Nagarvadhu dance on Manikarnika Ghat in Varanasi - मणिकर्णिका घाट: धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू- VIDEO DA Image
6 दिसंबर, 2019|1:59|IST

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मणिकर्णिका घाट: धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू- VIDEO

महाश्मशान पर औघड़ शिव से की अगले जन्म में ऐसी जिंदगी न देने की प्रार्थना (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

1 / 6महाश्मशान पर औघड़ शिव से की अगले जन्म में ऐसी जिंदगी न देने की प्रार्थना (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

2 / 6मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

मणिकर्णिका घाट पर नगरवधुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

3 / 6मणिकर्णिका घाट पर नगरवधुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

महाश्मशान नाथ के शृंगार महोत्सव के अंतिम दिन सजी झांकी (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

4 / 6महाश्मशान नाथ के शृंगार महोत्सव के अंतिम दिन सजी झांकी (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

5 / 6मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच रातभर खनकती रही घुंघरू (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

मणिकर्णिका घाट पर नगरवधुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

6 / 6मणिकर्णिका घाट पर नगरवधुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा (फोटो-मोहम्मद मुकीद)

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काशी में शनिवार की रात गंगा के तट पर खुशी और गम के दो किनारे मिले। एक तरफ चिताओं के सामने अपनों से बिछड़ने का गम उठ रहा था तो दूसरी ओर सुर, लय और ताल की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। मणिकर्णिका स्थित महाश्मशान नाथ के सम्मान में पांवों में घुंघरू बांधकर नगरवधुओं ने वर्षों पुरानी परंपरा निभाई। उनका नृत्य सैकड़ों दर्शकों के लिए मनरंजन का माध्यम बना मगर घुंघरुओं की झनकार के पीछे की टीस महसूस करने वाले भी कम नहीं थे। वह टीस औघड़दानी शिव को समर्पित थी एक प्रार्थना के रूप में कि महादेव, आगे फिर ऐसी जिंदगी न देना।

मोक्षधाम मणिकर्णिका महाश्मशान पर नृत्यांगनाओं के पांवों से झंकृत हुए घुंघरू बहुत से लोगों के लिए नया अनुभव था। साथ ही उन्होंने जताया कि मोक्ष का संदेश देने वाली काशी में मृत्यु भी महोत्सव है। बाबा महाश्मशाननथा महोत्सव की आखिरी निशा में आयोजित इस अनोखे कार्यक्रम को निहारने और कैमरे में कैद करने की भी होड़ दिखी।

महाश्मशान नाथ का शाम को पूजन हुआ। दूर-दराज से आईं गणिकाओं ने बाबा की आराधना की। उन्होंने गर्भगृह में  दीप जलाकर पूजन किया। जीवन के अंधकार से छुटकारा पाने की अरजी लगाने के साथ चैती व कजरी आदि गीतों पर नृत्य किया। भजनों के साथ शुरू गीत-संगीत के साथ मस्ती के तराने परवान चढ़ते गए। पूरी रात अविनाशी काशी का अल्हड़ अंदाज तारी होता रहा। नगर वधुओं ने चैती, कजरी व भजनों के साथ फिल्मी व भोजपुरी गीतों पर नृत्यांजलि पेश की। वे भभुआ, बक्सर, चंदौली, मुम्बई, कोलकाता आदि शहरों से आईं थीं।

इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता एवं व्यवस्थापक गुलशन कपूर, बिहारीलाल गुप्ता, विजयशंकर पाण्डेय, मनोज शर्मा, दिलीप यादव, संजय गुप्ता, अजय गुप्ता, राजू साह, दीपक तिवारी, दिलीप यादव, राम बाबू यादव,मनोज शर्मा, अजय गुप्ता, गजानन पांडेय, दुर्गा यादव, सुरेश यादव, सुनील श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। 

महाश्मशान नाथ का हुआ राजशाही शृंगार
महाश्मशान का राजशाही शृंगार हुआ। चैनू प्रसाद गुप्ता एवं गुलशन कपूर ने वेला, गुलाब आदि सुगंधित फूलों से शृंगार किया। इसके बाद मदिरा आदि का भोग लगा।

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