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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश वाराणसीनाटी इमली का भरत मिलाप: मूल स्थान पर बदले स्वरूप में लौटा लक्खा मेला

नाटी इमली का भरत मिलाप: मूल स्थान पर बदले स्वरूप में लौटा लक्खा मेला

वाराणसी। प्रमुख संवाददाता,वाराणसीNewswrap
Sat, 16 Oct 2021 07:30 PM
नाटी इमली का भरत मिलाप: मूल स्थान पर बदले स्वरूप में लौटा लक्खा मेला

बनारस के चार पारंपरिक लक्खा मेलों में शुमार नाटी इमली का ऐतिहासिक भरत मिलाप एक बार फिर अपने मूल स्थान पर कुछ बदले हुए स्वरूप में लौटा। राम भक्तों की बेशुमार भीड़ के बीच राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के मिलन की लीला हुई। परंपरा के निर्वाह के लिए काशी राज परिवार के प्रतिनिधि कुंवर अनंतनारायण सिंह अपने दोनों कुमारों के साथ लीला स्थल पर आए। इस बार राजपरिवार के सदस्यों का आगमन परंपरागत ढंग से हाथी पर होने के बजाय मोटर कार पर हुआ।

इस बार राजपरिवार के सदस्य हाथी पर सवार होकर नहीं आए। ऐसा भरत मिलाप की लीला के 478 सालों के इतिहास में पहली बार हुआ। हाथी खड़े होने वाली जगह राजसी कनात के नीचे राजमहल से लाई गईं पुराने दौर की तीन कुर्सियां रखी गईं। बीच में कुंवर और उनके दोनों ओर उनके कुमार विराजे। कोरोना को देखते हुए कुंवर ने भीड़ के बीच जाकर परिक्रमा करने के बजाय अपने प्रतिनिधि से पूजन सामग्री और सोने की गिन्नी कार्यवाहक व्यवस्थापक अभिनव उपाध्याय को भेंट करने के लिए भेजीं।

शाम ठीक 40:40 पर मानस मंडली ने भरत मिलाप की चौपाई का गान शुरू किया ‘...परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपासिंधु उर लाये का आरंभ होने से पहले ही भगवान श्रीराम और लक्ष्मण पुष्पक विमान से उतर कर भूमि पर दंडवत पड़े भरत और शत्रुध्न की ओर दौड़ पड़े। देव स्वरूपों के पीछे लाल पगड़ी में यदुवंशियों का हुजूम उसी रफ्तार से दौड़ लगाते हुए मिलाप स्थल की सीढ़ियों तक पहुंच कर थम गया। श्रीराम और लक्ष्मण ऊपर चढ़े, दंडवत लेटे भरत व शत्रुध्न को उठा कर गले लगा। चारों भ्राताओं का मिलन देख अपार जनसमूह हरहर महादेव का घोष करने लगा।

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