शामिल हैं।


करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)

अभिषेक ने अपने करियर की शुरुआत 2007 में अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार से की। यहां पहले डेस्क और फिर रिपोर्टिंग में काम किया। रिपोर्टिंग में मेडिकल, रेलवे और अपराध जैसी बीट पर कााम किया। यहां से 2011 में हिन्दुस्तान वाराणसी की सेवाएं शुरू की। अगले छह वर्ष तक प्रशासन और क्राइम रिपोर्टिंग में कई प्रतिमान स्थापित किए। 2016 में दैनिक भास्कर भोपाल से जुड़े और यहां लोकल रिपोर्टिंग से इतर डिजिटल और देश-दुनिया की खबरों की समझ विकसित की। 2020 तक दैनिक जागरण के अलावा विभिन्न डिजिटल और प्रिंट माध्यमों से जुड़े रहने के बाद 2021 में दोबारा हिन्दुस्तान वाराणसी में शिक्षा बीट पर वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम शुरू किया।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

12वीं तक विज्ञान, इसके बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ने अभिषेक को जीवन की सभी धाराओं का अनुभव दिया। इसका असर पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों में रिपोर्टिंग, लेखन और प्रस्तुतिकरण पर दिखा। अभिषेक राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय एंगल वाली खबरों के लेखन में सिद्धहस्त हैं। प्रशासन और अपराध जगत की खबरों पर भी इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वाराणसी की भौगोलिक समझ और बड़ा सामाजिक दायरा भी इनकी रिपोर्टिंग में काफी मददगार साबित होता रहा है। 2013 से राजनीतिक, प्रशासनिक और विकास के मोर्चे पर बदलते बनारस के हर पहलू को इन्होंने गहराई से समझा और प्रस्तुत किया है। संप्रति शिक्षा जगत में प्री-प्राइमरी से लेकर आईआईटी की तकनीकी दक्षता वाली खबरों को भी लिख सकने में यह सक्षम रिपोर्टर हैं।


एंटरटेनमेंट और विजन

अभिषेक फिल्म, ट्रेंड्स, यूथ और लाइफस्टाइल विषयों पर भी बेहतरीन पकड़ रखते हैं। सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के लिए भी वह प्रसिद्ध हैं। बीते वर्षों में अपने अखबार के लिए इन्होंने कई विशेष कवरेज, इंटरव्यू, सीरीज प्लान किए हैं। अभिषेक का मानना है कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता और नयापन जरूरी है। इसके साथ ही खबरों का लेखन और प्रस्तुतीकरण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। मुद्दों की समझ और उनकी सटीक प्रस्तुति पाठक को समाचार पर ठहरने और बाद में उसकी चर्चा करने पर विवश करती है।


विशेषज्ञता
प्रशासनिक और राजनीतिक कवरेज
अपराध और मानवीय एंगल के समाचारों में सिद्धहस्तता
फिल्म स्टार, साहित्यकार और राजनीतिज्ञों के विशेष साक्षात्कार
शिक्षा, धर्म संस्कृति और ऑफबीट खबरें
डेस्क पर खबरों का संपादन और पेजमेकिंग

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