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उकेर चुके हैं गजानन की ढाई लाख से अधिक आकृतियां

मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर में 56 घंटों में पांच हजार तीन सौ चित्र बनाए गणेश के

शिव प्रिया काशी में पार्वती-पुत्र गणेश की भी आराधना करने वाले कम नहीं हैं। कोई हर बुधवार गणेश मंदिर में शीश झुकाता है। कोई गणेशोत्सव का आयोजन करता है। वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी कला के माध्यम से भगवान गणेश की आराधना करते हैं। एक ऐसे ही कलाकार हैं विजय। 

काशी के अस्सी घाट निवासी विजय मूल रूप से मूर्तिकार हैं। उनमें ऐसा जुनून है कि विगत एक दशक के दौरान कैनवास पर उन्होंने भगवान गणेश की ढाई लाख से अधिक आकृतियां उकेरी हैं। बीएचयू के दृश्य कला संकाय से एमएफए करने वाले विजय ने मजाक मजाक में भगवान गणेश के चित्र बनाने शुरू किए थे। धीरे-धीरे यह जुनून उनके सिर चढ़ कर बोलने लगा। वर्ष 2004 में दुर्गाकुंड स्थित दुर्ग विनायक मंदिर में उन्होंने पहला प्रयोग किया। गणेश चतुर्थी के दिन उन्होंने 56 मिनट में काशी के 56 विनायकों की आकृति उकेरी थी। 

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इसके कुछ ही वर्षों बाद उन्हें एक और विशेष अवसर मिला। मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर में उन्होंने 56 घंटे तक लगातार चित्रकारी करते हुए उन्होंने भगवान गणेश के 5311 चित्र बनाए थे। मौजूदा समय में भगवान गणेश की ढाई लाख आकृतियां उनके कलेक्शन में रखी हुई हैं।

मेरी तमन्ना है कि भगवान गणेश के जो ढाई लाख चित्र मेरे पास हैं, उनके लिए संग्रहालय का बनाऊं। मैं कोशिश में लगा हूं। अब देखना है कि भगवान गणेश की कृपा कब होती है।
-विजय मूर्तिकार
 

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  • Web Title:More than two and a half million pieces of Gajanan have evolved