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मिश्र बंधुओं की सांगीतिक यात्रा के आगाज से खिल उठी काशी

 पं. राजन-साजन मिश्र

1 / 2 पं. राजन-साजन मिश्र

घाट की सीढ़ियों पर बैठे देशी-विदेशी श्रोता मगन होकर झूमते नजर आए

2 / 2घाट की सीढ़ियों पर बैठे देशी-विदेशी श्रोता मगन होकर झूमते नजर आए

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दुनिया में मचे उथल-पुथल के दौर में इंसान को सुकून व शांति का एहसास कराने निकलने वाले शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र की सांगीतिक यात्रा का आगाज शनिवार को गंगातट से हुआ। बड़े ही सहज भाव से जब उन्होंने कहा कि अपने जन्मभूमि से संगीत के इस विश्व यात्रा की शुरूआत कर मैं हर्ष की अनुभूति कर रहा हूं और सभी से स्नेह चाहता हूं तो काशीवासियों के चेहरे भी खिल उठे। वह भी मन ही मन उनकी इस मुहिम की सफलता की कामना की। 

अस्सीघाट के सामने गंगातट पर बने मंच से खुशनुमा माहौल और गुलाबी ठंड के बीच उल्लास से भरे मिश्र बंधुओं ने रागों के गुलदस्ता ‘भैरव से भैरवी तक’ को सुधीजनों को भेंट किया। ... और फिर गंगा की लहरों के साथ सुर, लय व ताल प्रवाहमान होने लगी। उन्होंने पहले गुलदस्ते के हर राग से श्रोताओं को रूबरू कराया। फिर दोपहर के राग हंस कंकड़ी से सांझ की पहर को रोशन किया और दोनों भाइयों के सधे स्वरों से बंदिशें निखर उठीं। रे लल्ला पग लागन दे...को घाट की सीढ़ियों पर बैठे देशी-विदेशी श्रोता मगन होकर झूमते नजर आए। इसी राग की तीनताल की बंदिश करत को करतार रामदास... सुनाया। बीच बीच में प्रख्यात तबला वादक पं. कुमार बोस के तबले की थाप के साथ भी श्रोताओं की तालियों की गूंज होती रही। 

राग मारवा में गुरु बिन ज्ञान न पायो...सुनाया। राग जय जवंती में ऐसो नवल लाड़ली राधा..., राग दुर्गा में जय जय दुर्गे माता... के बाद राग दरबारी में तीनताल में कई बंदिशों को सुनाया। मिश्र बंधुओं ने भगवान शिव की अराधाना करते हुए काशी के बसइया...सुनाकर विभारे कर दिया। उन्होंने राग भैरवी में दादरा चल रे परदेसिया नैना लगाके... सुनाकर गायन को विराम दिया। उनके साथ तबले पर पं. कुमार बोस तथा हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। 

ये रहे उपस्थित 
संगीत के रसीकों में जिलाधिकारी योगेश्वरराम मिश्र, एसएसपी आरके भारद्वाज, संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र, प्रख्यात सितार वादक पं. शिवनाथ मिश्र, ध्रुपद गायक ऋत्विक सांयाल आदि विशिष्टजन मौजूद रहे। 

चाय की लेते रहे चुस्कियां
घाट पर संगीत के साथ लोग चाय की चुस्की भी लेते रहे। वहां घुमकर दीर्घा में भी भ्रमण करते हर तो हर कोई खासकर नींबू की चाय लड़ाता रहा। वहीं झालमुड़ी आदि का भी लुत्फ उठाए।   

देश-विदेश के 50 शहरों में होंगे कुल 70
पं. राजन-साजन मिश्र के देश-विदेश में कुल 50 शहरों में करीब 70 सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भारत में 10 शहरों में आयोजन है। इसमें काशी के बाद 17 दिसम्बर को अहमदाबाद, अगले वर्ष सात जनवरी को कोलकाता, चार फरवरी को नई दिल्ली, 11 फरवरी बंग्लूर में है। जबकि पुणे, मुम्मबई, लुधियाना, पटना, लखनऊ आदि शहरों में आयोजन की तिथि तय नहीं हुई है। विदेश में करीब 40 शहरों में कार्यक्रम होंगे। मार्च में दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में होगा। मई से जुलाई के बीच कनाडा, अमेरिका, दक्षिण अमेरिका व ब्रिटेन में कार्यक्रम है। जबकि अक्तूबर में यूरोप व नवम्बर में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड आदि देशों में होगा। इस दौरान कई शहरों में संगीत पर संवाद, कार्यशाला व व्याख्यान का भी होगा।

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  • Web Title:musical journey of Mishra brothers started with advent in varanasi