मकर संक्रांति पर्व 15 को ही मनाना शास्त्र सम्मत

Jan 13, 2026 02:01 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ रात 09:19 बजे होगी। शास्त्रों के अनुसार, पुण्यकाल अगले दिन दोपहर तक रहेगा, इसलिए पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। लोग खिचड़ी, तिल, चावल, और अन्य वस्तुओं का दान करेंगे।

मकर संक्रांति पर्व 15 को ही मनाना शास्त्र सम्मत

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सौर मान से सूर्य संक्रांति के समय से ही धर्मशास्त्रीय व्यवस्था में व्रत-पर्वों का निर्धारण मान्य है। इस वर्ष सौर मान से सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी यानी बुधवार की रात 09:19 बजे होगा। ऐसे में शास्त्र का स्पष्ट आदेश है कि सूर्य संक्रांति यदि प्रदोष काल अथवा रात में किसी भी समय लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन मध्याह्न काल तक होता है। अत: मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाना चाहिए। व्रत-पर्वों के लिए दिन का कोई भेद नहीं होता है। चाहे वह सप्ताह के किसी भी दिन पड़े। अत: गुरुवार को पुण्यकाल होने से खिचड़ी दान और सेवन किसी भी दृष्टि से दोषपूर्ण नहीं है।

वैसे भी गुरुवार को खिचड़ी न खाना मात्र लौकिक परंपरा है। इसका कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है। महावीर पंचांग के संपादक डॉ.रामेश्वरनाथ ओझा के अनुसार वर्ष में सूर्य की कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। कर्क एवं मकर की संक्रांतियों को अयन संक्रांति कहते हैं। इनमें सूर्य अपनी दिशा बदलता है। कर्क संक्रांति से सूर्य दक्षिण दिशा की ओर जाने लगता है। पुन: मकर की संक्रांति से उत्तर पथगामी हो जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को मकर संक्रांति अर्थात् खिचड़ी का पर्व कहते हैं। गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। लोग खिचड़ी, चावल, तिल, कंबल, ऊनी वस्त्र, जूता एवं पंचांग का दान करते हैं। 1957 के पहले 13 को पड़ती थी मकर संक्रांति हमारे मन में यह विश्वास है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती है। कारण यह कि कई दशकों से मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को ही पड़ता रहा है। इसका कारण यह था कि वर्षों पूर्व सूर्य मकर राशि में 13 जनवरी की रात या 14 जनवरी को मध्याह्न से पूर्व प्रवेश कर जाता था। 1957 से पहले मकर संक्रांति 13 जनवरी को पड़ती थी। 14 जनवरी को मकर संक्रांति की शुरुआत 1957 से हुई। उस साल 13-14 जनवरी की रात 1:10 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हुआ था। इससे मकर संक्रांति अगले दिन 14 जनवरी को मनाई गई।

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