
मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में दिया धरना
Varanasi News - वाराणसी में वामपंथी दलों ने मनरेगा में किए गए बदलाव के खिलाफ धरना दिया। डॉ. हीरालाल यादव ने कहा कि ये बदलाव गरीबों के काम पाने के अधिकार को सीमित करते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को बनाए रखा जाए और नई कानून को वापस लिया जाए।
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। मनरेगा में किए बदलाव के विरोध में वामपंथी दलों (सीपीएम, सीपीआई, भाकपा माले) ने सोमवार को वरुणा नदी के शास्त्री घाट पर धरना दिया। मुख्य वक्ता डॉ. हीरालाल यादव कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किया गया बदलाव गांव के गरीबों के काम पाने के अधिकार को सीमित करता है। बढ़ती ग्रामीण बेरोजगारी की स्थिति में जब गरीबों को और ज्यादा काम देने की आवश्यकता है, उसे सीमित करना गरीब विरोधी कदम है, बदला हुआ कानून विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) में फंड के मामले में अधिक बोझ राज्यों पर डाला गया है। जिसे राज्य सरकारों के लिए पूरा करना मुश्किल है।
योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। इस दौरान डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम पत्र दिया गया। इसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को यथावत रखने और उसके स्थान पर लाया गया नया कानून वापस लेने की मांग की गई। केंद्र सरकार मनरेगा में पर्याप्त फंड मुहैया कराए। कम से कम 200 दिन का काम और ₹600 रुपये मजदूरी प्रतिदिन दी जाए। नंदलाल पटेल, अमरनाथ राजभर, लाल बहादुर पटेल, अनिल कुमार सिंह, शिवनाथ यादव, अजय मुखर्जी, मोबिन अहमद, जयशंकर पांडेये, कामरेड मिठाई लाल मौजूद थे।

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