आराजीलाइन में बनेगा सौ बेड का कैंसर संस्थान
Varanasi News - वाराणसी के आराजीलाइन ब्लॉक में 100 बेड का अत्याधुनिक कैंसर संस्थान स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान ओपीडी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और उन्नत जांच सुविधाएं प्रदान करेगा। इससे पंडित मदनमोहन मालवीय कैंसर संस्थान और बीएचयू पर दबाव कम होगा, और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को सुलभ और किफायती इलाज मिलेगा।

वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। आराजीलाइन ब्लॉक में जल्द ही 100 बेड का अत्याधुनिक कैंसर संस्थान स्थापित किया जाएगा। संस्थान में ओपीडी परामर्श के साथ कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और उन्नत जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इसके शुरू होने से सुंदरपुर स्थित पंडित मदनमोहन मालवीय कैंसर संस्थान और बीएचयू पर पड़ रहा भारी दबाव कम होगा। मरीजों को सुलभ और किफायती इलाज मिल सकेगा। प्रदेश सरकार की योजना के तहत प्रत्येक मंडल में एक कैंसर संस्थान स्थापित किया जाना है। इसी क्रम में बनारस मंडल के लिए वाराणसी जिले का चयन किया गया है।
आराजीलाइन ब्लॉक को इसके लिए चिन्हित किया गया है। भूमि चयन की प्रक्रिया भी जारी है। संस्थान के निर्माण के बाद पूर्वांचल के लाखों मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उच्चस्तरीय उपचार की सुविधा मिलेगी। प्रस्तावित संस्थान में 100 बेड की व्यवस्था के साथ गंभीर मरीजों के भर्ती होने की सुविधा होगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की जाएगी। ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा मिल सके। सीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद के अनुसार, यह केंद्र विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।लंबी वेटिंग से मिलेगी राहतवर्तमान में कैंसर के अधिकांश मरीज पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान और बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल पर निर्भर हैं। महामना कैंसर संस्थान में हर वर्ष करीब 35 हजार नए मरीज पंजीकृत होते हैं, जबकि लगभग 20 हजार फॉलोअप मरीज आते हैं। बीएचयू के ऑन्कोलॉजी विभाग में भी लगभग इतने ही मरीजों का दबाव रहता है। दोनों संस्थानों में कुल मिलाकर हर साल एक लाख से अधिक मरीजों का भार होने से लंबी वेटिंग की समस्या बनी रहती है। नए केंद्र के शुरू होने से इस दबाव में उल्लेखनीय कमी आएगी।आसपास के जिलों को भी होगा लाभयह संस्थान केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर और गाजीपुर समेत बिहार और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आएगा। मरीजों को अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ मरीजों की प्रतीक्षा अवधि भी काफी हद तक घटेगी।
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