ध्रुपद शामिल न किए जाने से गुंदेचा निराश

Apr 05, 2026 01:39 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - वाराणसी में संकटमोचन संगीत समारोह के 103वें संस्करण में ध्रुपद गायन को शामिल नहीं किए जाने पर पं. उमाकांत गुंदेचा ने निराशा व्यक्त की है। उन्होंने महंतजी के वादे को तोड़ने पर चिंता जताई है। ध्रुपद कला केंद्र ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की है, जबकि उनके शिष्य संजीव झा ने महंतजी से अनुरोध किया है कि कम से कम एक ध्रुपद प्रस्तुति शामिल की जाए।

ध्रुपद शामिल न किए जाने से गुंदेचा निराश

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। संकटमोचन संगीत समारोह के 103वें संस्करण में ध्रुपद को शामिल नहीं किए जाने से ख्यात ध्रुपद गायक पं.उमाकांत गुंदेचा बहुत निराश हैं। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वर्ष 2024 में समारोह के मंच पर सार्वजनिक रूप से किया हुआ वादा क्यों तोड़ दिया गया। दो दिन पहले ध्रुपदम् कला केंद्र, रायपुर के फेसबुक पेज पर पोस्ट कर इस प्रकरण पर दुख जाहिर किया गया। पोस्ट में लिखा गया है ‘संकटमोचन संगीत समारोह में एक भी ध्रुपद गायन की प्रस्तुति का न होना, ध्रुपद विधा के लिए बहुत ही दयनीय है। महंतजी स्वयं पखावज परंपरा से हैं, आप ही ध्रुपद की गरिमा ना समझेंगे तो कैसे चलेगा।

आपने स्वयं कहा था कि ध्रुपद की प्रस्तुति होगी। फिर ऐसा क्यों?’ अगले ही दिन एक और पोस्ट ध्रुवपदम् कला केंद्र के फेसबुक पेज पर किया गया। इसमें लिखा गया है कि ‘संकट मोचन संगीत समारोह में ध्रुपद को क्यों दूर रखा जाता है। जबकि भक्ति संगीत, सुगम संगीत, ख्याल गायन, लोक गायन, नृत्य सब का संयोग होता है संकट मोचन संगीत समारोह में, लेकिन भारत की शास्त्रीय संगीत की जननी ध्रुपद के गायन की कोई भी प्रस्तुति नहीं है।’इस दोनों पोस्ट के बाद उनके शिष्य संजीव झा ने संकट मोचन मंदिर के फेसबुक पेज को टैग करते हुए अनुरोधात्मक पोस्ट लिखी। इस पोस्ट में संजीव झा लिखते हैं ‘परमादरणीय महंतजी से प्रार्थना है कि हमारे पूज्यनीय गुरुजी को दिए वचन को पूरा करें एवं देश के सबसे बड़े संगीत आयोजन संकटमोचन संगीत समारोह में कम से कम एक ध्रुपद की प्रस्तुति को शामिल करें।’ इस पोस्ट के साथ उन्होंने वर्ष 2024 के आयोजन के दौरान उमाकांत गुंदेचा और आनंद गुंदेचा की गायन करते हुए फोटो भी पोस्ट की है जिसमें महंत प्रो.विश्वम्भरनाथ मिश्र पखावज पर संगत करते दिख रहे हैं। इस संबंध में पं.उमाकांत गुंदेचा ने कहा कि वर्ष 2024 की प्रस्तुति के अंत में मैंने मंच से ही प्रो.मिश्र से मांग की थी कि इस संगीत समारोह में ध्रुपद की प्रस्तुतियां भी होनी चाहिए। तब महंतजी ने मंच से ही घोषणा की थी कि प्रतिवर्ष एक कार्यक्रम ध्रुपद का अवश्य होगा। अपने वचन पर अमल करते हुए उन्होंने वर्ष 2025 में उस्ताद वसीफुद्दीन डागर को गायन के लिए आमंत्रित किया था।

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