तीन हजार मेडिकल स्टोर बंद, दवा के लिए भटक रहे मरीज
वाराणसी में दवा दुकानों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। 3000 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पतालों के बाहर लंबी कतारें लगीं। दवा विक्रेता समिति ने ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर चिंता जताई और सरकार से अनुचित मूल्य निर्धारण पर रोक लगाने की मांग की।
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। आल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर बुधवार को वाराणसी में दवा दुकानों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। शहर की 3000 से अधिक थोक और खुदरा दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और उनके परिजनों को उठानी पड़ी। लंका, कबीरचौरा, सोनिया, सप्तसागर मंडी, बुलानाला समेत शहर के प्रमुख इलाकों में मेडिकल स्टोरों के शटर गिरे रहे और लोग जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते नजर आए।
दवा दुकानों का बंद रहना
सुबह से ही सर सुंदरलाल अस्पताल, कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल और निजी अस्पतालों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें दिखीं। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद जब मरीज दवा लेने मेडिकल स्टोर पहुंचे तो बंद दुकानों ने उनकी चिंता बढ़ा दी। कई बुजुर्ग मरीज, जिन्हें रोजाना बीपी, डायबिटीज और हृदय रोग की दवाएं लेनी होती हैं, दवा न मिलने से परेशान दिखे। कुछ लोग इमरजेंसी दवाओं के लिए अस्पताल परिसर के बाहर खुली गिनी-चुनी दुकानों की तलाश करते रहे।
हड़ताल का उद्देश्य
वाराणसी दवा विक्रेता समिति के मंत्री संजय सिंह ने कहा कि यह हड़ताल सिर्फ व्यापारिक हितों के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि अनियंत्रित ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं बेच रहे हैं, जिससे नकली दवाओं का खतरा, एंटीबायोटिक के दुरुपयोग और मरीजों के निजी डेटा के दुरुपयोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
सरकार से मांग
समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारी छूट देकर छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। उन्होंने सरकार से ई-फार्मेसी कंपनियों के अनुचित मूल्य निर्धारण और अनियमितताओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


