
कुर्की करने नगर में आई संभल पुलिस
Varanasi News - वाराणसी में फर्जी बीमा पॉलिसी के जरिए करोड़ों का क्लेम हड़पने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ संभल पुलिस ने कार्रवाई की। गिरोह के सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा के घर कुर्की की कार्रवाई की गई, लेकिन नोटिस तामिला करते हुए टीम को लौटना पड़ा। मंगलवार को दोबारा कुर्की की योजना है।
वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। फर्जी पॉलिसी के जरिए बीमा कंपनियों से करोड़ों का क्लेम हड़पने वाले अंतरराज्यीय संगठित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के लिए सोमवार को संभल पुलिस यहां पहुंची। वाराणसी पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम की मदद से कुर्की करने के लिए फुलवरिया स्थित सरैया और डिफेंस कॉलोनी निवासी गिरोह के मुख्य सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा के घर धावा बोला। हालांकि नोटिस तामिला कराते हुए टीम लौट गई। मंगलवार को दोबारा कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई 68 गिरफ्तार आरोपियों में 25 पर गैंगस्टर एक्ट लगाए जाने और संभल के जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद की जा रही है। जानकारी के अनुसार, संभल पुलिस वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलवरिया स्थित सरैया और डिफेंस कॉलोनी पहुंची।
कार्रवाई के दौरान कैंट थाना पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौजूद रही। टीम का उद्देश्य गिरोह के मुख्य सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा के फुलवरिया स्थित मकान को कुर्क करना था। हालांकि मौके पर मौजूद महिलाओं ने मकान को ओंकारेश्वर मिश्रा की संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कुर्की नोटिस दिखाने की मांग की। घर के भीतर सुषमा मिश्रा और किशोरी मौजूद थी, जिन्होंने प्रशासन से बातचीत की। नायब तहसीलदार शैलेश सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई जिलाधिकारी के आदेश पर की जा रही है। दरवाजा न खोले जाने और नोटिस की मांग के बीच प्रशासन ने मानवीय आधार पर एक दिन का समय देने की बात कही। इसके बाद टीम ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को मकान की कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। मौके पर चौकी इंचार्ज फुलवरिया दीक्षा पांडेय, राजस्व निरीक्षक सहित कैंट थाने की पुलिस टीम मौजूद रही। गौरतलब है कि बीमा कंपनियों को चूना लगाने वाले इस गिरोह के खिलाफ पिछले साल अप्रैल से जून के बीच थाना रजपुरा और थाना गुन्नौर में तीन मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों में बीएनएस की गंभीर धाराओं में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। जांच में सामने आया कि गिरोह गरीब और अशिक्षित परिवारों के आधार व पैन कार्ड का दुरुपयोग कर मरणासन्न या मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसियां कराता था। बाद में फर्जी नामिनी बनाकर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से क्लेम की रकम निकालकर आपस में बांट ली जाती थी।

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